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best 4 real horror stories in hindi | खौफनाक हॉरर स्टोरी

best 4 real horror stories in hindi | खौफनाक हॉरर स्टोरी

चुड़ैल के गोलगप्पे

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real horror stories in hindi एक गांव में चुड़ैल का साया था, जिससे उस गांव की लोगों की जिंदगी ही बदल गई। 1 दिन गांव के तीन औरतें जिनका नाम श्यामा, रूपा और सपना था, आपस में बैठकर बातें कर रही होती है। तभी श्यामा रूपा से कहती है अरे रूपा बहन मैं तुम्हें क्या बताऊं मेरी सास ने तो मेरा दिमाग खराब रख कर रखा है। अगर मेरा बस चले तो मैं उसकी जान ही ले लूं, तभी रूपा हंसते हुए कहती है अरे क्या हुआ श्यामा बहन, इतना गुस्से में क्यों हो। शांति मौसी ने क्या कर दिया, तभी श्यामा रूपा से कहती है तुम घर में अकेली हो ना तभी इतने मजे से रहती हो। हमसे पूछो जिनकी सास है, एक तो खाती है इतना रोटी बना बना कर मेरे तो हाथ ही थक जाते हैं। ऊपर से हर काम में कमियां निकालती हैं, तभी सपना कहती है सही कह रही हो श्यामा बहन, मेरी कहानी भी कुछ कुछ तुम्हारी ही तरह है। मैं अपने पति के साथ जरा सा बैठ के आ जाओ पता नहीं गुड़िया को कैसे पता चल जाता है, वहीं आकर सर पर खड़ी हो जाती है। तभी रूपा हंसते हुए कहती है हां यह तो चिंता की बात है सपना बहन, मौसी को समझाओ नहीं तो दादी कैसे बनेगी। रूपा की बात सुनकर सपना श्यामा और रूपा तीनों जोर-जोर से हंसने लगती है। तभी उनकी नजर एक गोलगप्पे बाली पर पड़ती है।

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गोलगप्पे वाली बहुत ही सुंदर होती है, उसे देखकर तीनों को रहा नहीं जाता और वह गोलगप्पे वाली के पास तीनों चली जाती है। तभी श्यामा हंसते हुए गोलगप्पे वाली से कहती है अरे तुम तो औरत होकर गोलगप्पे बेच रही हो। तभी गोलगप्पे वाली हंसते हुए कहती है इसमें बुराई क्या है बहन, कोई गलत काम थोड़ी ना कर रहे हैं। मेहनत कर रहे हैं, वैसे आप लोग खाओगी गोलगप्पे। तभी समझते हुए कहती है बातें तो बहुत अच्छी बनाती हो, चलो देखते हैं गोलगप्पे कैसे हैं। उसके बाद श्यामा और सपना दोनों गोलगप्पे खाने लगती है, और रूपा वहीं खड़ी हो जाती है। रूपा को ऐसे खड़ी देख गोलगप्पे वाली बोलती है, अरे बहन आप नहीं खा रही गोलगप्पे क्या हुआ कहीं आपको अपनी फिगर खराब होने का डर लगता है क्या, तभी रूपा हंसते हुए कहती है अरे नहीं बहन ऐसी कोई बात नहीं, मैं बस बाहर का सामान कम खाती हूं और कोई बात नहीं। इन दोनों को खाने दो, श्यामा और सपना गोलगप्पे खाने के बाद कहती है अरे वाह गोलगप्पे वाली क्या गोलगप्पे हैं मुंह से तो स्वाद ही नहीं जा रहा मजा आ गया। ऐसे गोलगप्पे मैंने जिंदगी में कभी नहीं खाए, तुम तो रोज आया करो मैं तो रोज ही खाऊंगी। तभी गोलगप्पे वाली हंसते हुए कहती है हां, हां बहन जी यह भी कहने की बात है अब तो मैं रोज ही आया करूंगी नया नया काम जो खोला है। उसके बाद गोलगप्पे वाली वहां से चले जाती है, और वह तीनों औरतें भी अपने अपने घर चली जाती है। अगले सुबह रूपा पानी भरने के लिए कुएं पर जाती है, वहां औरतें आपस में बातें कर ही होती है। तभी एक औरतें रूपा से कहती है अरे रूपा बहन आपको पता है श्यामा और सपना कहां है, तभी रूपा कहती है कहां होंगी मतलब अपने घर में ही होंगी। तभी वह औरत रूपा से कहती है अरे नहीं रूपा बहन वह दोनों अपने घर से गायब है। कोई कह रहा था उनका चक्कर चल रहा था मर्दों के साथ, और उन्हीं के साथ घर छोड़कर भाग गई है। रूपा को यह बात सुनकर बहुत गुस्सा आता है और वह बोलती है तुम्हें शर्म आनी चाहिए।

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ऐसा कहकर रूपा वहां से चली जाती है शाम को वही गोलगप्पे वाली गांव में फिर से आती है। चीनू और टीनू नाम के दो लड़के उसे देख कर बोलते हैं। अबे टीनू वह देख क्या लड़की है, एक नंबर लड़की है यह तो तेरी भाभी बनने लायक है वीरू, तभी चीनू टीनू से कहता है सही कहा, चीनू लेकिन इसमें थोड़ा गलती होने का है यह मेरी नहीं तेरी भाभी बनेगी। फिर वह दोनों गोलगप्पे वाली के पास जाते हैं और बोलते। ए गोलगप्पे वाली, क्या गोलगप्पे खिलाएगी हम दोनों को, तभी गोलगप्पे वाली हंसते हुए कहती है आप दोनों भी कैसी बातें करते हैं। यह गोल-गप्पे क्या मैंने पानी भरकर हो रही में मारने के लिए रखा है, तभी टीनू जोरों से हंसने लगता है। और कहता है आप बहुत मजाकिया हो, मेरी तरह वैसे क्या नाम है आपका, तभी गोलगप्पे वाली हंसते हुए कहती है नाम में क्या रखा है साहब आप गोलगप्पे खाइए ना अगली बार आऊंगी तो नाम भी पता चल जाएगा। फिर चीनू और टीनू गोलगप्पे खाने लगते हैं, तभी चीनू हंसते हुए कहता है वह क्या गोलगप्पे है। कितने टेस्टी और लगता है तुम्हारे हाथ चूम लूं। फिर चीनू और टीनू गोलगप्पे वाली के सारे गोलगप्पे खा जाते हैं। तभी गोलगप्पे वाले कहती है अरे आप दोनों ने तो मेरे सारे गोलगप्पे खा गए। कहीं आपका पेट ना खराब हो जाए, तभी टीनू हंसते हुए कहता है कुछ नहीं होगा हमें। हम दोनों का बॉडी एकदम स्टील के माफिक है। वैसे कल आएंगी आप यहां, लेकिन गोलगप्पे वाली कुछ नहीं बोलती और वहां से चली जाती है। टीनू और चीनू को ज्यादा गोलगप्पे खाने से पेट में दर्द होता है। तभी चीनू जोर से चिल्ला कर कहता है हाय रे मर गया। अरे तीनों भाई यह लड़की का चक्कर अपने दोनों के लिए भारी पड़ गया।

