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Top no1 Short Stories In Hindi best interesting

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दोस्‍तों हमनें पिछले पोस्ट में हमने हाथी और तोता,लालची सौतेले बाप। जैसे कहानी को कवर किया था। आज के Short Stories In Hindi  में हम यह जानेंगे कि देहाती चूहा और शहरी चूहा की कहानी bedtime stories in hindi online एवं बालिका वधू hindi best kahani गर्भवती गाय, ईमानदार गाय और शेर की कहानी और धोखेबाज दोस्त यह सभी कहानी के बारे में जानेंगे जो कि बहुत ही ज्यादा इंटरेस्टिंग एवं बहुत कुछ सीखने को भी मिल सकता है।   

शहरी चूहा और देहाती चूहा।

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एक बार की बात है, एक छोटा सा चूहा था। जो एक शहर में रहता था, उसे एक अपने दोस्त की तस्वीर मिली जो कि देहात में रहता था, तभी चूहे ने सोचा कि उसके पास जाकर उस देहाती चूहे को चौंकाया जाए, तभी शहरी चूहा गांव के लिए निकल जाता है और वह अपने दोस्त का घर ढूंढते ढूंढते उसके पास पहुंच जाता है, तभी दोनों दोस्त मिलते हैं और देहाती चूहा कहता है,तुम कैसे हो मेरे दोस्त शहरी चूहा कहता है मैं ठीक हूं।

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शहरी चूहा, देहाती चूहा से मिलकर बहुत खुश होता है, और कहता है तुम्हारी बहुत याद आ रही थी मेरे दोस्त इसलिए सोचा मैं तुमसे मिल लूं। तभी देहाती चूहा कहता है, तुमने तो मुझे चौका दिया मेरे इस छोटे से गांव में तुम्हारा स्वागत है। देहाती चूहा शहरी चूहा से कहता है मुझे अच्छा लगा कि तुम मुझसे मिलने मेरे गांव आए। दोनों दोस्त कुछ देर तक बातें करते रहते हैं, तभी देहाती दोस्त अपने शहरी दोस्त से कहता है, तुम इतना लंबा सफर करके आए हो तुम थक चुके होगे। तुम हाथ मुंह धो कर आओ मैं तुम्हारे लिए कुछ खाना बनाता हूं, देहाती चूहा खेत की तरफ चल पड़ता है और शहरी चूहा को कहता है कि मैं तुम्हारे लिए सब्जी लेकर आता हूं, शहरी चूहा हाथ मुंह धोते धोते सारा पानी खत्म कर देता है, तभी हुआ चूहा मन ही मन कहता है यहां पर कितना सा पानी है मेरे शहर में तो बहुत सारा पानी है, शहरी चूहा घर से बाहर आया पूरी तरह से परेशान होकर। तभी देहाती चूहा शहरी चूहा से कहता है आ जाओ मेरे दोस्त सभी बैठकर खाना खाते हैं, देहाती चूहे ने शकरकंद, ताजे बीट और सरगम परोसे और ताजा दूध भी, देहाती चूहे ने शहरी चूहे को खाना खिलाना चालू किया तभी शहरी चूहा देहाती चूहा को कहा क्या तुम देहात में ऐसे खाना खाते हो, शहरी चूहा कहता है बेस्वाद खाना बिल्कुल स्वाद नहीं है इस खाने में, देहाती चूहे ने अपने दोस्त को खुश करने की बहुत कोशिश की पर वह सफल नहीं हुआ।

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खाने के बाद देहाती चूहे ने सोचा कि शहरी चूहे को खेत दिखाया जाए, तभी शहरी चूहा ने कहा वाह हवा कितनी ताजी है। तभी दोनों दोस्त घूमते घूमते एक कचरे के ढेर के बगल से गुजरते जा रहे होते हैं, तभी शहरी चूहा कहता है वह यहां कितनी गंदगी है मेरे शहर में बहुत सफाई है, शहरी चूहा देहाती चूहा से कहते हैं मुझे तुम्हारा रहना यहां पसंद नहीं आया मेरे दोस्त। शहरी चूहा देहाती चूहा को बुरा भला कहने लगता है, वह कहता है, तुम यहां कीड़े मकोड़े के साथ रहते हो अच्छा खाना नहीं खा पाते हो तुम मेरे शहर चलो मेरे दोस्त तुझे बहुत अच्छा लगेगा। तभी देहाती चूहा शहरी चूहे से कहता है इस गांव में सब कुछ अच्छा है मेरे दोस्त तुम अनुभव करके तो देखो।

