आम बेचने वाला कहानी

Top No1 Story For Kids In Hindi best interesting

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आज इस पोस्ट में हमने हिंदी स्टोरी मुहावरे से रिलेटेड एवं अन्य और भी तरह के कहानी के बारे में बात करेंगे जो कि पढ़ने में बहुत ज्यादा इंटरेस्टिंग और बहुत ही ज्यादा रोचक होगा। और इस कहानी से हम लोगों को सीखने और सिखाने लायक बहुत सी बातों की जानकारी मिलेगी तो चलिए आज हम इस पोस्ट के बारे में बात करते हैं।

कच्चा आम वाला की सफलता

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एक समय में रत्नापुर नामक एक गांव में भरत और वाणी नामक पति पत्नी रहते थे, उनके रोशन और रितेश नामक दो बच्चे भी थे। रोशन का अच्छा स्वभाव था, वह सब से मिल झुल जाता था। और रितेश बहुत चालू था, वह सबसे घमंड में बात करता था, उनके खुद का आम का एक बगीचा था। इतना ही नहीं उनके पापा का गांव में एक दुकान भी था, गर्मी के समय में अच्छे धूप के समय में दोनों भाई दुकान पर कटे हुए आम को बेच रहे थे, तभी रितेश कहता है कच्चे आम कच्चे आम नमक मिर्ची मसाला डाले हुए कच्चे आम, एक प्लेट कच्चे आम का सिर्फ ₹10 आइए बाबू आइए, रितेश चिल्ला चिल्ला कर आम बेच रहा था, और रोशन आम को काटकर उसमें मसाले डालकर दे रहा था।

आम बेचने वाला कहानी
आम बेचने वाला कहानी

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जो भी लोग दुकान आते थे बड़ा भाई उनसे पैसे लेता था, जब वह ऐसे ही दुकान में काम कर रहे थे। अचानक उस दिन उन दोनों का बचपन का दोस्त वहां आता है तभी वह कहता है, अरे रोशन रितेश कैसे हो तुम दोनों तभी रोशन कहता है हम ठीक हैं धीरज तुम कैसे हो, और क्या कर रहे हो। तभी रोशन का दोस्त धीरज कहता है अरे रोशन मैं ठीक हूं, मेरा पढ़ाई खत्म हो गया है, मैंने सोचा अभी खुद का एक व्यापार कर लूं। इसीलिए गांव वापस आ गया हूं, वैसे तुम लोग कच्चे आम को क्यों बेजते हो, तभी रोशन कहता है अरे यह हमारे पापा का व्यापार है। अचानक उनका सेहत खराब हो गया, तो हमने सोचा घर पर रखकर उन्हें आराम दे और दुकान हम चलाएंगे। इसीलिए अब मां और पापा दोनों घर पर ही है, वह दोनों आराम कर रहे हैं और हम व्यापार संभाल रहे हैं। तभी धीरज कहता है अच्छा ठीक है, अच्छा रोशन रितेश अभी मुझे देर हो रहा है। मैं घर चले जाता हूं, मैं तुम्हारी दुकान कल आऊंगा यह कहकर धीरज वहां से चले जाता है, अगले दिन जब दोनों भाई कच्चे आम का दुकान चला रहे थे तब धीरज पास जाता है, तभी रोशन कहता है धीरज अभी हम थोड़ा काम कर रहे हैं, तुम एक काम करो बैठो हम बस अभी आते हैं। तभी धीरज कहता है,ठीक है रोशन, रोशन के ऐसे कहने पर धीरज एक कोने में बैठकर रोशन और रितेश का इंतजार करने लगता है। इतने में ही रितेश वहां आकर धीरज को एक प्लेट कच्चे आम देता है, और धीरज उन्हें खाते रहता है। तभी धीरज रितेश से कहता है अरे वाह यह तो स्वादिष्ट है इसी कारण इनका दुकान इतना अच्छा चल रहा है।