hindi mai story
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real horror stories in hindi बहुत तेज पेट में दर्द हो रहा है। तभी टीनू कहता है सही बोल रहा है भाई मेरे पेट में भी बहुत दर्द हो रहा है। चीनू और चीनू दर्द के मारे पेट पकड़ कर बैठे होते हैं तभी, वह गोलगप्पे वाली उनके पास आ जाती है और बोलती है। क्या हुआ मेरे आशिक को ऐसे क्यों बैठे हो, पेट में दर्द हो रहा है क्या, तभी टीनू कहता है तुम्हें पता था क्या मिलाया है इसमें तुमने बताओ, लेकिन तभी गोलगप्पे वाली चुड़ैल के रूप में आ जाती है। उसे ऐसे देख कर तीनों और चीनू दोनों घबरा जाते हैं और भागने लगते हैं, लेकिन चुरैल उन दोनों को पकड़ लेती है और मार डालती है और वहां से चली जाती है। इसके बाद तो मानो यह रोज की बात हो जाती, रोज वह चुड़ैल गोलगप्पे बाली बनकर आती है और गोलगप्पे खिला कर रात में लोगों को मार डालती है। इन सब से गांव वाले बहुत परेशान हो जाते थें। और एक दिन पंचायत दिखाते हैं, पंचायत में रूपा भी जाती है। तभी पंचायत में मुखिया कहता है अरे गांव वालों सब लोग संकट में है सब साथ बैठकर इस समस्या का हल निकालते हैं। नहीं तो एक-एक करके पूरा गांव है खाली हो जाएगा। तभी रूपा का पति दिनू बोलता है, लेकिन मुखिया जी हमें तो कुछ पता नहीं है। कि यह सब कौन कर रहा है, तभी मुखिया जी दिनों से कहते हैं सही कह रहे हो दिनू बेटा, लेकिन हम लोग ऐसे शांत तो नहीं बैठ सकते। फिर पंचायत में कोई भी फैसला ना निकलने पर सभी गांव वाले अपने अपने घर चले जाते हैं। उसी दिन चुड़ैल गोलगप्पे बालिका भेज बदल के गांव में आती है। रूपा उसके पास जाती है और बोलती है। अरे गोलगप्पे वाली जरा गोलगप्पे खिला दे।

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सुबह से मन खराब हो रहा है। शायद चटपटा खाने से ठीक हो जाए, लेकिन तभी उसकी नजर गोलगप्पे वालों की पैरों पर पड़ती है। गोलगप्पे वाली के पैर उल्टे होते हैं। रूपा उसे देखकर समझ जाती है कि हो ना हो सब इसी का किया धरा है। रूपा सब समझने के बावजूद गोलगप्पे वहां खाने लगती है और वहां से चली जाती। और दीनू को घर में जाकर सारी बात बताती है जिसे सुनकर दीनू बोलता है। तुम पागल हो गई हो क्या रूपा अगर उस गोलगप्पे वाली पर तुम्हें सक था। तो तुमने गोलगप्पे क्यों खाए। और अपनी जान जोखिम में क्यों डाल रही हो। तभी रूपा दिनु से कहती है मैंने अपनी जान जोखिम में नहीं डाली तुमने एक बात ध्यान नहीं दिया। गांव में जितने भी आदमी मरे हैं वह सिर्फ आदमियों की है। एक भी औरत की नहीं है तुम इसका मतलब यह है कि यह चुरैल अभी सिर्फ आदमियों को मार रही है। तभी दिनू रूपा से कहता है लेकिन रूपा फिर भी औरतें तो गायब हो रही है। और वह चुड़ैल है तुम उसका मुकाबला कैसे करोगी। तभी रूपा हंसते हुए कहती है हम औरतेें में बड़ी शक्ति होती है। हम अगर अपने पर आ जाए तो किसी को भी अपने बस में कर ले। यह तो एक चुड़ैल है इसे मैं देख लूंगी। फिर रूपा और दिनू अपने कमरे में सो जाते हैं। लेकिन रूपा की चिंता में दीनू को नींद नहीं आती, और वह आंख बंद करके लेटा रहता है रात में चुड़ैल, उन दोनों के कमरों में आती है और रूपा को यू आराम से सोते देख हैरान रह जाती है। तभी चुडै़ल मन ही मन कहती है यह औरत तो सचमुच बहुत निडर है क्या आराम से सो रही है। लेकिन आज के बाद डरेगी, ऐसा कहकर चुड़ैल सोती हुई रूपा को उठा लेती है। और जंगल की ओर चल पड़ती है, दीनू भी चुपचाप चुड़ैल का पीछा करने लगता है।