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तभी शहरी चूहा देहाती चूहा कहता है मैं चाहता हूं तुम मेरे साथ मेरे शहर में कुछ दिनों के लिए आओ, ताकि मैं अपनी जिंदगी तुम्हें दिखा सकूं। तभी देहाती चूहा हंसते हुए कहता है,यह तो बहुत अच्छी की बात है। मैं जरूर आऊंगा तुम्हारे शहर शहरी चूहा हंसते हुए कहता है हम दोनों दोस्त बहुत मस्ती करेंगे, मेरे दोस्त तभी दोनों दोस्त घर लौटते हैं और शहरी चूहा सामान बांध कर जाने लगा। शहरी चूहा देहाती चूहा से कहता है, मेरे जाने का समय आ गया है मेरे दोस्त मैं अब चलता हूं। तभी शहरी चूहा देहाती चूहा से कहता है, कि प्लीज दोस्त तुम मेरे शहर जरूर आना जल्द ही मिलेंगे। अपना ख्याल रखना, कुछ दिनों बाद देहाती चूहा शहरी चूहे के पास शहर जाने की तैयारी करता है। तभी देहाती चूहा शहर के लिए रवाना होता है, जब वहां पहुंचता है तो मन ही मन सोचता है, यहां पर कितनी ऊंची ऊंची इमारतें हैं।

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देहाती चूहा मन ही मन बहुत कुछ सोचते हैं मन में ही कहता है, यहां पर कितनी चमचमाती गाड़ियां है।और मुझे यहां पर अच्छा खाने को मिलेगा, ढूंढते ढूंढते वह आखिर में शहरी चूहे के घर पहुंच जाता है। तभी शहरी चूहा कहता है स्वागत है मेरे दोस्त मेरे शहर में तेरा स्वागत है, शहरी चूहा देहाती चूहा को अपने घर के अंदर ले जाता है। दोनों ने थोड़ी देर कुछ बातें की, शहरी चूहे के घर में नौकर जब घर में खाना लगा रहे थे शहरी चूहे ने सुंग कर कहा चलो मेरे दोस्त खाना तैयार है खाने को चले, देहाती चूहा खाना खाने के लिए बहुत ही उत्सुक था। तभी शहरी चूहा देहाती चूहा से कहता है जो खाना है ले लो मेरे दोस्त यहां पास्ता फ्रूट्स मिल्क पोस्ट सब कुछ है, तभी देहाती चूहे शहरी चूहे से कहता है। शुक्रिया मेरे दोस्त मैं तुम्हारी जीवन शैली से बहुत ही ज्यादा प्रभावित हुआ हूं, तभी देहाती चूहे हंसते हुए शहरी चूहे से कहता है, मैं सोचता हूं तुम्हारे पास में यही रह जाऊं। जैसे देहाती चूहा खाने लगा तभी उधर से नौकर डंडे से देहाती चूहे को मारने के लिए आता है, शहरी चूहे को बहुत शर्मिंदगी हुई और वह दोनों वहां से भाग चलते हैं तभी शहरी चूहा देहाती चूहा से कहता है तुम टेंशन मत लो मेरे दोस्त जब वह वहां से जाएंगे। हम खा लेंगे तभी दोनों दोस्त बाहर घूमने की सूची शहरी चूहा देहाती चूहा से कहता है, चलो मैं तुम्हें एक जगह ले चलता हूं,जहां पर बहुत सारे तरह का खाना मिलता है।

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Stories In Hindi तभी शहरी चूहा देहाती चूहा को एक दुकान में ले जाता है, वह दोनों ने उस दुकान में एक बिल्ली को देखा। जो तेजी से उनकी तरफ भागी चली आती। तभी देहाती चूहे ने शहरी चूहे से कहा वह क्या था मेरे दोस्त मेरा दिल बहुत जोरो से धड़कने लगा। तभी शहरी चूहा देहाती चूहा से कहता है,वह एक बड़ी मोटी बिल्ली है,जो कि 1 मिनट में चली जाएगी। बस तुम चुप रहो, बिल्‍ली  की जाने के बाद देहाती चूहे ने एक अजीब सा चीज देखा उस स्टोर में शहरी चूहे से पूछता है, कि यह क्या है मेरे दोस्त तभी शहरी चूहा ने देहाती चूहे से कहा वह एक पिंजरा जिसमें चूहे को फसाया जाता है। तभी देहाती चूहा बहुत डर जाता है और अपने शहरी दोस्त को कहता है मैं अब यहां 1 मिनट भी नहीं रहना चाहता मेरे दोस्त मुझे अपने घर जाना है। मेरे घर में मेरे गांव में वहां कितनी शांति है, तभी शहरी चूहा शर्मिंदा में होकर देहाती चूहे से कहता है इस सब के लिए मुझे माफ कर दो मेरे दोस्त तभी देहाती चूहा शहरी चूहा से कहता है, कि मुझे मेरे यहां अपने बगीचे में ताजा फल खाने में बहुत सुकून है, मैं यहां आकर अपना टाइम वेस्ट कर दिया।

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तभी देहाती चूहा शहरी चूहे से कहता है एक बात बोलूं मैं तुम्हें मेरे दोस्त ऐसो आराम से तो अच्छा है, सीधे-साधे तरीके से जीवन यापन करें और सुकून की खाना खाए इसलिए तुम मेरे गांव चलो मेरे दोस्त। और वह देहाती चूहा अपने घर चला गया और वहॉं  अपनी जिंदगी आराम से जीने लगा।