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इसलिए इनके दुकान पर हमेशा भीर रहती है। मुझे पहले यह पता लगाना होगा, यह लोग कच्चे आम कहां से खरीद रहे हैं, तभी धीरज रितेश के पास जाता है और कहता है रितेश यह आम बहुत स्वादिष्ट हैं। तुम दोनों कहां से खरीदते हो, तभी रितेश धीरज से कहता है धीरज तुमने कहा कि आम बहुत स्वादिष्ट है यहां तक तो ठीक है। अब हम से यह पूछना ठीक नहीं है, तभी रोशन रितेश से कहता है अरे रितेश धीरज हमारा बचपन का दोस्त है, ऐसे बात थोड़ी करते हैं। तुम जरा भी दूसरों के बारे में नहीं सोचते हो यह अच्छा नहीं है। तभी धीरज रोशन से कहता है अरे तुम्हें तो पता ही है बचपन से तुम्हारा भाई जो पसंद नहीं आया। तो मुंह पर केह देता है, तभी रोशन धीरे से कहता है वैसे धीरज हमारा आम का एक बागीचा है। हम हमारे आम वहीं से लाते हैं, इसीलिए तो हम इस दुकान को इतने सालों से चला रहे हैं। तभी धीरज मन ही मन कहता है यह तो मेरे बचपन के दोस्त हैं फिर भी मुझे नहीं पता कि इनको आम का बगीचा है, वैसे ही मेरे दोस्त ही इस दुकान को और व्यापार को संभाल रहे हैं। इन दोनों को अलग करना बहुत ही आसान होगा। इनके मां बाप भी यहां नहीं है, तो और भी आसान होगा, जल्द से जल्द मुझे ऐसा कुछ करना होगा। इन दोनों भाइयों में झगड़ा शुरू हो जाए, धीरज मन ही मन बहुत सारी बातें सोचने लगता है। तभी धीरज रोशन से कहता है रोशन बहुत देर हो क्या अभी मुझे घर चलना चाहिए, यह कहकर वहां से चला जाता है। ऐसे ही उस दिन से हर रोज धीरज उसकी दुकान पर आते रहता है, धीरज उन दोनों से और भी ज्यादा गहरी दोस्ती करके उन दोनों के पास रोज आते रहता है।

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ऐसे कुछ दिन बीत जाते हैं हर रोज की तरह एक दिन ऐसे ही धीरज उन भाइयों के पास काम करते वक्त दुकान पर जा कर बैठे रहता है। इतने में ही रोशन रितेश से कहता है रितेश दुकान में आम खत्म हो गए, तुम अभी घर जाकर आम लेकर आओ। तभी रितेश कहता है रोशन से ठीक है भैया, यह कहकर रितेश आम लेने घर की ओर चल पड़ता है। तभी धीरज रोशन के पास जाकर कहता है रोशन तुम्हें तो पता है कि रितेश बहुत चालू है, तो उसके साथ व्यापार क्यों करना वह एक ना एक दिन जरूर धोखा देगा तुम्हें, इससे पहले वह कोई धोखा दे तुम ही अलग से अपना एक व्यापार रख दो ना। तब यह सारे पैसे तुम्हारे हो जाएंगे, तभी रोशन धीरे से कहता है धीरज मुझे पता है कि तुम मेरे अच्छे के लिए बोल रहे हो। पर कोई बात नहीं मुझे भाई के साथ व्यापार करना बहुत पसंद है, तभी धीरज मन ही मन कहता है यह रोशन कभी नहीं सुधरेगा और मेरी बातें इस पर कभी असर भी नहीं होगी, मुझे रितेश से ही बात करनी होगी, तभी धीरज रोशन से केहता है मैं तो तुम्हारे भले के लिए ही कहता हूं। मुझे बहुत देर हो रही है मैं घर जाता हूं,