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चुड़ैल एक गुफा के सामने रुक जाती है और गुफा को खोलती है। और कहती है खुल जा सिम सिम, फिर गुफा का दरवाजा खुल जाता है। और चुड़ैल अंदर चली जाती है। दिनू भी चुपके से उनके पीछे पीछे अंदर चला जाता है। अंदर जाकर चुड़ैल रूपा को एक अंधेरे कमरे में ले जाती है। और रोशनी करती है जैसे ही वहां रोशनी होती है, वहां के बाकी औरतें भी रूपा को दिखाई देती है। श्यामा और सपना भी वहां होती है, तभी रूपा चुड़ैल से कहती है अरे चुड़ैल गांव की औरतें यह सब यहां तुम यह क्या कर रही हो। लेकिन चुड़ैल कुछ नहीं बोलती, तभी सपना रूपा से कहती है रूपा बहन यह चुड़ैल पूर्णिमा के दिन हम सब औरतों की बलि देगी बचा लो हमें, तभी वहां दिनू आ जाता है और बोलता है। रूपा नहीं चुरैल बल्कि तू खतरे में है। दीनू सब औरतों को जल्दी मिसाल दे देता है। तभी सपना चुड़ैल से कहती है चुड़ैल तूने हमको और गांव वालों को बहुत परेशान किया है। गोलगप्पे की कसम तुझे छोड़ेंगे नहीं ऐसा कहकर और तेज चुड़ैल के ऊपर मिशाल डाल देती है और चुड़ैल जलने लगती है।

चुड़ैलों का बाजार

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कल्लूपूरा नाम के एक गांव में हर पूर्णिमा चुड़ैलों का बाजार लगता था। जो कोई उस बाजार में जाता चुड़ैलों उसे मार डालती और उसका खून पी जाती थी। धीरे-धीरे उस गांव में चुड़ैलों की दहशत इतनी हो गई। कि लोग कल्लूपुरा गांव छोड़कर दूर के गांव में बस गए। और कल्लूपुरा गांव एक खंडहर में बदल गया। और लोग कल्लूपुरा नाम से भी डरने लगे। वही कल्लूपुरा से दूर बगल के गांव चमकपुर में 2 दोस्त रहते थे जिसका नाम हीरा और मोती रहते थे। दोनों में बहुत गहरी दोस्ती थी, दोनों जहां भी जाते साथ जाते, जो भी करते साथ में करते, एक दिन दोनों दोस्त गांव के तालाब के किनारे बैठ कर बातें करने होते हैं। कि तभी उनका दोस्त सुखा सिंह वहां आता है। उसे देखकर हीरा और मोती हंसने लग जाते हैं। और बोलते हैं अरे सुखा सिंह तू तो और सूखता जा रहा है, कुछ लेता क्यों नहीं इस तरह से तो तू गायब हो जाएगा। तभी दोनों दोस्त हंसने लगते हैं। तभी मोती हीरा से कहता है अरे नहीं-नहीं हीरा वह सुखा सिंह तो, तेज हवा में उड़ेगा जैसे पंछी उड़ते हैं। और जरा धीरे हंसो नहीं तो घबरा जाएगा बिचारे।

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उन दोनों को हंसता और मजाक करता देख सुखा सिंह हो बोलता है। क्यों मेरे सूखे पन का मजाक बनाते हो, तुम दोनों कौन सा बड़े मोटे हो। और रही डरने के बाद तो मै किसी से नहीं डरता, बल्कि तुम दोनों ही घबरा जाते हो। तभी हीरा जोरों से हंसने लगता है और कहता है हम दोनों घबराते हैं, वे तीनों बातें कर रहे ही होते हैं, है तभी लल्लू नाम का चौथा दोस्त भी आ जाता है, और कहता है अरे क्या बातें हो रही है। जरा हमें भी तो बताओ। तभी सुखा सिंह कहता है अरे बातें क्या होनी है लल्लू भैया इन दोनों डरपोक से बात कर रहा था। यह दोनों अपने आप को बहादुर समझते हैं, सभी लल्लू सुखा सिंह से कहता है हां इसमें कोई शक है क्या, यह दोनों दोस्त तो वाकई में बहुत बहादुर है। तभी सुखाराम हंसते हुए कहता है लल्लू भैया आप भी ना ना जाने किस गलतफहमी में हो। इन दोनों के ऊपर बस की कुछ भी नहीं है। अगर इतनी ही बहादुर है तो उस कल्लू पूरा गांव की बाजार में जाकर दिखाएं। तब ही लल्लू सुखा सिंह से कहता है अरे नहीं-नहीं इस बच्चों की बस से बाहर है। रहने दो यह नहीं जा पाएंगे। तभी मोती लल्लू से कहता है अरे लल्लू भैया ऐसी बात नहीं है हम बहुत बहादुर हैं। और कहीं भी जा सकते हैं, आप बस बताओ कि चलना कहां है, तभी सुखा सिंह कहता है कल्लूपुरा गांव की चुड़ैलों की बाजार में बोलो जा पाओगे।

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सुखा सिंह की बात सुनकर हीरा घबराने लगता है और बोलता है अरे बाप रे वहां तो अच्छे-अच्छे नहीं जा पाते भला हम दोनों वहां कहां जाएंगे। सुना है वह चुड़ैल हो उस बाजार में आने वालों को मार डालती है और उनका खून पी जाती है, नहीं भैया हम दोनों नहीं जा पाएंगे। तभी लल्लू हंसकर कहता है हो गया इतनी सी बहादुरी है तुम दोनों में, उन दोनों की हंसी सुनकर मोती को गुस्सा आता है और वह बोलता है क्या हंस रहे हो हम दोनों जाएंगे वहां और देखते हैं कौन सा बाजार लगता है चुड़ैलों का, ऐसा कहकर मोती वहां से चला जाता है। उसके पीछे पीछे हीरा भी आ जाता है। तभी हीरा मोती से कहता है मोती भाई आपने तो कह दिया है लेकिन आपको पता है। कल्लूपुरा से आज तक कोई भी आदमी जिंदा नहीं लौटा है। कहीं हम दोनों की भी यह अंतिम यात्रा ना हो, तभी मोती हीरा से कहता है तुम भी न हिरा कितना घबराते हो। अरे यह चुड़ैल कुछ नहीं होती। यह गांव के लोगों की मनगढ़ंत कहानी है। देखना हम जाएंगे और आराम से वापस आ जाएंगे, वैसे तुम अगर साथ में नहीं आना चाहते हो तो मत आओ। तभी हीरा चिल्लाते हुए कहता है मोती भाई आज तो आपने यह बात बोल दी है लेकिन आगे से फिर कभी यह मत बोलना। अरे आपकी दोस्ती के लिए तो यह हीरा मरने को भी तैयार है।

