Top No 1 Short Stories with Moral for Kids best Stories

Top No 1 Short Stories with Moral for Kids

आज के इस पोस्ट में कहानी बहुत ही ज्यादा रोचक एवं समझने और समझाने लायक और कुछ हंसी मजाक टाइप का कहानी इस पोस्ट में दिया जाएगा आप लोग इस पोस्ट को अच्छे से पढ़ कर इंजॉय करें।

Short story in Hindi

आज के इस Short Stories with Moral for Kids स्टोरी में चींटी और कबूतर हाथी और तोता जादू बांस का घर बेटा बेटी में भेदभाव गरीब मां और अमीर मां लालची सौतेले बाप जैसे कहानी को कवर करेंगे जो कि बहुत ही ज्यादा अच्छी और रोचक होगी, तो आप पोस्ट को पढ़ते रहें और आप अपने मन को बहलातें रहें।

hindi story for kids

सबसे पहले हम चींटी और कबूतर के बारे में बात करेंगे,एक पेड़ पर एक चींटी और एक कबूतर रहते थे दोनों जहां रहते थे उस पेड़ केन बगल में एक तालाब था कबूतर और चींटी दोनों में रहते-रहते हैं बहुत ही अच्छी गहरी दोस्ती हो गई थी। एक दिन चींटी पेड़ पर चढ़ते समय अचानक से वह नीचे गिर पड़े चींटी को तड़पता देख कबूतर ने उसकी जान बचाने की सोची फिर कबूतर ने उस पेड़ की एक पत्ती को तोड़कर नीचे तलाब में गिरा दिया जहां पर वह चींटी जान बचाने के लिए तड़प रही थी।फिर पत्‍ती के गिरने के बाद चींटी उस पर किसी तरह चढ जाती है।और वह किसी तरह से तालाब से बाहर निकल आती है। उसी समय चिंटी कबूतर को धन्यवाद करती है।

hindi kahaniya for kids
hindi kahaniya for kids

फिर एक दिन उस पेड़ के आसपास कबूतर को पकड़ने के लिए एक शिकारी अपना जाल बिछा कर कबूतर का इंतजार कर रहा था चींटी की नजर उस पर किसी तरह पड़ गई थी। चींटी भी उस कबूतर की मदद करनी चाहती थी। फिर ऊपर देखा तो कबूतर धीरे-धीरे उस जाल की ओर बढ़ रहा था, जो कि शिकारी के द्वारा बिछाया गया था कबूतर की जान बचाने के लिए चींटी ने शिकारी को ही बहुत ही जोर से काट लिया था जिसके बाद शिकारी के मुंह से बहुत ही जोर से आवाज आ गई थी, जिसके कारण कबूतर चौकन्ना हो गया और वह सब कुछ समझ चुका था। उसके बाद कबूतर वहां से उड़ जाता है साथ ही चींटी भी वहां से चली जाती है।

story in hindi
story in hindi

इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है, कि

कर भला तो हो भला अगर आप किसी की मदद करते हैं तो कभी ना कभी वह भी आपको किसी भी रूप में मदद जरूर करने आएगा।

हाथी और तोता

Story for kids in Hindi

एक तोता (मादा) बहुत लंबे समय से पिंजरे में रहकर बहुत तंग आ चुकी थी वह आकाश में उड़ना चाहती थी।बहुत प्रयत्न करके तोता पिंजरे से जंगल में आ पहुंची।तोते को जंगल का वातावरण बहुत पसंद आया।हर रोज तरह-तरह के मीठे फल खाती थी पगली जैसी चलती फिरती जंगल के चारों ओर घूमती थी। अपना जीवन खुशी खुशी बिताने लगी। एक दिन तोते को एक बड़ा पेड़ के नीचे सोता हुआ एक हाथी दिखाई पड़ी उसे ऐसे देखते हैं तोते को एक नटखट उपाय आया चाहे जो कुछ भी हो वह हाथी को परेशान करके उसे नींद से जगाना चाही  बहुत तेजी से पेड़ के ऊपर से नीचे आई अपनों चोंच से हाथी की सूंड पर चोंच मारी हाथी जाग गया आंखें खोलकर देखा तो वह पेड़ के ऊपर जा कर हंसने लगी थी ।