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 एक गांव में अशोक लाल और उसके पूरे परिवार रहते थे, आज अशोक लाल बहुत ज्यादा खुश था क्योंकि उसके घर में शादी थी, वह खुश भी था और उदास भी क्योंकि उसकी दोनों बेटियों की डोली आज ही उठने वाली थी। और उदास इसलिए क्योंकि उसके जाने के बाद उसका आंगन सुना हो जाएगा, वह शादी के कामों में व्यस्त था लेकिन वह घर जाकर बार-बार अपनी बेटी को जाकर देखता, उसकी दोनों बेटियां दुल्हन की जोड़े में तैयार बैठी थी, अशोक लाल की आंखें अपनी दोनों बेटियों को देखकर भर जाती है। लेकिन वह अपनी आंसू किसी को नहीं दिखाता, और छिप छिपकर रो लेता। लेकिन थोड़ी देर पहले ही उसकी दोनों बेटियों ने अशोक लाल को रोते हुए देख लिया था, तभी उसकी दोनों बेटियां अशोक लाल के पास आई, और उसकी बेटी कहती है क्यों रो रहे हो बाबा हमारे जाने से दुख होगा आपको क्यों भेज रहे हैं हमें बाबा अभी हमें मत भेजो ना अभी तो हम बहुत छोटे हैं अपनी बेटियों की बात सुनकर अशोक लाल अपने बेटियों को गले से लगा देता है हमीरपुर में रहने वाला अशोक लाल कबाड़ी का काम किया करता था।

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अशोक लाल के अलावा उसके घर में उसकी पत्नी रत्ना के अलावा और उसके दो बेटी रहती थी, सीमा और गुड़िया थी, सीमा की उम्र 9 साल और गुड़िया 11 साल की थी, दोनों सरकारी स्कूल में पढ़ते थे। अभी कुछ दिनों पहले रत्ना की तबीयत बहुत खराब हो गई थी। अशोक लाल को उसके इलाज के लिए ₹200000 उधार लेने पर थे, जिसका ब्याज अशोक लाल को हर महीने चुकाना पड़ता था अशोक लाल की परिवार की गाड़ी किसी तरह चल रही थी‌। अशोक लाल काम करने चला जाता है तभी एक औरत घर से बाहर निकल कर कहती है, एक कबाड़ी वाले न्यूज़पेपर कैसे ले रहे हो, तभी अशोक लाल कहता है ₹7 किलो तभी वह औरत अशोक लाल को कहती है। ₹7 किलो अभी कुछ दिनों पहले तो मैंने ₹9 बेचा था। तभी अशोक लाल कहता है। नहीं नहीं 1 साल से यही रेट है, अशोक लाल पूरा दिन काम करता और जितना होता वह बड़े व्यापारी को दे आता। उस दिन भी वह बड़े व्यापारी को देककर घर आ रहा था उसने घर में देखा उसकी बड़ी बहन और उसके जीजा जी घर आए हुए हैं अशोक लाल ने अपनी बड़ी बहन को पैर छूकर प्रणाम किया।

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तभी अशोक लाल अपनी बड़ी बहन से कहता है अरे आपका भाई ना फोन ना आने की कुछ खबर सब ठीक तो है अशोक लाल की बहन उससे पहले कुछ कहती लेकिन उससे पहले उसकी पत्नी रत्ना ने कहा दीदी रिश्ता लेकर आई है, तभी अशोक लाल कहता है रिश्ता अरे मैं समझा नहीं तभी अशोक लाल की बड़ी बहन कहती है अरे भाई मैं समझाती हूं मुझे अपनी सीमा और गुड़िया के लिए दो दो लड़के लायक मिले हैं तभी अशोक लाल अचंभित होते हुए अपनी बड़ी बहन से कहता है यह आप कैसी बात कर रही हो अभी तो वह दोनों बहुत छोटी है। तभी उसकी बहन गुस्सा के कहती है तो क्या उसके बड़े होने का इंतजार करोगे जब भाभी की शादी हुई थी तो वह भी तो एक 11 साल की और मेरी शादी तो 10 साल मैं हुई थी हमारी बिरादरी में शादी कम उम्र में ही होती है, तभी अशोक लाल अपनी बहन से कहता है,अरे हमारा जमाना कुछ अलग था। अब दुनिया बदल गई है। तभी उसकी बहन अशोक लाल से कहती है, तो तुम क्या चाहते हो इन दोनों को घर बिठाकर रखना है। और कल को कोई लड़का ढंग का नहीं मिला तो। अपनी बहन की बात सुनकर अशोक लाल सिर पर हाथ रखकर बैठ गया उसे समझ नहीं आ रहा था। कि वह क्या करें तभी उसकी बहन कहती है, देखो भाई आप की कमाई कितनी है, वह किसी से छिपी नहीं और महंगाई का तो आपको पता ही है, कल को इनकी शादी के लिए पैसे कहां से लाओगे अभी माथे पर खुद इतना सारा कर्ज है।