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इसके बाद हीरा और मोती कल्लूपुरा गांव के लिए पैदल ही निकल जाते हैं। चलते चलते उन्हें शाम हो जाती है। उनके रास्ते में एक घना जंगल आता है, मोती हीरा से कहता है हीरा भाई अभी तो शाम हो गई है। और आगे जंगल भी काफी घना है। क्यों ना यही रात में रुक जाए, और सुबह कल्लूपूरा के लिए चलें। मुझे तो बहुत थकान हो रही है, मन कर रहा है सो जाऊं। तभी हीरा मोती से कहता है सही कह रहे हो मोती भाई, थकान तो बहुत हो रही है। क्यों ना यह कुछ खाना खा लेते हैं, और फिर सुबह आगे की यात्रा करेंगे। फिर हीरा और मोती वहीं रुक जाते हैं, वही खाना खाने के बाद जंगल में सो जाते हैं। रात में उन्हें किसी की गाने की आवाज सुनाई देती है, जिसे सुनकर हीरा और मोती उठ जाते हैं। उनके उठते हैं गाने की आवाज बंद हो जाती है, तभी हीरा मोती से कहता है अरे मोती तूने किसी गाने की आवाज सुनी, तभी मोती हीरा से कहता है लेकिन हीरा इतनी रात को जंगल में कौन गाना गाएगा, लगता है थकावट के मारे हम दोनों के कान बज रहे हैं। फिर दोनों वापस सो जाते हैं, लेकिन हीरा की आंखों में नींद नहीं होती है। वह जाग ही रहा होता है, की गाने की आवाज फिर सुनाई देती है। इस बार हीरा उठकर आवाज की दिशा में चला जाता है। आवाज झाड़ियों की दूसरी तरफ से आ रही होती है, तभी हीरा मोती से कहता है अरे कितना दर्द है इस आवाज में ऐसा लगता है कोई दर्द से भरा है। चलो चल के देखना चाहिए, जैसे हीरा झाइयों को पार कर दूसरी तरफ पहुंचता है। उसे एक औरत अपने पीठ करके दिखाई देती है।

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हीरा उसके पास पहुंचता है और उसके कंधे पर हाथ रख कर बोलता है कौन हो बहन जी, और इतनी रात को इस घने जंगल में अकेले गाना क्यों गा रही हो। हीरा की यह बात सुनकर औरत की गर्दन हीरा की तरफ घूम जाती है। वह एक चुड़ैल होती है, हीरा उसे देख कर डर जाता है, और मोती को आवाज लगाता है। तभी चुड़ैल हंसते हुए कहती है मैं ही गाना गा रही थी हीरा, हीरा मोती को आवाज लगाने लगता है कहता है मोती इधर आ मेरे भाई, चुड़ैल आ गई है जल्दी आओ और मुझे बचाओ। यह तो मेरा नाम भी जानती है, हीरा की चिल्लाने की आवाज सुनकर मोती वहां आ जाता है। और वह चुड़ैल को देखकर वह भी बहुत घबरा जाता है, तभी चुरैल हंसते हुए कहती है तुम दोनों घबराओ मत मैं तो तुम दोनों की मदद करने आई थी। तुम दोनों कल्लूपुरा मत जाओ वह बहुत ही खतरनाक जगह है, तभी हीरा चुड़ैल से कहता है लेकिन आप कौन हैं। हमारी मदद क्यों करना चाहती हैं, तभी चुड़ैल कहती है मेरा नाम सन्नो है। मैं यही कल्लूपुरा में रहती थी, मैं बहुत खूबसूरत थी। पूरे जिले में मेरे से सुंदर एक भी लड़की नहीं थी, यही सुंदरता मेरी दुश्मन बनी। एक दुस्ट तांत्रिक की नजर मेरे ऊपर परी। जब वह मुझे नहीं पा सका तो वह अपने जादू से मुझे चुड़ैल बना दिया।

haunted story in hindi
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तभी मोतीच चुड़ैल से कहता है आपके साथ तो बहुत बुरा हुआ। लेकिन आप चुरैल जोरे से मुक्ति नहीं पा पाए ऐसा क्यों। तभी चुड़ैल मोती से कहती है उस तांत्रिक के पास, एक जादुई छड़ी है। उसमें मैं मेरी और मेरी जैसी कई चुडै़ल कैद है। वही तांत्रिक हर पूर्णिमा को लड़कियों का बाजार लगाता है, और जो लड़की उसको मना करती है वह उसे चुड़ैल बना देता है। उसी के डर से गांव वाले कल्लूपुरा पुरा गांव छोड़ कर जा चुके हैं। तभी हीरा चुड़ैल से कहता है आप चिंता मत करो चुरैल जी, हम दोनों उस दुस्ट तांत्रिक को सजा देंगे। और इस गांव को भी आजाद कर आएंगे, बस आप को हम दोनों की मदद करनी होगी। फिर हीरा चुड़ैल को अपने काम में अपनी योजना बताता है। जिसे सुनकर चुड़ैल हंसते हुए बोलती है, तुम दोनों तो कमाल के हो। हीरा तुम तो मुझे बहुत पसंद आए, अगर मैं जिंदा होती तो तुमसे शादी कर लेती। तुम दोनों अब कल्लूपुरा पहुंचो मैं तुम्हें वही मिलूंगी। उसके बाद चुड़ैल वहां से चली जाती है। तभी हीरा और मोती कल्लूपुरा के लिए चल पड़ते हैं। शाम को हीरा और मोती कल्लूपुरा पहुंचते हैं, तभी मोती हीरा से कहता है अरे हीरा भाई आज तो पूर्णिमा की रात है। यानी वह चुड़ैलों का बाजार फिर से लगेगा। और वह तांत्रिक फिर से आएगा, तभी हीरा मोती से कहता है मोती तुम चिंता ना कर इस बार वह आएगा तो जरूर लेकिन वापस नहीं जा पाएगा। हम दोनों भाई उसका जादू खत्म कर देंगे, उसके बाद हीरा और मोती छुप कर बैठ जाते हैं।