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यह कहकर धीरज रितेश के पास जाता है और वहां देखता है रितेश सारे अकेले कच्चे आम को लेकर आ रहा है, तभी धीरज रितेश से कहता है देखा रितेश तुम्हें तुम्हारे भाई ना सारे मुश्किल काम तुझी से करवाता है, और सारे आसान काम वो कर लेता है। सिर्फ इसी कारण कि तुम छोटे हो, वह सारे काम तुम से ही करवाता है, सोचो अगर तुम अकेले व्यापार कर लो तो यह सब काम तुम्हें करना नहीं पड़ेगा, और तो और सारे पैसे तुम्हारे ही होंगे, तुम्हारे अकेले की ही तभी रितेश मन ही मन कहता है शायद धीरज ठीक ही कह रहा है, भैया हमेशा सारे मुश्किल काम मुझ से करवाते हैं, और वह दुकान पर ही रहते हैं, आज तक वह एक बार घर से कच्चे आम लेकर दुकान नहीं लाए। मैंने ही हमेशा सब कुछ किया है, शायद मुझे अपने खुद का एक व्यापार कर लेना चाहिए, और ऐसे ही ज्यादा पैसे भी मिलेंगे ऐसे वह धीरज की बातों में आकर सोच में पड़ जाता है।

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अगले दिन भी ऐसे ही दुकान में आम खत्म हो जाने के कारण रोशन रितेश से घर से आम लाने को बोलता है। तभी रितेश मन ही मन कहता है हर बार मैं ही आम क्यों लेकर आऊं इस बार में भैया से कह दूंगा कि वह खुद जाकर आम लेकर आए, तभी रितेश रोशन से कहते हैं भैया आप घर जाकर आम लेकर आइए मैं दुकान चला लूंगा तब तक, तभी रोशन रितेश से कहता है अरे तुम मुझसे ऐसे बात क्यों कर रहे हो। इससे पहले तो ऐसे बात तुमने कभी नहीं किया। मुझे पता है कि तुम दुकान में एक बार सारे काम नहीं संभाल सकते, इसीलिए मैं तुमसे हमेशा आम लेकर आने के लिए कहता हूं। ताकि बाकी काम में संभालू,
मुझे कोई मजा नहीं आता ऐसे जबरदस्ती तुमसे काम करवाने में तभी रितेश रोशन से ऊंची आवाज में कहता है मुझे पता है, आप क्या कर रहे हो और क्यों कर रहे हो। हमेशा सारे मुश्किल काम मुझसे ही करवाते हो, और सारे आसान काम आप खुद करते हो, ऐसा नहीं चलेगा कल से मुझे खुद का एक दुकान चाहिए।

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मैं अपना व्यापार खुद चला लूंगा। ऐसे कह के वह अपने फैसले के मुताबिक ही अगले दिन उसका खुद का एक दुकान और खुद का एक व्यापार शुरू कर देता है। वहीं कच्चे आम का दुकान चलाते रहता है, पर अलग से रितेश को ऐसा करता देख रोशन को पता नहीं चलता कि वह क्या करें, इसीलिए वह चुपचाप उसका दुकान चलाते रहता है। एक ही गांव में दोनों भाई के अलग दुकान और अलग व्यापार के कारण गांव वालों को एक ही दुकान जाना था, और वह एक दुकान रोशन का ही था। इसीलिए क्योंकि उन सबको पता है रितेश घमंडी है, और रोशन अच्छे से बात करता है। इसीलिए गांव के सारे लोग रोशन के दुकान ही चले जाते थे, ऐसे बहुत दिन भी जाते हैं। 1 दिन धीरज उस तरफ से गुजरते हुए। दोनों भाइयों को अलग दुकान करते देख चौक जाता है। और वह मन ही मन सोचता है कि एक काम तो हो गया दोनों भाइयों को मैंने अलग कर दिया, अब मुझे इन दोनों के बीच ऐसा गुस्सा दिलवाना होगा। कि वह एक दूसरे को मारना ही चाहे, तब मैं इनका सारा जायदाद, इनके पैसे, इनका दुकान, इनका व्यापार सब मेरा हो जाए, यह मन ही मन सोच कर वह रितेश के दुकान जाता है। और रितेश से कहता है, मुझे तो बहुत खुशी है कि तुमने खुद का एक दुकान शुरू कर लिया है। लेकिन मुझे बहुत दुख है कि सारे गांव वाले तुम्हारे भैया के यहां जा रहे हैं।