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अपनी बहन के तर्कों के आगे अशोक लाल ने अपने घुटने टेक दिए। अपनी दोनों बेटियों की शादी के लिए तैयार हो गया, कुछ दिन बाद दोनों लड़के अशोक लाल की बेटियों को देखने आते हैं। अशोक लाल और उसकी पत्नी रत्ना ने जब लड़के को देखा तो वह दोनों चौक दें क्योंकि उसकी उम्र 40 से पार थी और उसकी पहले से एक शादी हो चुकी थी, लेकिन दुर्भाग्य से उनकी पत्नियां नहीं रही। उन दोनों के जाने के बाद अशोक लाल ने अपनी बहन को इस बारे में पूछा। तभी उसकी बहन भरत की हुई कहती है इसी को तो कहते हैं भलाई का जमाना ही नहीं, मैंने दो दो लड़के ला कर दिए जिन्‍हे शादी में एक पैसा दहेज भी नहीं चाहिए। और तुम उम्र लेकर बैठ गए, अरे उम्र का क्या अचार डालना है। वैसे भी लड़कों की उम्र नहीं देखी जाती, अशोक लाल और रत्ना मजबूर थे। एक तो पैसों की मजबूरी उनके सारथी और दूसरा बिरादरी का दबाव भी था उन पर अशोक लाल शादी के लिए तैयार हो गया। 5 दिन बाद शादी की तारीख तय हुई, इधर इन दोनों छोटी बच्चों को शादी का मतलब भी नहीं पता था, एक दिन जब वह दोनों स्कूल जा रही थी तब वह दोनों ने एक सवाल अपनी मां से पूछा मां जब हमारी शादी हो जाएगी तो क्या हम स्कूल जाएंगे, उनकी बातों का रत्ना क्या जवाब देती वह चुप रही स्कूल में सीमा और गुड़िया ने अपनी सहेली को अपनी शादी की बात बताई बच्चों में यह बात होती होती सुनीता मैडम के पास पहुंची बस सुनीता मैडम ने सीमा और गुड़िया को अपने पास बुलाया, सीमा और गुड़िया ने अपनी शादी की पूरी बात सुनीता मैडम को बताई सुनीता मैडम आश्चर्यचकित हो गए और सुनीता मैडम ने मन ही मन सोचा यह तो सरासर बाल विवाह का बात चल रहा है, मुझे इन दोनों बच्चों की मदद करनी होगी। सुनीता मैडम उसी दिन अशोक लाल की घर जा पहुंचती है और अशोक लाल को समझाने की कोशिश करती है, अशोक लाल की बहन भी उस समय वहां आई हुई थी। सुनीता मैडम ने जैसे ही अशोक लाल को यह शादी रोकने की बात की तो अशोक लाल की बहन चीर गई। तभी अशोक लाल की बहन सुनीता मैडम से कहती है माफ करिएगा टीचर जी लेकिन यह हमारा घरेलू मामला है, और आप इन से दूर रहे तो अच्छा रहेगा।

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तभी सुनीता मैडम अशोक लाल की बहन से कहती है मैं मानती हूं कि वह दोनों आप की भांजी है लेकिन यह आपका घरेलू मामला तो बिल्कुल नहीं है। यह सामाजिक मामला है, दोनों बच्चियां मेरे स्कूल की छात्रा है और मेरा फर्ज बनता है। मैं बच्‍चों के साथ कुछ भी गलत होने ना दूं, तभी सुनीता की बड़ी बहन भड़क जाती है और कहती है यह कैसी बात कर रही हैं आप भले शादी में क्या गलत है। तभी सुनीता मैडम अशोक लाल की बड़ी बहन से कहती है शादी में गलत नहीं है लेकिन कम उम्र में शादी करने में गलती है यह गैरकानूनी है सुनीता ने अपने बात उन्हें समझाएं लेकिन लेकिन अशोक लाल की बहन को उनकी कोई बात समझ नहीं नहीं आई उल्टा उसने सुनीता मैडम को बेइज्जत करके घर से निकाल दिया दुर्भाग्य की बात यह है इस बार अशोक लाल चुं तक नहीं किया इधर सुनीता मैडम ने भी हार नहीं मानी उन बच्चों की शादी वाले दिन थाने पहुंची और इस बाल विवाह के खिलाफ रिपोर्ट लिखवा दी इंस्पेक्टर इंद्रा ने जैसे बाल विवाह की बात सुनी वह चौक गई रवि सुनीता मैडम इंस्पेक्टर इंदिरा से कहती है मैडम मैं आपके पास बहुत उम्मीद लेकर पहुंची हूं। उन बच्चों का जीवन बचा लीजिए नहीं तो मैं अपने आप को कभी माफ नहीं कर पाऊंगी तभी इंस्पेक्टर इंदिरा ने सुनीता मैडम से कहा आप बिल्कुल फिक्र ना करें मेरे रहते उन बच्चियों का जीवन खराब नहीं होगा अशोक लाल को बरात आने की सूचना मिल गई थी सही वक्त पर बारात आ गई उधर सुनीता इंस्पेक्टर इंदिरा के साथ अशोक लाल के घर के लिए निकल पड़े लेकिन बीच रास्ते में ही उनकी जीप का टायर पंचर हो गया तभी इंस्पेक्टर इंदिरा ने गुस्से में आकर बोली इस टायर को भी अभी पंचर होना था।