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 रात होने का इंतजार करने लगते हैं, रात होते ही कल्लूपुरा गांव में एक रोशनी सी आ जाती है। और ना जाने कहां से बहुत सी चुरैले वहां आ जाती है। तभी वहां तांत्रिक आ जाता है और, और चुड़ैलों से बोलता है। मेरी गुलाम चुड़ैलो आज का बाजार सजाओ, और आज मेरी साधना के लिए जो लड़कियां लाई हो। सामने लाओ, हीरा मोती यह सब दूर से देख रहे होते हैं। तभी
सन्नो चुड़ैल वहां आ जाती है और मोती को सारी पहना कर ले जाती है। तब वहां जाकर तांत्रिक से कहती है तांत्रिक देवता पहले यह नाचीज़ सन्नो चुड़ैल का तोहफा ले लो। आज ही शहर से लाई हूं, मोती को देखकर तांत्रिक खुश हो जाते हैं। और बोलता है, वाह चुड़ैल क्या लड़की लाई है। इतनी सुंदर, आज तो साधना में मजा आ जाएगा। इसे मेरे पास लाओ। चुड़ैल मोती को जो कि औरत के बीच में होता है तांत्रिक के पास लेकर पहुंचती है। जैसे ही मोती तांत्रिक के पास पहुंचता है, उसके हाथ से छड़ी लेकर हीरा के पास फेंक देता है। तभी तांत्रिक गुस्से में कहता है दुष्ट औरत यह तूने क्या किया पता है वह क्या था। अब तू और तेरा यह पति दोनों मरेंगे, तभी मोती तांत्रिक से कहता है यह क्या औरत औरत लगा रखा है। अबे तांत्रिक मैं मर्द हूं, अब तू तो गया।

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तभी तांत्रिक मोती से कहता है औ हो तुम तीनों मिले हुए हो। मैं तुम तीनों को जिंदा नहीं छोडूंगा, लेकिन इससे पहले तांत्रिक कुछ करता है हीरा उसकी छरी तोड़ देता है। छरि के टूटते ही सारा जादू खत्म हो जाता है। और सारी चुरैले वहां से गायब हो जाती है। फिर हीरा और मोती उस तांत्रिक को बांध देता है। तभी सन्नोचुड़ैल बोलती है। तुम दोनों ने इस गांव को इस तांत्रिक से मुक्त कर दिया। मैं तुम्हारा एहसान कभी नहीं भूलूंगी। लाऔ इस दुष्ट को मुझे दे दो मुझे इस दुष्ट से बहुत बदले लेने हैं। ऐसा कहकर चुड़ैल उस तांत्रिक को मार देती है। और कुछ देर में चुड़ैल वापस सन्नो के रूप में आ जाती है। तभी हीरा कहने लगता है अरे वाह तुम तो सचमुच बहुत सुंदर हो मुझसे शादी करोगी।

बर्फ वाली चुड़ैल

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एक गांव में बंटी नाम का एक बच्चा रहता था। वह पढ़ने लिखने में बहुत कमजोर था, जिसके कारण सभी बच्चे उसका मजाक उड़ाते थे। तभी एक बच्चे बंटी से कहता है अरे बंटी बोल को ठीक से फेंको तुम ही तो कुछ भी नहीं आता है। तभी एक बच्चा बोलता है सही कहा मोटू तुमने यह ना पढ़ने में अच्छा है और ना ही खेलकूद में, दोनों बच्चे उसका मजाक उड़ाने लगते हैं। तभी बंटी की दोस्त चुटकी कहती है अरे तुम दोनों को ऐसे मजाक नहीं उड़ाना चाहिए माना बंटी कमजोर है इसका मतलब यह थोड़ी ना कि उसका मजाक उड़ाया तुम दोनों बहुत बुरे हो। तभी बंटी और चुटकी घर चले जाते हैं, तभी चुटकी बंटी से कहती है बंटी मुझे अभी जाना है। मेरे घर पर कुछ मेहमान आने वाले हैं, मैं तुम्हारे साथ खेलने नहीं रुक सकती हम बाद में खेलेंगे। तभी बंटी चुटकी से कहता है ठीक है चुटकी फिर चुटकी वहां से चली जाती है। तभी बंटी अपनी मां से कहता है मां अब मैं किसके साथ खेलूंगा सब मेरा मजाक उड़ाते हैं। मैं ऐसा क्यों हूं। मां मुझे बहुत बुरा लगता है। तभी बंटी की मां बंटी को समझाते हुए कहती है अरे बेटा तुम ऐसा मत सोचो बस मेहनत करो तुम 1 दिन बहुत होशियार बनोगे। चलो अब मुझे काम करने दो जाओ पढ़ाई कर लो थोड़ी देर, बंटी घर से बाहर निकल जाता है और बंटी अपने खेतों की तरफ निकल जाता है वह बहुत उदास होता है।

khaniya hindi me
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तभी बंटी एक पेड़ के नीचे जाकर बैठ जाता है। तभी बंटी मन ही मन कहता है मैं तो हर वक्त पढ़ता हूं कभी मेरे नंबर अच्छे नहीं आते हैं। कोई नहीं है जो मेरे साथ खेलें, इतना कहकर बोर होने लगता है। तभी एक छोटी सी लड़की वहां आती है। बंटी रो रहा होता है, वह छोटी सी लड़की बंटी से पूछने लगती है तुम रो क्यों रहे हो। तभी बंटी उस लड़की से कहता है मैं इस भरी दुनिया में बिल्कुल अकेला हूं। मेरा कोई दोस्त मेरे साथ खेलना नहीं चाहता है, तुम कौन हो। तभी वह छोटी सी लड़की बंटी से कहती है मेरा नाम रानी है। मैं भी अकेली हूं मेरा भी कोई दोस्त नहीं है, क्या तुम मेरे दोस्त बनोगे तभी बंटी हंसते हुए कहता है क्यों नहीं तुम मेरे साथ खेलोगे। और मेरा मजाक तो नहीं और आओगी सब की तरह, तभी वह लड़की चुड़ैल बच्ची बन जाती है। बंटी डर जाता है, और वह बच्ची से कहने लगता है तुम तो भूतनी हो। मुझे छोड़ दो वैसे भी मैं दुनिया का सबसे दुखी बच्चा हूं। तभी चुड़ैल बंटी से कहती है अरे चुप करो मैं तुम्हें नुकसान पहुंचाने नहीं आई हूं। मैं भी तुम्हारा दुख महसूस कर सकती हूं, मेरे स्कूल में भी सब मेरा मजाक उड़ाते थे।