short stories for children
short stories for children

हाथी नाराज होकर कहा अरे तोता क्या परेशानी है, तो तोता ने जवाब दीया मजाक है, मेरे दोस्त तोता हंसने लगी हाथी को कुछ फर्क नहीं पड़ा आंखें बंद करके फिर से सो गया।कुछ कुछ देर के बाद फिर से में हाथी के पास आकर दोबारा उसको परेशान की और तुरंत वहां से उड़कर पेड़ के ऊपर चली गई हाथी ने गुस्से से चिल्‍लाया और बोला तू फिर से आ गई क्या कुछ काम नहीं है। तोते को इस बार फिर बहुत मजाक लगा बार-बार ऐसी शरारती करके हाथी को परेशान करने लगी हाथी तंग आ चुका था। लेकिन हाथी कुछ करना नहीं चाहा वहां से उठ कर चला गया और तोते को मजा आ गया फिर से एक और बार तेजी से जाकर हाथी को अपने चोंच मारने लगी हाथी क्रोधित हो गया कुछ ना कुछ तो करके उस तोते को सबक सिखाने का निर्णय लिया।

little red riding hood short story
little red riding hood short story

Moral stories for childrens in Hindi

हाथी एक तालाब के पास गया और अपने सिर को छोड़ बाकी का पूरा शरीर पानी में डूबा दीया। ऐसा देख तोते को बहुत मजा आया वह सोचने लगा अरे देखो मेरे से डर के हाथी पानी में जाकर छिप गया। खूब हंसने लगी फिर से तोता वहां जाकर हाथी के ऊपर बैठ गई,हाथी को अपना चोंच चुभाना चाहि हाथी को पता था, कि तोता आएगी इसलिए उसने पहले से ही अपने सुर में पानी भरकर रखें थे। जैसे ही तो था अपना चोंच हाथी को चुभाना चाही हाथी ने अपने भरे हुए सुर में पानी को लेकर तोते के ऊपर बहुत जोर से पानी से झटका दिया। फिर तोता पानी के झटके से नीचे तालाब में गिर गयी। तोता जान के लिए तड़प रही थीं, हाथी को तोते पर दाया आ गई ,उसको पानी से बाहर निकाल कर जमीन पर फेंक दिया तोते ने हाथी से क्षमा मांगी। उसको बहुत अच्छा सबक मिला। हाथी जोर से हंस कर वहां से चला गया अब तोते को बड़े और छोटे का अंतर पता चल गया।

Hindi short stories

शिक्षा :- मजाक करने का भी एक हद होती है उसे जानकर व्यवहार करनी हैं। दूसरों के द्वारा तुम आदर चाहते हो तो पहले दूसरों का आदर करो ।

जादू बांस का घर

Short story in Hindi with muhavare

मिर्जापुर गांव में माया देवी अपने दो छोटे बच्चो के साथ रहती थीं,बारिश के मौसम में एक दिन रात को बाढ़ आ जाती है, और पूरा गांव पानी में डूब गया। गांव के लोग वहां से जान बचाकर के भागे माया देवी भी अपने छोटे बच्चे के साथ पड़ोस के सिकंदराबाद पहुंची, माया देवी को देखकर सिकंदराबाद का सरपंच आया, और बोला ऐ बुढ़िया हमारे गांव में क्यों आई है। माया देवी बोली सरपंच जी आप तो जानते हैं कि हमारे गांव मिर्जापुर मे बाढ़ ने अपना कहर दिखाना शुरू कर दिया है। इसीलिए मुझे और मेरे बच्चों अपने गांव के बाहर ही रहने दो सिकंदराबाद के सरपंच ने कहा तू जानती नहीं तेरे पति से मुझे दुश्मनी थी। तो मैं दुश्मनों को कैसे रख सकता हूं, और वैसे भी तुम इतने गरीब हो मैं विश्वास नहीं कर सकता हूं कि तुम चोरी नहीं करोगे, माया देवी बोली सरपंच जी हम समय काटने आए हैं, हम चोरी क्यों करेंगे सरपंच जी बोले ए बुढ़िया ज्यादा श्‍यानी मत बन और अपने बच्चों को लेकर यहां से निकल जा माया देवी सरपंच के आगे खूब रोई गिर-गिराई लेकिन सरपंच तेज तेज हंसता रहा।