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तभी सुनीता मैडम इंस्पेक्टर इंदिरा से कहती है अब हम क्या करेंगे मैं कहीं वहां पहुंचने में हमें देर ना हो जाए सब इंस्पेक्टर इंदिरा ने अपने हवलदार को कहा कि वह जीप का बंदोबस्त करें तब तक इंस्पेक्टर इंदिरा और सुनीता मैडम पैदल ही चल परी उधर मंडप पर दोनों लड़कियां आ गई थी पंडित जी मंत्र पढ़ रहे थे वह दोनों बिचारी बच्चियां और साहसी होकर मंडप में बैठी हुई थी तभी वहां पर इंस्पेक्टर इंदिरा और सुनीता मैडम पहुंच गए।

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तभी इंस्पेक्टर इंदिरा पंडित जी को कहती है बंद करो तुरंत बंद करो यह शादी नहीं हो सकती यह गैरकानूनी है इंस्पेक्टर को देख वहां सभी के चेहरे हवाइयां उड़ने लगी दोनों लड़के फरार होने की फिराक में रहते हैं लेकिन इंस्पेक्टर इंदिरा ने उन्हें पकड़ लिया। तभी इंस्पेक्टर इंदिरा दोनों लड़कों से कहती है शर्म नहीं आती तुम दोनों को अपनी उम्र देखो और इन बच्चियों की उम्र देखो कहां है कहां है इनके माता-पिता मैं सब को जेल भेज दूंगी। अशोक लाल इंस्पेक्टर इंदिरा के पास आते हैं आप लोग इनके माता-पिता हैं या इनके दुश्मन हैं आपको अपने बच्चों की जड़ा भी फिक्र नहीं है। अरे शादी की उम्र होती है सरकार ने उम्र दे भी कर रखी है लेकिन आप लोग मनमानी कर रहे हैं, तभी अशोक लाल की पत्नी रत्ना इंस्पेक्टर इंदिरा से कहती है। लेकिन मैडम हमारी बिरादरी में तो कच्ची उम्र में ही शादी होती है। तभी इंस्पेक्टर इंदिरा कहती है, रत्ना से अरे कच्ची के बर्तन में आप खाना खाना बनाती है, क्या उनका इस्तेमाल करती है, जब बर्तन कच्चे इस्तेमाल नहीं करती तो फिर कच्ची उम्र में शादी कैसे कर रही हैं। और किस बिरादरी की बात कर रही हैं।अगर कोई बिरादरी बाल विवाह का समर्थन करता है, तो यह अपराध है और अपराधियों को जेल जाना पड़ता है, अशोक लाल अपनी गलती का एहसास करता है,अशोक लाल की बहन भी शर्मिंदा हो जाती है उन दोनों को 1 महीने का दिन होती है, फिर उन्हें जमानत पर इस शर्त पर छोड़ा जाता है कि दोबारा ऐसा कोई काम ना करें।

गर्भवती गाय

stories in hindi यह एक छोटे से गांव में राम और सीता नाम के पति पत्नी रहते थे, उनके दो बच्चे भी थे। उन दोनों बच्चे का नाम रमेश और सुरेश था, रामू हर रोज खेती करने के लिए निकलता था। रामू अपने दोनों बच्चों को पढ़ाकर एक अच्छी सी काम ढूंढने के लिए बोलते थे, इसीलिए राम और सीता खेत में बहुत काम करते थे, लेकिन उन दोनों की तबीयत बिगड़ती जाती गयी। वह दोनों कुछ भी काम नहीं कर पाते थे, एक दिन जब रमेश और सुरेश स्कूल से वापस आने लगे तभी उनको एक लंगडी गाय दिखाई दी उसके शरीर पर कुछ घाव भी थे। वह गाय दर्द से तड़प रही थी, उस गाय को रमेश और सुरेश घर लेकर आए तभी रामू ने पूछा अरे यह क्या है। सुरेश यह आपने गाय को क्यों उठाकर लेकर आए तभी रमेश कहता है पापा ये गाय लंगरी है।