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 तुम्हारे दुकान कोई नहीं आ रहा है। तभी रितेश धीरज से कहता है, हां धीरज मुझे भी दुख है कि कोई मेरा दुकान नहीं आता, तभी धीरज कहता है दुख तो होगा ही। अब सारे लोग तुम्हारे भैया के दुकान ही जा रहे हैं, इतना कहकर धीरज वहां से चला जाता है। तभी रितेश मन ही मन सोचने लगता है मेरे दोस्त धीरज ने सही कहा मुझे भैया को अपने रास्ते से हटाना होगा तभी गांव वाले मेरे दुकान आएंगे, और सारे पैसे मुझे ही मिलेंगे। तब रितेश अपने दुकान से बाहर निकल कर रोशन की दुकान की ओर चल पड़ता है तभी वहां दुकान पर भीड़ देख रितेश रुक जाता है, उसी भीड़ में धीरज को देख रितेश चौक जाता है। तभी रितेश मन ही मन कहता है धीरज ने तो कहा कि वह घर चला जाएगा, लेकिन वह मेरे भैया के दुकान में क्या कर रहा है मुझे जानना ही होगा। यह फैसला करके रितेश धीरज और उसके भैया की बातें सुनते रहता है। तभी रोशन धीरे से कहता है मुझे दुख है कि मेरा भाई सोच रहा है कि गांव के लोग सभी मेरे पास ही आ रहे हैं।

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 उसके दुकान को ही नहीं जा रहा है बेचारा ना जाने क्या सोच रहा होगा। मैं एक काम करता हूं मैं गांव वालों से यह कह दूंगा कि मेरे सारे कच्चे आम खत्म हो गए हैं कम से कम वह मेरे भाई के पास तो चले जाएंगे ना, तो उसे भी दुख नहीं होगा। तभी रोशन वहां के गांव वाले को कहता है कि मेरे कच्चे आम खत्म हो गए हैं सभी रितेश के पास चले जाएं। तभी धीरज रोशन से कहता है कि कहां तुम रितेश के बारे में इतना सोच रहे हो। वह तुम्हारे बारे में कुछ नहीं सोचता है, तभी रोशन के दिमाग में यह बात आ जाती है कि जैसे धीरज मेरे भाई के बारे में मुझसे कह रहा है वैसे वह मेरे बारे में रितेश से भी कह रहा होगा, इसीलिए वह यह सब कर रहा है। तभी रोशन के दिमाग में एक बात आई कि क्यों ना मैं धीरज को उधार पैसे दे दूं व्यापार करने के लिए तब वह इधर की बात उधर उधर की बात इधर नहीं करेगा। तभी रोशन ने धीरे से कहा तुम कह रहे थे मुझे एक व्यापार करना है मैं तुम्हें पैसे दूंगा तुम अपना व्यापार चालू करो मेरे दोस्त, तभी धीरज मन ही मन कहता है तुम्हारा एक दिन पूरी जायदाद मेरे पास होगी मैं तुमसे पैसा क्या खाक लूंगा। तभी धीरज रोशन से कहता है रोशन तुम्हारे उधार के पैसे लेने कि मुझे कोई जरूरत नहीं है, तुम यह सब इसीलिए कह रहे हो क्योंकि मैं हर रोज तुम्हारे दुकान आ रहा हूं, अब से आना बंद कर दूंगा। ठीक है धीरज गुस्से में वहां से चले जाता है। तभी रितेश मन ही मन सोचता है। मेरा भैया तो अच्छा है इसलिए धीरज की इतनी बातें सुनने के बाद उसने सिर्फ मेरे दुख के बारे में सोचा है।

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इतना रिश्ते सोच कर धीरज के घर पीछे-पीछे चला जाता है और वहां धीरज की बातें सुनने की खिड़की से कोशिश करता है। तभी रितेश धीरज की सारी बातें सुन लेता है। और फिर वह अपने भाई रोशन से माफी मांगने चला जाता है, तभी रोशन रितेश को माफ कर देता है और फिर दोनों भाई खुशी-खुशी अपने एक दुकान पर कच्चे आम बेचने लगते हैं।