written stories for kids
written stories for kids

bedtime stories in hindi

 माया को गांव से बाहर निकाल दिया, माया देवी के बच्चे बोले मां अब हम क्या करेंगे माया देवी बोली गांव में पानी है, और दूसरे गांव के लोग अपने गांव में घुसने नहीं दे रहे। अब हम कहां जाएं जंगल के अलावा तो कोई रास्ता ही नहीं है। माया देवी के बच्चे बोले मां हम इस सड़क पर भी तो रह सकते हैं, माया देवी बोली नहीं बेटा यहां भी पानी आ जाता है और अगर पानी नहीं भी आया तो सरपंच जी नहीं रहने देंगे, हमें इसकी नजरों से दूर जंगल में ही जाना होगा। ईश्वर ने जो भी लिखा है नसीब में वह तो होना ही है, माया देवी अपने बच्चों को लेकर जंगल में चली जाती है। जंगल में बहुत सारे बांस के पेड़ थे, वहां दो आम के और बाकी फलों के भी पेड़ था माया देवी के बच्चे बोले मां यहां तो गर्मी बिल्कुल ही नहीं है, और बहुत सारे फल भी हैं। अब हम यहां पर पेट भर कर खा सकते हैं, और आराम से रह सकते हैं माया देवी के दूसरे बच्चे ने कहा हां मां अच्छा हुआ वहां बाढ़ आ गई, क्योंकि ना तो वहां फल मिलते थे और ना इतनी ठंडी अच्छी हवा। माया देवी ने कहा बच्चों बाढ़ बहुत अच्छे के लिए आई हमें ऐसा नहीं सोचना चाहिए, क्योंकि बाढ़ के कारण जान और माल दोनों कि नुकसान होती है, और हम जंगल में रह सकते हैं लेकिन हमें यहां एक झोपड़ी बनानी होगी, नहीं तो जंगली जानवर हमें ही खा जाएंगे।माया देवी के बच्चे ने कहा लेकिन मां हम झोपड़ी कैसे बनाएंगे, माया देवी ने कहा हम लकड़ियों के मदद से झोपड़ी बनाएंगे माया देवी के दूसरे बच्चे ने कहा हां मां मैं पेड़ पर चढ़कर लकड़ी काट लाऊंगा।

bedtime stories for kids in hindi

माया देवी ने बोली नहीं मेरे बच्चे पेड़ों में भी जीवन होता है, हमें इन्हें नहीं काटना चाहिए। हम इनकी वजह से ही सांस लेते हैं, और खाते पीते भी हैं माया देवी के बच्चे ने कहा फिर हम झोपड़ी कैसे बनाएंगे, माया देवी बोली वह सामने देखो वहां पर कुछ सूखी लकड़ियां परी है हम उनसे अपना झोपड़ी बनाएंगे। माया अपने बच्चों के साथ लकड़ी इकट्ठा करना शुरू कर देती है, और कुछ घंटों की मेहनत के बाद वह पर्याप्त लकड़ी भी इकट्ठे कर लेती है, माया देवी का देव नाम का एक लड़का नदी के तरफ झोपड़ी के लिए फूस लेने चला जाता है, माया देवी बोली देव अकेले वहां मत जाओ पहले लकड़ी से झोपड़ी बना लेते हैं, बाद में फूस ले आएंगे। देव अपनी मां की कोई बात नहीं सुनता और फूस उठाने चला गया। तभी देव की चीख निकली क्योंकि उसे सांप ने काट लिया माया देवी ने बोला क्या हुआ देव, देव ने कहा मां मुझे सांप ने काट लिया, यह बात सुनकर माया देवी और मोनी दोनों रोते हुए देव के पास पहुंची। देव भी बेहोश हो चुका था, मोनी ने रोते हुए बोली देव, देव मायादेवी भी रोते हुए बोली देव बेटा हे भगवान मैंने क्या बिगाड़ा है तुम्हारा तुमने पहले मेरे पति छीना लिया फिर घर और अब बेटा भी भगवान मेरा बेटा मुझे लौटा दो, तभी उन्हें एक आवाज आती है, माया मैं जादुई बांस का घर हूं। मैंने तुम्हारी बातें सुनी थी, की तुम अपने बच्चों को पेड़ों के बारे में समझा रही थी, यह देख कर मुझे बहुत अच्छा लगा। मैं तुम्हारे बेटे को वापस जिंदा कर रहा हूं, और तुम्हें रहने के लिए एक जादुई घर भी दे रहा हूं।