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हमें लगता है, कि यह गाय गर्भवती भी है तभी रामू कहता है।अरे हां तुम ठीक कह रहे हो यह गाय गर्भवती भी है और बहुत बुरी तरह घायल भी है, उस दिन से राम और सीता उस गाय की देखभाल करने लगे उसको एक नाम भी रखा लक्ष्मी गर्भवती होने के कारण रामू ने उसको बहुत अच्छा घास और खाना देने लगा कुछ ही दिन में लक्ष्मी अच्छी हो गई। और उसने एक छोटे बछड़े को जन्म दिया वह देखने में बहुत सुंदर थी, यह बात गांव में फैल गया तभी लक्ष्मी का असली मालिक जो उसे हर दिन मारता पीटता था, उसको यह बात पता चल गई तभी उसने रामू के पास आया और ऐसा बोला अरे यह गाय मेरी है। अभी मिलेगा मुझे दे दो, अगर चाहिए तो उसके बछड़े को तुम रख लो तभी सीता ने बोली आप ऐसा कैसे कह सकते हैं, हमने लक्ष्मी को घायल से अच्छा बनाया। रामू सीता और उनके बेटों के बाद सुनकर लक्ष्मी का असली मालिक वहां से चला गया लेकिन उसी रात जब सभी सो रहे थे,मालिक आकर लक्ष्मी को जो रस्सी से बंधी हुई थी।और सो रही थी उस रस्सी को निकाल कर लेकर जाने लगा। तभी लक्ष्मी ने जोर जोर से चिल्लाने लगी लक्ष्मी की चीखने की आवाज सुनकर रामू घर से बाहर आया, उसके पीछे से सीता और उसके दोनों बेटे आए सबको देखकर मालिक लक्ष्मी को छोड़ भागने लगा।

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लेकिन सभी मिलकर लक्ष्मी की असली मालिक को पकड़ लिया। और बहुत बुरी तरह से पीटा और उसको चोरी करने के लिए पुलिस के हवाले भी कर दिया तब से रामू सीता और लक्ष्मी खुशी खुशी रहने लगे।

ईमानदार गाय और शेर की कहानी

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पूर्णागिरि नाम के एक गांव में राम सिंह करके एक किसान रहता था। उसके पास बहुत सारे गाय भी थे, लेकिन उनमें से एक गाय थी। जिसका नाम सीता थी सीता एक बहुत ही सुशील और ईमानदार गाय थी, वह दिखने में भी सोने का रंग बहुत सुंदर थी उसकी एक बछड़ा भी थी‌। जो बहुत छोटी थी 1 दिन राम सिंह अपने गाय को लेकर चड़ाने के लिए जंगल चला जाता है, लेकिन थोड़ी देर में सीता झुंड से अलग हो जाती है। तभी सीता मन ही मन कहती है, हे भगवान मैं किधर पहुंच गई, अब मैं क्या करूं जंगल के तरफ जा ही रही होती है। तभी वहां एक भूखा शेर देख लेता है और उसका पीछा कर करके उसके सामने कूद जाता है, तभी शेर कहता है, रुको वाह वाह कितना तंदुरुस्त गाय है तो तुम्हें खा लूंगा तो एक हफ्ते तक मुझे भूख भी नहीं लगेगी।

moral stories in hindi for kids
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तभी सीता डरते डरते शेर को देखकर वही खड़ी हो जाती है। और काफी रोती  है सीता शेर से कहती है, महाराज रुकिए एक बार मेरी बात तो सुनिए मेरी एक विनती सुनिए मुझे पता है, कि आज मैं आपके हाथों में मरने वाली हूं।लेकिन उससे पहले मेरी एक विनती है एक आखिरी इच्छा सुनिए, तभी शेर कहता है मुझे कुछ नहीं सुनना है, मैं बहुत भूखा हूं और मेरी भूख मिटाने के लिए तुम्हें मैं खा जाऊंगा।तभी सीता कहती है महाराज मैं आपकी भूख मिटा दूंगी, लेकिन पहले मेरी बात तो सुनिए मेरी आखिरी ख्वाहिश तो सुनिए उसके बाद आप जो चाहे मैं करने के लिए तैयार हूं, तभी शेर कहता है ठीक है बोलो क्या है। तभी सीता कहती है, शेर महाराज मेरी एक छोटा बेटा है वह अभी नादान है वह मेरी इंतजार कर रहा होगा मैं एक आखरी बार जाकर उसको पेट भर कर दूध पिला दूं। खाना खिला कर उसकी देखभाल किसी और गाय को सौंप कर आ जाऊंगी, बस तभी शेर हंसने लगता है और कहता है। क्या तुम मुझे पागल समझती हो एक बार तुम इधर से गई, तो वापस क्यों आएगी मुझे उल्लू मत बनाओ।

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मैं इस जंगल का राजा हूं बेवकूफ नहीं। तभी सीता कहती है, अरे नहीं महाराज मेरी बात तो सुनिए मैं वादा करती हूं, कि मैं अपने बेटे को एक आखरी बार खाना खिला कर आ जाऊंगी। आपको भी तो बेटे बच्चे होंगे मेरी बात मानीए, तभी शेर कहता है ठीक है जल्दी आना तभी सीता अपने बेटे के पास जाती है, बछड़ा सीता को देखकर बहुत खुश हो जाता है।जल्दी उसके पास जाकर दूध पीने लगता है,तभी सीता ने पानी भरी आंखों से ऐसे बोली बेटा तुम्हें हर वक्त इमानदारी के साथ रहना होगा। सभी का आदर करना होगा दोस्तों के साथ अच्छी तरह खेलना और सबको प्यार भी करना मुझे मालूम नहीं कि मैं फिर वापस आऊंगी की भी नहीं ऐसा बोलकर सीता जंगल की तरफ चली जाती है, लेकिन शेर को यकीन नहीं था। कि सीता वापस आ जाएगी शेर सीता की राह देखने लगता है, इतने में सीता वहां पर आती है,शेर सीता को देख कर चौक जाता है।