गोलगप्पा वाला

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लंबे समय पहले एक गांव में आदित्य और भावना नामक पति पत्नी रहते थे, उनका चित्रा नामक एक सुंदर सी बेटी थी। वह तीनों एक छोटे से घर में रहते थे। आदित्य बहुत नेक इंसान था, और जितना उसके पास था उतने में ही वह खुश रहने वाला था। वह पानी पुरी बेच के आए हुए पैसों से ही अपने परिवार का देखभाल करता था, हर रोज वह सुबह उठकर पानीपुरी बनाकर बेचने जाता था, आदित्य पानी पुरी बेचने जाता, तब वह गलियों में चिल्ला चिल्ला कर कहते आइए पानी पुरी खाई है। ₹10 में एक प्लेट एक बार खाइए पेट नहीं भरता है, उसके बनाए हुए पानीपुरी स्वादिष्ट रहने पर सभी वहां के लोग खाते थे, रोज की तरह वह 1 दिन पानी पुरी बेच के अंधेरा होने पर घर जा रहा था, तभी उसे रास्ते में कुछ लोग भागते हुए नजर आते हैं, उसके पलक झपकते ही वह लोग गायब हो जाते हैं आदित्य मन में ही सोचने लगता है कौन थे वह लोग और क्यों भाग रहे थे।

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इतनी जल्दी कहां गायब हो गए। तभी उसको रास्ते के बगल में एक सूटकेस दिखाई देता है। और यह कहता है यह किसका सूटकेस है, किसी ने खो दिया होगा, सुबह मैं इसे जमींदार को दे देता हूं वह इसके मालिक तक पहुंचा देंगे, ऐसे सोचकर वह सूटकेस अपने साथ घर ले जाता है। आदित्य की पत्नी व सूटकेस देखकर पूछती है। यह किसका सूटकेस है जी, तभी आदित्‍य कहता है मुझे नहीं पता आते समय रास्ते में मिला था, तभी आदित्य की पत्नी कहती है क्या है सूटकेस में, आदित्य कहता है मुझे नहीं पता मैंने देखा ही नहीं। तभी आदित्य की पत्नी कहती है अच्छा रुकी है मैं पहले देखती हूं इसमें है क्या, यह कह कर वह सूटकेस खुलती है और आदित्य को आवाज लगाती है इधर आ कर देखिए तो इसमें है क्या तब आदित्या कहता है, हां क्या है, पास आकर देखने पर वह सूट के हीरे मोती और सोने से भरा हुआ था।

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तभी आदित्य की पत्नी कहती है देखा आपने कितने हीरे कितना सोना है, इसमें अब हमें कभी मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। तभी आदित्य कहता है भावना यह सूटकेस हमारा नहीं है। किसी ने खो दिया है इसे, कल सुबह इसे जमींदार के हवाले करने के लिए लेकर आया हूं। तभी आदित्य की पत्नी कहती है तो क्या आप इसे जमींदार को लौट आएंगे, तभी आदित्य कहता है हां, भावना कहती है मैं इसे स्वीकार नहीं करूंगी कि आप जमींदार को यह सूटकेस दे दो। आपको मेहनत करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी, हम आखिरकार बहुत खुश रहेंगे। अपनी पत्नी का बात नहीं स्वीकार करने पर आदित्य अपने पत्नी को दुख ना पहुंचाने के लिए उसे कुछ नहीं कहता है, और सोच में पड़ जाता है। आदित्य मन ही मन सोचने लगता है अगर मैं वह हीरे मोती को लेता हूं तो वह गलत है अगर मेरी पत्नी हीरे मोती को लेती है तो वह गलत तो नहीं है ना, ऐसे सोच कर अपनी पत्नी से कहता है। किसी औरों का कमाया हुआ खर्च करना मुझे ठीक नहीं लगता है, मैं अपने पानी पुरी का दुकान ही चला लूंगा। तुम्हें जो पसंद तू वही करो। ऐसे कहने पर उसकी पत्नी बहुत खुश हो जाती है।