Short Stories with Moral for Kids

hindi stories with moral

जिसमें तुम्हारा परिवार बिना किसी डर के रह पाएगा, और तुम अन्य लोगों का भी भला कर पाओगी। माया देवी बोली मैं कोई सपना देख रही हूं, जादुई बांस का घर बोला अभी तुम्हारा बेटा ठीक हो जाएगा, और एक आलीशान घर भी आ जाएगा जिसमें खाने का पूरा ध्यान रखा जाएगा, बस तुम अपनी आंखें बंद कर लो माया देवी और उसकी बेटी मोनी अपनी आंखें बंद कर लेती है, और जादुई बांस का घर बनकर तैयार हो गया। जो देखने में बहुत ही सुन्‍दर था। तभी देव भी जिंदा हो गया, और उसने अपनी मां को आवाज लगाई। माया देवी के बेटे ने माया को माम्‍मा कहकर पुकारा मायादेवी रोते हुए बोली देव तू ठीक है, माया देवी के बेटे ने देव कहा मां मैं तो सोया था। तब तक आपने इतना अच्छा घर बना दिया, माया देवी आश्चर्यचकित होती है। और तीनों पीछे देखते हैं, घर देख कर तीनों हैरान हो जाते हैं क्योंकि बांस का जादुई घर है। वह तीनों जल्दी से घर के अंदर जाते हैं, अंदर से वह घर नहीं बहुत बड़ा महल जैसा दिख रहा था।

short stories for kids in hindi

देव और मोनी को वह घर बहुत ही पसंद आता है और वह तीनों अपना जीवन उसी घर में बिताने लगे। फिर माया देवी ने देखा कि सरपंच भी बाढ़ से बचकर जंगल की ओर भागा आ रहा है।सरपंच बोला माया मुझे माफ कर दे और मुझे और मेरे परिवार को अपने घर में रहने के लिए दे दो। तभी माया देवी की बेटी बोली आपने मुझे अपने गांव में आने से रोक दिया था तो मैं अपने गांव में आपको कैसे रहने दू,तभी सरपंच बोला बेटा मुझे माफ कर दो मैं अपने किए हुए पर बहुत ही ज्यादा पछतावा कर रहा हूं उसी समय मायादेवी भी बोली कोई बात नहीं सरपंच साहब आ जाइए घर में।

short stories for kids in hindi

तब सरपंच ने अपने परिवार के साथ माया देवी के घर में आने लगे, जैसे ही सरपंच ने माया देवी के घर में पांव रखने की कोशिश की उसी समय जादुई घर में उसे घर से बाहर फेंक दिया। ठीक उसी समय बाढ़ का पानी भी जंगल में आ चुका था, बाढ़ का पानी बहुत अधिक रहने के कारण सरपंच और उसका परिवार बाढ़ के पानी में वह जाता है। लेकिन जादूई बांस के घर को बाढ़ के पानी से किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं होता है, कुछ दिन के बाद बाढ़ का पानी का कहर पूरी तरह से समाप्त हो चुका था। फिर भी माया देवी अपने बच्चों के साथ उसी जंगल में ही रहने लगी थी।

शिक्षा :- कभी भी किसी का बुरा नही सोचना चाहिए। क्‍योंकि भगवान सब देखता है। 

बेटा बेटी में भेदभाव

short stories in hindi with moral

एक गांव में मोहनलाल और उसके पत्नी रहते थे मोहनलाल के दो बच्चे थे एक लड़का और एक लड़की मोहन लाल के बेटी का नाम मुस्कान है और उसके बेटे का नाम रणबीर है मोहनलाल ने अपने बेटी का एडमिशन गांव के ही एक स्कूल में कराया था,रणवीर छोटा होने के कारण उसमें उसका एडमिशन किसी भी स्कूल में नहीं किया गया था, जब रणवीर बड़ा हो गया तो उसके पापा मोहन लाल ने अपनी पत्नी से कहा कि रणवीर अब स्कूल जाने लायक हो गया है उसका एडमिशन शहर के बहुत बड़े स्कूल में करवाना है।