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सीता की इमानदारी को देखकर शेर सीता से कहता है।अरे सीता मुझे यकीन नहीं था, कि तुम आओगी तुम्हारी जान से भी ज्यादा तुम अपने वादा को निभाया है।इतना सच्चा दिलवाले मैंने कभी नहीं देखा। इसीलिए मैं तुम्हें बक्श देता हूं, जाओ जाकर तुम्हारे बचने के साथ खुशी से रहना सीता दौड़ कर वापस आ जाती है। बछड़े अपनी मां को देखकर बहुत खुश हो, जाता है और खूब मस्ती किया।

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अमरापुर गांव में मधु और गोपाल नाम के दो मित्र रहते थे, मधु बहुत ही कमजोर और आलसी था, और गोपाल बहुत ही परिश्रमी था। वह अपना काम पूरी लगन से करता था वह दोनों ही गांव के जमींदार मोहन चौधरी के जमीन पर काम करते थे, गोपाल काम करता था और मधु अपने बैल को पेड़ के नीचे बांधकर गमछा बिछा कर सो जाता था, और जैसे ही सूर्य अस्त हो जाता था मधु अपने बदन पर मिट्टी लगाकर और बैल को भी मिट्टी लगा कर ले जाता था। वह जमींदार बाबू को दिखाता था, कि उसने बहुत काम की और गोपाल खेतों का काम खत्म होने के बाद अपने बैल को अच्छे से नहला कर खुद भी स्नान करके साफ सुथरा हो कर घर वापस जाता था। जमींदार बाबू मधु कि झूठ को पकड़ नहीं पाते थे, वह सोचते थे मधु बहुत ही परिश्रमी है। और गोपाल बहुत ही कमजोर है, इसलिए जमींदार बाबू ने रसोइयों से कहा मधु बहुत ही परिश्रमी है उसकी अच्छी देखभाल करना।और ध्यान रखना उसके खाने में कोई कमी नहीं होनी चाहिए।

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रसोईया मधु को भरपेट खाना देता था और गोपाल का पेट नहीं भरता था, गोपाल ने मन ही मन सोचा यह कैसा न्याय है जो काम करता है। उसे ही भूखा रखा जाता है और जो कमजोर है वह भरपेट खाता है, यह कैसा इंसाफ हुआ मधु समझ गया कि गोपाल को संदेह हो रहा है, और वह डर गया कि अगर गोपाल ने असली सच बता दिया तो इसीलिए उसी रात को मधु ने गोपाल से कहा सुनो गोपाल खेत की कोई बात जमींदार बाबू से मत कहना अगर कहा तो अच्छा नहीं होगा। कह देता हूं तभी गोपाल डरते हुए कहता है, अच्छा ठीक है मैं कुछ भी नहीं कहूंगा। पर याद रखना सच को कभी दबाया नहीं जाता समझे, तभी मधु गोपाल से कहता है जा तू अपना काम कर यह कहकर गोपाल सो जाता है पूरे दिन की थकावट के कारण गोपाल गहरी नींद में सो जाता है, और मधु पूरे दिन सोने के कारण पूरी रात सो नहीं पाता है, दूसरे दिन मधु की आंख लाल देखकर जमींदार बाबू ने पूछा क्या बात है मधु रात को नींद नहीं आई क्या तभी मधु जमींदार बाबू से कहता है क्या बोलूं हुजूर बहुत मच्छर है उन्होंने मुझे सोने ही नहीं दिया मधु की खातिरदारी और बढ़ गई अब वह जमींदार के घर में रहने लगा मधु बहुत खुश हुआ और उसका जीवन ऐसे ही चलने लगा खेतों में जाकर बैल को रस्सी बांधकर सो जाता था और गोपाल इमानदारी से अपना काम करता जाता था बिना फल की चिंता किए एक दिन हुआ यह कि खाते वक्त मधु खाना बर्बाद कर रहा है रसोया ने मधु से कहा मैं कुछ दिनों से देख रहा हूं कि तुम खाना बर्बाद करते हो जितना चाहिए उतना उतना ही लो ना मधु ने कोई उत्तर नहीं दिया।