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 मैं हमेशा क्लास में फेल हो जाती थी बार-बार और एक दिन मैं रोड एक्सीडेंट में मर गए तब से मेरी आत्मा भटक रही है। पर तुम मुझे बहुत अच्छे लगे, तुम मेरे दोस्त बनोगे। तभी बंटी कहता है, और यहॉं पर हम खेलेंगे क्या, तभी वह छोटी चुड़ैल बंटी से कहती है तुम बताओ तुम्हें क्या पसंद है। तभी बंटी छोटी चुड़ैल से कहता है मैं तो बर्फ के पहाड़ों में घूमना और झूला झूलना चाहता हूं। पर रहने दो और किसी खेल में मैं अच्छा नहीं हूं। तभी चुड़ैल बंटी से कहती है तुम्हें बर्फ से खेलना है। तो मैं तुम्हारे लिए बर्फीला सकती हूं, चुरैल हाथ घुमाते हैं और वहां बर्फ गिरने लगता है। तभी बंटी खुश होते हुए कहता है अरे वाह तुमने तो कमाल ही कर दिया, बर्फ रुकती नहीं और देखते ही देखते पूरा गांव बर्फ से ढक जाता है। चारों तरफ बर्फ ही बर्फ होती है, तभी बंटी चुरा से कहता है अरे मुझे तो ठंड लग रही है तभी चुड़ैल बंटी को जादू से गर्म कपड़े पहना देती है, तभी बंटी हंसते हुए कहता है अरे वाह अब ठीक है। तब बंटी बहुत खुश रहता है और चुड़ैल से कहता है मुझे बहुत मजा आ रहा है, तभी बंटी चुड़ैल से कहता है क्या तुम वर्फ के झूले बना सकती हो तभी चुरैल बंटी से कहती है हां क्यों नहीं मैं तुम्हारे लिए बर्फ के बहुत सारे झूले बना सकती हूं।

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चुडैल बंटी के लिए झूले बना देती है और कहती है चलो इन झूलों पर खेलते हैं। बंटी चुड़ैल के साथ झूला झूलने और खेलने लगता है, तभी गांव वाले भी बर्फ के गोले बनाकर एक दूसरे पर फेंकने लगतें और खेलने लगते हैं। लेकिन बर्फ बढ़ती ही जाती, तभी एक बुढा और बुढी बाहर में रहते हैं तभी बुढी बुढे से कहती है अरे रामू के पापा चलो अंदर, बुढ़ापा में ज्यादा जवानी नहीं दिखाइए। हड्डियां करक जाएगी ठंड में, चलिए अंदर, तभी वह बुढा हंसते हुए कहता कहता है बुढा होगा तेरा बाप अभी तो मैं जवान हूं। सभी लोग घर के अंदर चले जाते हैं उधर बंटी की मां भी बहुत परेशान रहती है तभी बंटी के दो दोस्त बंटी को कहते हैं अरे बेवकूफ बंटी घर चले जाओ नहीं तो तुम्हारा यह कमजोर शरीर, बर्फ में ना पिघल जाए। तभी चुड़ैल कहती है रुको तुम्हें तो मजा चखाना ही पड़ेगा तुमने मेरे दोस्त को परेशान किया है। चुड़ैल उन दोनों को बर्फ से ढक देती है, तभी वह दोनों बच्चे चुड़ैल को देख कर भाग जाते हैं। तभी बंटी जोरों से हंसने लगता है और चुड़ैल से कहता है मजा आ गया, तुम तो बहुत अच्छी हो। तभी वहां से चुटकी अपने छतरी लेकर घर जा रही होती है तभी बंटी ने चुरैल से कहा रानी वह देखो चुटकी बस यही मेरी एक अच्छी दोस्त है।