short stories with moral in hindi language
short stories with moral in hindi language

stories in hindi with moral

रणबीर की मम्मी तैयार हो जाती है और बोलती है ठीक है एडमिशन करवा दीजिए उसी समय उसकी बेटी वही पढ़ रही थी जो कि मम्मी पापा के बीच में ही बोल पड़ती है और कहती है कि पापा मैं भी अपने भाई के साथ ही उन्हीं के साथ स्कूल में मैं पढ़ लूंगी। इतने में मोहनलाल गुस्सा हो जाते हैं और वह अपनी पत्नी को बोलने लगते हैं कि कमलेश तुम्हारी बेटी कुछ ज्यादा ही होशियार हो गई है,और मैं भी अपनी बेटी को डांटने लगती है। मोहनलाल अपने बेटा और बेटी का नाम स्कूल में अलग रखता है जिसमें बेटा का नाम कौशल और बेटी का नाम संध्या रखता है यही से दोनों का नाम बदल दिया जाता है।

Short Stories with Moral for Kids

फिर मुस्कान बोली आप दोनों मेरे कारण झगड़ा मत करो पापा अगर तैयार नहीं है तो मैं गांव के ही स्कूल में पढ़ाई पूरी कर लूंगी। और संध्या गांव के स्कूल में जाने लगती है। फिर एक दिन सुबह संध्या समय से पहले स्कूल जाने के लिए तैयार हो जाती है, और कौशिक अभी तैयार हो नहीं पाता है। कमलेश कहती है संध्या सुबह-सुबह तुझे कुछ काम नहीं है क्या तैयार होकर बैठ जाती। संध्या रसोई में जाकर मां की मदद करने लगती है, कौशिक अपने दोस्तों के साथ बाहर खेलने लगता है कौशिक की मां कमलेश परेशान हो जाती है कहती है मेरा लाल नीचे गिर गया।

moral story in hindi

मोहनलाल गुस्से में कहता है यह संध्या ही फालतू है इसको इतना अक्ल भी नहीं अपने भाई का ध्यान भी नहीं रख सकती है अरे तुम पैदा ही क्यों होती हो, मोहनलाल गुस्से में संध्या को बहुत डांटने लगते हैं, और भला बुरा कहने लगते हैं। मोहनलाल गुस्से में संध्या कहता है अब तुम्हें स्कूल जाने की कोई जरूरत ही नहीं है, संध्या रोते हुए मोहनलाल को कहती है सॉरी पापा अब से मैं कौशल का पूरा ध्यान रखूंगी, मुझे स्कूल जाने से मत रोको संध्या का स्कूल जाना बंद हो जाता है और कौशल की पढ़ाई शहर के बड़े स्कूल में चलती रहती है कुछ साल बाद संध्या की शादी हो जाती है, कौशल भी 12 वीं पास कर लेता है मोहनलाल घर में बैठकर चाय पी रहा होता है तभी वहां कौशल आ जाता है, कौशल मोहनलाल से कहता है पापा मुझे विदेश जाना है और मैं आगे की पढ़ाई विदेश में ही करूंगा, मोहनलाल कहता है बेटा तुम मुझे छोड़ कर कहां जाने की बात कर रहे हो तभी कौशल कहता है, पापा इमोशनल ड्रामा बंद करो मुझे अपना भविष्य बनाना है। मोहनलाल कहता है बेटा मैंने तुम्हारा भविष्य बनाने में अपना पूरा जीवन बिता दिया मैं तुम्हारा बुरा कभी नहीं चाहूंगा, लेकिन तुझे विदेश भेजने के पैसे मेरे पास कहां से आएंगे मोहनलाल कहता है मैंने जितना भी पैसा कमाया था वह तुझे अच्छे स्कूल में पढ़ाने में खर्च कर दिया है। अब तुम्हारा विदेश जाने का खर्चा मैं कैसे उठा पाऊंगा, कौशल कहता है मोहनलाल से कि अपना खर्चा कम करके मेरे लिए बचाना चाहिए था मुझे कुछ नहीं पता है, मुझे जाना है विदेश यह आपकी गलती है मेरी नहीं।

hindi story with moral

कौशल बहुत जिद करने लगता है, अपना घर बेच दो लेकिन मुझे अमेरिका जाने दो पढ़ने के लिए मोहनलाल अपने बेटे के प्यार के आगे हार जाता है और घर बेचकर सारे पैसे अपने बेटे को देखकर विदेश भेज देते हैं, पढ़ने मोहनलाल ने कुछ साल किराए के मकान में जीवन बिताने लगा और बेटे के लौट के आने का इंतजार करने लगा और बेटा लौट कर नहीं आया।