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कुछ दिन बाद उसकी पत्नी ही मिले हुए हीरे मोती और सोना बेच कर बड़ा सा घर खरीदती है। और वह सब उसी घर में रहने जाते हैं। मगर आदित्य अपना पानी पुरी का व्यापार नहीं छोड़ता है, 1 दिन जमींदार के पास एक औरत आती है। तभी जमींदार के सामने रो रो कर कहती है प्रभु मेरे घर से किसी ने सारे हीरे, मोती, सोना और मेरी गहने चुरा लिया है। मुझे समझ में नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं, इसीलिए मैं आपके पास भाग के आई। कृपया मेरी मदद करिए प्रभु, तभी जमींदार कहता है फिक्र मत करो माता, मेरे पर भरोसा करके आप चले जाओ, मैं उस चोर को पकड़ के आपको बुलाऊंगा। जमींदार के ऐसे कहने पर वह औरत वहां से चली जाती है, उसके बाद कुछ ही दिन में, जब आदित्य और उसका परिवार एक बड़ा घर खरीद के उसमें रहने लग जाते हैं। तभी गांव के लोग में उन्हीं के बारे में कुशल फुसुर हो जाती है। ऐसे ही यह बात जमींदार तक पहुंच जाती है। एक साधारण पानी पुरी बेचने वाला एकदम इतना बड़ा घर कैसे खरीद सकता है, जमींदार के कहने पर सेवक उन दोनों को उनके पास लेकर जाते हैं।

hindi fantasy stories तभी जमींदार आदित्य से कहता है आदित्य मुझे तुम्हारे बारे में सब पता है। तुम्हारे व्यापार के बारे में भी पता है, तुम्हें कुछ पूछने के लिए यहां बुलाया हूं। तभी आदित्य जमींदार से कहता है पूछिए प्रभु, तभी जमींदार कहता है तुम इतने कम दिनों में इतना बड़ा घर कैसे पाए हो। तभी आदित्य की पत्नी मन ही मन या सोचने लगती है कि मुझे ही कुछ करना पड़ेगा नहीं तो मेरे पति जमींदार बाबू को सब कुछ बता देंगे, तभी आदित्य की पत्नी जमींदार से कहने लगती है मेरे पति का कमाया हुआ पैसा बचा बचा के यह घर खरीदा है, तभी जमींदार कहता है माता आप लोगों पर इल्जाम लगाने के लिए नहीं बुलाया हूं। मेरे पास एक औरत आकर बोली है कि उसके गहने और सोना किसी ने चोरी कर लिया है।

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 उसी समय मैं अपने बड़ा घर लिया। हालात मुझे आप से पूछने पर मजबूर कर रहे हैं तो सच कहिए कि आपको इतने पैसे अचानक कहां से मिले। तभी आदित्य मन ही मन सोचने लगता है अगर अब भी मैं चुप बैठूंगा तो उस औरत का दुख का कारण मैं ही हो जाऊंगा, तभी आदित्य जमींदार से कहता है मुझे क्षमा करो प्रभु, और ऐसे बोल कर जो कुछ भी हुआ जमींदार को सारा बात बता देता है। और तुरंत गहनों वाला सूटकेस उनके हवाले कर देता है। तभी जमींदार कहता है तुम्हें अपनी गलती का एहसास है। और तुमने सच बता कर यह गहने लाके वापस कर दिए, इसीलिए मैं तुम्हें अपनी पहली गलती के लिए माफ कर दूंगा। और दंडित नहीं करूंगा। लेकिन याद रखना आदित्य गलती ना करना जितना जरूरी है। उतना ही जरूरी है गलती करने वालों को रोकना, यह कभी मत दोहराना। इतना सब कुछ कहने पर जमींदार आदित्य को माफ कर देता है तभी आदित्य और उसकी पत्नी जमींदार के यहां से चले जाते हैं। जमींदार उस औरत को उसके गहने वापस लौटा देता है।

निष्‍कर्ष :- 

दोस्‍तो आज के इस पोस्‍ट में हमनें कच्‍चे आम वाले की सफलता, गोलगप्‍पा वाला की कहानी के बारे पढा जो कि पढ़ने में बहुत ही ज्‍यादा इंटरेस्टिंग और बहुत ही ज्यादा रोचक है तो दोस्‍तो आपको यह कहानी कैसा लगा कमेंट बॉक्‍ स में कमेंट कर अवश्‍य बताएं और इसी तरह के कहानी को हमारे साइट  https://fasttricks.in/ पर जाए   

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