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 बंटी छुटकी को आवाज लगाने लगता है। अभी चुड़ैल बंटी से कहती है यह क्या कह रहे हो मुझे वह पसंद नहीं, सिर्फ तुम ही मेरे एक दोस्त हो। और मेरे साथ ही खेलोगे, और हमेशा मेरे साथ ही रहोगे मैं उसके ऊपर भी बर्फ गिरा दूंगी। तभी बंंटी जोरों से चिल्लाकर कहता है ठीक है ठीक है लेकिन तुम उसे परेशान मत करना। उसे जाने दो, पर अब मैं घर जाना चाहता हूं, मैं थक गया। और भूख भी लगी है, तभी चुड़ैल बंटी से कहती है तो क्या हुआ आओ मैं तुम्हें खाना देती हूं तभी चुड़ैल जादू से उसे मांस खाने देती है। तभी बंटी चुडै़ै़ल से कहता है मैं यह नहीं खा सकता, हमें लोगों को मारकर नहीं खाना चाहिए। तभी चुरैल बंटी से कहती है लेकिन मैं तो यही खाती हूं, और तुम्हें भी अब यही खाना पड़ेगा। तभी बंटी चुड़ैल से कहता है नहीं नहीं मुझे अब जाने दो, मुझे बहुत ठंड भी लग रही है। अगर मैं वक्त पर घर ना गया तो मेरी मम्मी परेशान हो जाएगी। और मुझे डांट आएगी, तभी चुरैल कहती है तुम्हें जाना होगा ठीक है। लेकिन वादा करो तुम कल आओगे। तभी बंटी चुड़ैल से कहता है ठीक है वादा, फिर वही अपने घर चला जाता है। और घर जाते हैं उसे बहुत तेज बुखार हो जाती है। तभी बंटी की मां बनती से कहती है अरे बंटी तुम कहां चले गए थे, तुम्हें कुछ अक्ल है मैं कितनी परेशान हो गई थी। तुम्हारे पापा भी बहुत परेशान हो गए, बंटी की मां बंटी को जैसे ही छुती है और कहती है अरे तुम्हें तो बहुत तेज बुखार है। तभी बंटी के पापा वहां चले आते हैं और कहते हैं बाहर इतनी बर्फ गिर रही है कि डॉक्टर भी नहीं आ सकते हैं और सभी रास्ते बंद हैं अब हम क्या करेंगे। एक काम करो घर में जो दवाइयां है वही दे दो, शायद उससे आराम मिले। चुटकी को भी पता चलता है कि बंटी की तबीयत खराब है। वह बंटी को देखने जाती है, वहां चुड़ैल को भी मन नहीं लगता तो वह भी बंटी का घर जाती है। तभी चुडै़ल चुटकी से कहती है अरे तुम यहां क्यों आई हो मुझे तुम पसंद नहीं तभी चुटकी चूड़ैल से कहती है मैं बंटी को देखने आई हूं। उसकी तबीयत बहुत खराब हो गई है क्योंकि वह पूरा दिन तुम्हारे साथ बर्फ में खेल रहा था, तुम्हारे पास तो जादू है क्या तुम उसे ठीक नहीं कर सकती हो। और यह बर्फ भी खत्म कर दो अब, चुड़ैल बंटी के बारे में सुनकर उसे देखने के लिए उसके घर के अंदर चली जाती है। बंटी के मां पापा चुड़ैल लड़की को देखकर डर जाते हैं।

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बंटी बिस्तर पर लेटा होता है तभी बंटी अपनी मां से कहता है माम्‍मा डरो नहीं यह मेरी दोस्त है। तभी चुड़ैल बंटी के पास जाती है और कहती है यह सब क्या हो गई है सब मेरी वजह से हुआ है, तभी बंटी चुडै़ल से कहता है नहीं नहीं ऐसा मत कहो तुम मेरी अच्छी दोस्त हो। तभी चुड़ैल बंटी से कहती है नहीं मैंने ही तुम्हें बीमार किया है। अब मैं ही तुम्हें बचाऊंगी, मैं तुम्हें मरने नहीं दूंगी बस इसके लिए मुझे सारी शक्तियां तुम्हें देनी होगी। वह बंटी को ठीक कर देती है और गांव की सारे वर्क भी पिघल जाती है। चुड़ैल बंटी के सर पर हाथ रखती है और बंटी बहुत होशियार भी हो जाता है और ठीक भी हो जाता है। तभी चुडै़ल बंटी से कहती है बंटी अब मुझे जाना होगा मैंने अपनी सारी शक्तियां तुम्हें दे दी है तुम अच्छे से पढ़ाई करना और अपने मां-बाप का नाम रोशन करना।

जादुई भूत

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मायापुर नाम का एक गांव था, जहां शंकर नाम का एक दूध बेचने वाला रहता था। शंकर के पास एक गाय थी, शंकर अपने गाय से बहुत प्यार करता था। क्योंकि वही उसकी रोजी-रोटी का साधन थी। शंकर रोज अपनी गाय के लिए चारा डालता और उसे पानी पिलाता, इसके बाद वह नहा धोकर भगवान की पूजा करता था। इतने में उसकी पत्नी नाश्ता तैयार कर देती थी। शंकर नाश्ता करने के बाद केन को धोकर दुध भर लेता। शंकर केन को साइकिल पर टांग कर लोगों के घर दूध ले जाता। घरों में दूध पहुंचाने के बाद अगर दूध बच जाता था। तब शंकर भोलापुर जाने वाले रोड पर एक पैर के नीचे कैन रखकर बेच लेता था। लोग शंकर की गाय का दूध बहुत पसंद करते थे, इस तरह शंकर की अच्छी कमाई होती थी। शाम को वह सब्जी और फल लेकर अपने घर जाता था और बचे हुए पैसे अपनी पत्नी को देता। 1 दिन रात में शंकर का पड़ोसी संजय शंकर के घर आता है। तभी संजय शंकर से कहता है अरे शंकर थोड़ा दूध मिल जाएगा क्या, कुछ मेहमान आ गए हैं। चाय बनानी है, तभी शंकर संजय से कहता है हां हां संजय क्यों नहीं, तुम्हारे मेहमान मेरे मेहमान। तभी शंकर अपनी पत्नी से कहता है अरे मालती जरा संजय भैया को दूध दे दो उनके घर मेहमान आए हैं। मालती दूध देने के लिए किचन की ओर चली जाती है। तभी संजय की नजर शंकर के घर में रखी हुई टीवी पर पड़ती है।

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फ्रिज कूलर और वाशिंग मशीन पर पड़ती है। संजय शंकर के घर से दूध लेकर बाहर आता है और मन ही मन सोचता है। अरे शंकर ने तो दूध बेचकर बड़ा पैसा कमा लिया है, मुझे भी एक गाय खरीद लेनी चाहिए। मुझे भी दूध बेचने का काम शुरू करना चाहिए, फिर मैं भी जल्दी ही शंकर की तरह अमीर हो जाऊंगा। अगले दिन संजय शनिवार को लगने वाले बाजार से एक गाय खरीद लाता है। संजय गाय को खिलाता कुछ भी नहीं है और दूध निकालने के लिए गाय की खूब पिटाई करता है। फिर भी गाय अगर दूध नहीं देती तो गाय को इंजेक्शन लगाता और दूध निकालता। दूध दुहने के बाद संजय दूध में खूब पानी मिलाता था और फिर दूध को कैन में भरकर भोलापुर जाने वाली रोड पर केन रखकर दूध बेचने के लिए खड़ा हो जाता। लेकिन कोई भी संजय का इंजेक्शन वाला पानी मिला वाला दूध नहीं खरीदता। लोगों को शंकर का पियोर दूध ही पसंद आता। तभी संजय मन ही मन कहता है लोग मेरा दूध नहीं खरीद रहे हैं लगता है मेरी गाय ही बेकार है। लोगों को मेरी गाय का दूध पसंद नहीं आ रहा, आज घर जाकर अपनी गायकी खूब पिटाई करूंगा। और रात में चुपके से शंकर की गाय चुरा लूंगा।