Top No 1 Short Stories with Moral for Kids

मोहनलाल ने बहुत मुश्किल से कौशल का नंबर पाकर उसे कॉल किया, कौशल अपने पापा से कहता है मैं उस सड़ी हुई जगह गांव में कभी लौटकर नहीं जाऊंगा मैं अपनी लाइफ में बहुत बिजी हूं। मेरी जॉब लग गई है और मैंने शादी भी कर ली है पापा और दोबारा मुझे फोन मत करना, मोहनलाल और उसकी पत्नी कमलेश बेटे से उम्मीद छोड़ कर वह दोनों वृद्ध आश्रम में रहने लगते हैं, 1 दिन मोहन लाल की पत्नी कमलेश की अचानक से मौत हो जाती है। डॉक्टर ने मोहनलाल की पत्नी की मरने का कारण हार्ट अटैक बताया मोहनलाल अपनी पत्नी के मरने पर बहुत रोता है और वह कोशल को डरते डरते फोन करता है। कौशल के फोन उठाने के बाद रोते हुए मोहनलाल ने बोला कौशल अपने बच्चे के बारे में पिता को बताता है कि मुझे अपने बच्चे का भविष्य बनाना है और मुझे अपना जॉब बचाना है इसलिए मैं गांव नहीं आऊंगा लेकिन मोहनलाल रोते हुए कहता है लेकिन मैं तुम्हारी मां को नहीं बचा पाया तुम अपना जॉब बचाते रहो, कौशल मायूस होते हुए कहता है सॉरी पापा क्या मॉं इस दुनिया में अब नहीं रही। कौशल को ज्यादा अफसोस नहीं होता है वह अपने पापा को कहता है अब पापा आप ही बताओ मैं अपने बच्चे का भविष्य संकट में कैसे डाल दूं।

Kids stories in Hindi

कौशल मोहनलाल से कहता है पापा मैं कुछ पैसे भिजवा देता हूं,मोहनलाल तभी कहता है। रहने दो कौशल वैसे भी हम दोनों वृद्ध आश्रम में रहते थे पैसे की कोई जरूरत ही नहीं है उसके बाद मोहनलाल फोन रख देता है, और अपने पत्नी का दाह संस्कार करने चला जाता है। मोहनलाल अपनी पत्नी के साथ बिताए हुए पुरानी बातों को याद करके बहुत रोता मोहनलाल की बेटी संध्या अपने बेटे के जन्मदिन पर वृद्ध आश्रम में कुछ बांटने आती है, और वह मोहनलाल की हालत देखकर बहुत रोने लगती है। और वह आश्रम की मालिक से बात करके अपने पिता मोहनलाल को अपने घर ले जाने लगती है, तभी मोहनलाल कहता है संध्या में अपनी बेटी का घर का कैसे कुछ खा सकता हूं मैं तुम्हारे साथ तुम्हारा घर नहीं जाऊंगा, तभी संध्या कहती है पापा बेटा बेटी में कोई भेद नहीं होता लेकिन जो गलती आपने सारे जीवन मे कि आज वही गलती फिर से दोहरा रहे हैं। तभी मोहनलाल अफसोस में संध्या को कहता है, मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था, मैंने बेटा बेटी में बहुत बड़ा भेदभाव कर दिया।

story in hindi with moral

मोहनलाल अपनी बेटी संध्या से कहता है सिर्फ बेटा तब तक ही बेटा रहता है जब तक उसकी शादी नहीं हो जाती, बेटी तब तक बेटी रहती है जब तक उसकी शरीर से प्राण नहीं निकल जाती।

शिक्षा :- बेटा और बेटी में कोई अंतर नही होता अगर बेटि को भी बेटे की तरह आजादी दे दी जाय तो वह भी पहले अपने माता-पिता का नाम  रौशन करेगी 