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उधर रसोईया गोपाल को देखकर यह सोचने लगा मधु खाना बर्बाद कर रहा है और गोपाल की पेटी नहीं भर रहा है कहीं कुछ तो गड़बड़ है, रसोईया जमींदार की पत्नी पास गया और उनसे प्रणाम करके कहा मैं कह रहा था कि कहीं कुछ तो गड़बड़ है जमींदार की पत्नी को मधु और गोपाल के खाने के बारे में सब बात बताया उसी दिन रात को जमींदार की पत्नी ने जमींदार से कहा अच्छा सुनिए तो सही मधु और गोपाल खेतों में क्या करते हैं वह आपको एक बार देखना चाहिए क्या काम करते हैं कैसे करते हैं आपको नजर तो रखनी चाहिए। तभी जमींदार बाबू ने कारण जानना चाहा तभी जमींदार की पत्नी ने संध्या का कारण बताया, सुनकर जमींदार बाबू ने सोचा बात तो सही है एक बार अपनी आंखों से देखना उचित होगा यह सोच कर दूसरे दिन जमींदार बिना किसी से कुछ कहे चुपचाप खेतों की तरफ चल पड़े दूर से खड़े होकर उन्होंने देखा कि गोपाल बहुत मन से काम कर रहा है जैसे वह अपने लिए कर रहा हूं और वह फिर मधु को ढूंढने गया पूरे खेतों में मधु कहीं भी नजर नहीं आया तभी जमींदार समझ गए कि मधु जरूर काम चोरी कर रहा है। तभी जमींदार को मधु पर नजर पड़ती है, वह देखते हैं कि मधु सोया है सभी जमींदार को बहुत जोरों से गुस्सा आता है।

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किसी को बिना कुछ कहे वह अपने घर लौट आए वह अपनी पत्नी से कहा मुझे गोपाल के बारे में बहुत बुरा लग रहा है, मैंने उसके साथ बहुत अन्याय किया है गोपाल इतना परिश्रम करते हुए भी कुछ नहीं कह रहा लेकिन मधु सब आराम करते हुए भी उसे सब चीज का सुख हो रहा है। तभी जमींदार की पत्नी जमींदार से कहती है, आप गोपाल को कोई दूसरा काम दे दीजिए तब अपनी बेटी का शादी गोपाल से करवा दूंगी तब बेटी भी आंखों के सामने रहेगी और गोपाल भी मेहनती है। उसे अच्छी तरह रखेगा,जमींदार को यह बात बहुत अच्छी लगी तभी जमींदार बाबू ने सूर्य अस्त होने का इंतजार किया उसके बाद जब वह दोनों लौट कर आ रहे थे, तो जमींदार बाबू ने दोनों को बुलाया और कहते हैं मधु तुम मेरे कमरे में आओ तुमसे कुछ बात करनी है, मुझे तभी मधु कहता है हुजूर शरीर में मिट्टी लगी है,साफ करके आता हूं, पूरे दिन मिट्टी पसीना पहले ने साफ तो कर लूं तभी जमींदार मधु से कहता है, नहीं नहीं इसी वक्त तुम मेरे कमरे में आओ यह कहकर चले जाता है,मधु को कुछ भी समझ नहीं आता है कि अचानक यह क्या हुआ मधु धीरे-धीरे जमींदार के घर में चला जाता है। मधु को देख कर कहा आ गए।

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अभी तुम्हारा एक काम बाकी है, तुम गोपाल के पूरे शरीर में अच्छे से हल्दी तेल लगाकर उसे गर्म पानी से स्नान करवाकर साफ कपड़े पहना कर इस कमरे में लेकर आओ ठीक है। तभी मधु कहता है हुजूर यह कैसा न्याय है, मैं पूरे दिन इतनी मेहनत करने के बाद उस आलसी गोपाल के शरीर में तेल और हल्दी लगाऊँ, तभी जमींदार कहते हैं। इतने दिनों से तुमने मुझे बेवकूफ बनाया है आज मैंने अपनी आंखों से देखा है तुम्हारे परिश्रम का नमूना तुम आलसी हो कमजोर हो, झूठे हो तुम इसी समय इस घर से निकल जाओ तुम्हें अब मैं काम पर नहीं रख सकता हूं। यह बात सुनकर गोपाल जमींदार के पैर पकड़ लिए हुजूर हम दोनों आपके काम के लिए ही आए थे, आप दया करके मधु को एक और मौका दे दीजिए मुझे विश्वास है मधु अपने गलती का पश्चाताप जरूर करेगा तभी जमींदार बाबू कहते हैं।ठीक है मैं मधु को एक और मौका देता हूं और कहते हैं,तुम अपने आप को सुधार लो मधु तुम्हें साबित करना पड़ेगा कि तुम आलसी नहीं हो, इसके बाद गोपाल जमींदार का हिसाब किताब का काम देखने लगा और मधु ने अपने आप को बदल कर बहुत परिश्रमी हो गया।

Conclusion

तो दोस्तों आज के इस Stories In Hindi पोस्ट में हमने देहाती चूहा और शहरी चूहा की कहानी एवं बालिका वधू की कहानी एवं गर्भवती गाय की कहानी से जुड़े सारी कहानियों को कवर किया है उम्मीद करता हूं, कि Stories In Hindi आप लोगों को बहुत ही ज्यादा अच्छी एवं समझने एवं समझाने लाइक हुई होगी। इसी तरह की और भी Stories In Hindi पढ़ने के लिए जुड़े रहे हैं हमारे वेबसाइट के साथ और और कुछ भी ऐसी तरह की कहानी जानना हो तो उसके बारे में कमेंट करें ताकि मैं अगले पोस्ट में उसे कवर करने की कोशिश करू।

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