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फिर देखता हूं यह शंकर क्या करेगा। जब रात हो जाती है संजय शंकर के गौशाला में जाता है। पहले तो वह रस्सी से गाय का मुंह बांध देता है। ताकि वह आवाज ना करें, फिर वह गाय को लेकर अपने ससुराल भाग जाता है। सुबह जब शंकर उठता है तो वह देखता है कि गाय गायब है, शंकर को यह देखकर बहुत झटका लगता है। शंकर अपने घर के बाहर खड़ा होकर रोने लगता है, शंकर के पास गांव के लोगों की भीड़ लग जाती है। गांव के मुखिया भी वहां पहुंचते हैं। तभी मुखिया सभी लोगों से कहते हैं अरे क्या हुआ इतनी भीड़ क्यों लगा रखी है। तभी शंकर मुखिया से कहता है मुखिया जी मेरी गाय चोरी हो गई। अब मैं अपने परिवार का पेट कैसे पालूंगा, मेरे पास रोजी रोटी का और कोई साधन भी नहीं है। सभी मुखिया कहते हैं मैं अपने नौकरों को भेजकर आस-पास के गांव में तुम्हारी गाय को ढूंढने की कोशिश करता हूं। ऐसा कहकर मुखिया वहां से चले जाते हैं शंकर भी अपनी गाय ढूंढने जंगल की ओर जाता है। जंगल में गाय ढूंढते ढूंढते रात हो जाती है। लेकिन गाय नहीं मिलती। शंकर बहुत थक जाता है और वह एक पैर के नीचे बैठ जाता है। शंकर जिस पेड़ के नीचे बैठता है वह एक बहुत पुराना पीपल का पेड़ होता है। उस पर पर एक भूत रहा करता था ‌, भूत अचानक से शंकर के सामने आ जाता है। भूत को देखकर शंकर डर जाता है। और भुम से कहने लगता है मुझे मत मारना मैंने कुछ नहीं किया।

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 भूत शंकर से कहता है अरे डरो नहीं मैं किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता हूं। मैं एक अच्छा भूत हूं और अपने जादू से अच्छे लोगों की मदद करता हूं, और बुरे लोगों को सबक सिखाता हूं। तुम यहां जंगल में क्या कर रहे हो, शंकर भूत को सारी कहानी बताता है। तभी भूत शंकर से कहता है तुम एक ईमानदार इंसान हो मैं तुम्हें एक गाय देता हूं। भूत आपने जादुई शक्तियों से शंकर को एक गाय देता है। और कहता है यह गाय 50 लीटर दूध देगी, अभी तुम इस से काम चलाओ मैं तुम्हें तुम्हारी गाय ढूंढ कर दे दूंगा। शंकर गाय को लेकर अपना घर पहुंचता है और अपना दूध का काम फिर से शुरू कर देता है। इधर भूत अपनी जादुई शक्तियों से पता लगा लेता है कि संजय शंकर की गाय लेकर अपनी ससुराल भाग गया है। भूत एक रात संजय के कमरे में पहुंचता है, संजय अपनी पत्नी के साथ सो रहा था। वह तो अपने जादू से संजय की पत्नी को भैंस बना देता है। जब संजय सुबह सोकर उठता है तो चौक जाता है। संजय की खटिया हवा में तैर रही होती है।

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 संजय कहने लगता है अरे यह क्या हो गया मेरी पत्नी कहां चली गई। और यह भैंस मेरी बिस्तर पर कहां से आ गई, तभी भैंस कहती है अरे मैं तुम्हारी पत्नी हूं। संजय भैंस को लेकर अपने घर जाता है। उसका घर एक छोटा सा खिलौना बन चुका होता है। संजय मन ही मन कहने लगता है अरे यह क्या हो गया। हमारा घर इतना छोटा कैसे हो गया, तभी संजय गाय की तरफ जाता है तभी गाय संजय को लात मारती है और संजय दूर जाकर गिर जाता है। तभी गाय में से भूत बाहर निकलता है। तभी भूत संजय से कहता है तुमने शंकर की गाय चुराई इसलिए यह सब तुम्हारे साथ हो रहा है। तभी संजय भूत से कहता है,मुझे माफ कर दो, मुझे शंकर की गाय नहीं तो चुरानी चाहिए थी मुझे माफ कर दो। 

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तब भूत संजय को माफ कर देता है और संजय का घर ठीक कर देता है। भूत संजय की पत्नी को भी भैंस से इंसान बना देता है। फिर वह शंकर की गाय लेकर वहां से गायब हो जाता है और शंकर के पास पहुंचता है। तभी वह शंकर से कहता है यह लो तुम्हारे असली गाय, ऐसा कहकर भूत गायब हो जाता है शंकर के पास अब दो गायब हो जाती है शंकर दूध बेचने के साथ अपनी डेयरी भी खोल लेता है जहां वह दूध के साथ साथ दही पनीर मक्खन भी बेजने लगता है कुछ ही दिनों में शंकर बहुत अमीर हो जाता। वह अपने लिए एक बड़ा घर और बड़ी कार भी खरीद लेता है।

निष्‍कर्ष :-

इस पोस्‍ट में हमने एक खौफनाक हॉरर स्टोरी चुड़ैल के गोलगप्पे, बर्फ वाली चुडै़ल और जादुइ  भुत के बारे पढा जोकि बहुत ही डरावनी कहानी है आपको यह कहानी कैसी  कमेंट बाॅॅॅक्‍स मे कमेंट कर अवश्‍य बताएं।   

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