गरीब मां और अमीर मां

fantasy story in hindi

एक गांव में एक पति पत्नी रहते थे सुरेश और कामताबाई घरों में काम करने जाती है और सुरेश भी एक मजदूर है, वह दोनों ही अपने बच्चे को अकेले घर पर छोड़ कर जाते है। उसके बच्चे घर के बाहर मिट्टी में खेलता रहता है, 1 दिन कांताबाई के बच्चे अमित को बुखार आ गया। कांताबाई काम पर जाने के लिए निकल रही होती है, लेकिन जैसे ही अपने बच्चे अमित को प्यार करने के लिए आगे आती है, अमित का बदन बुखार से गर्म होता है। तभी कांताबाई कहती है अरे अमित को तो बहुत ज्यादा बुखार है, अब मैं काम पर कैसे जाऊं लेकिन काम पर जाना बहुत ज्यादा जरूरी है। नहीं तो मैंम हमसे आप बहुत ज्यादा गुस्सा होंगी मैं अपने बच्चे को दवाई देकर चली जाऊंगी लेकिन मेम साहब ने बोला था। आज काम पर आना बहुत ज्यादा जरूरी है। एक बार मेम साहब को कॉल करके पूछ लेती हूं। तभी कामताा अपने मैम साहब को कॉल करती है और कहती है मैम साहब मेरे बच्चे का तबीयत ठीक नहीं, क्या मैं छुट्टी ले सकती हूं तभी मेमसाहब कहती है, तुम छोटे लोग होते ही ऐसे हो बस छुट्टी का बहाना चाहिए। तभी उसकी मैम साहब कांताबाई को बहुत भला बुरा कहने लगती है, तभी कांताबाई रोते हुए अपने मेम साहब को कहती है मैम साहब मुझे काम से नहीं निकालो।

hindi short story for kids

कांताबाई अपने बेटे को भूख के लिए ही अपने बेटे को बुखार में तपता हुआ छोड़ कर चली जाती है, वह अपने मेम साहब के घर जा चुकी रहती है तभी मेमसाहेब उसके सामने आकर कहती है क्या सच में तुम्हारे बेटे को कुछ हुआ है या तुम्हें छुट्टी का मन था। तभी कांताबाई रोते हुए मेम साहब को कहती है कोई भी मां अपने बच्चे को बीमारी के बारे में बताकर छुट्टी नहीं मांगेगी , तभी उसकी मैम साहब कहती है आज तो किसी कीमत पर मैं तुम्हें छुट्टी नहीं दूंगी क्योंकि मेरे बेटे रवि का तबीयत खराब है आज मैं उसका ध्यान रखूंगी और तुम खाना बनाना। कांताबाई मायूस होते हुए मेम साहब को कहती है कि मैम साहब आज मुझे छुट्टी जल्दी ही दे देना क्योंकि मैं मजबूरी में आज काम पर आई हूं मैं अपने बेटे को अकेला छोड़ कर आई हूं मैम साहब मुझे आज जल्दी छुट्टी दे देना। तभी मेम साहब अकरा के कहती है बस बस अब रोना बंद करो और कपड़े धोने चालू करो। कांताबाई के मन में मायूसी और मन में उदासी सी कपड़े धोने लगने लग जाती है। और दूसरी तरफ उसकी मैम साहब अपने बेटे को रवि को गोद में लेकर सोफे पर बैठकर ध्यान रखती है, 18 साल बाद कामता के बेटे अमित और उसकी मेम साहब के बेटे रवि दोनों बड़े हो जाते हैं। लेकिन अमित की मां कांताबाई भी मेम साहब के घर में काम करने जाती थी तो अमित को बहुत ज्यादा बुरा लगता था, अमित अपनी पढ़ाई के साथ साथ रात को क्लब रेस्टोरेंट में वेटर का काम करने लगता है। 1 दिन एक रात को रवि अपने कुछ दोस्तों के साथ उसी रेस्टोरेंट में अमित को देखकर पहचान लेता है, रवि कहता है अमित को है मैंने तुम्हें कहीं देखा है। तभी रवि कहता है कि मैंने तुम्हें कहीं देखा था तुम कामता बाई का बेटा है जो मेरे यहां काम करती है, तभी रवि अमित को बुरा भला कहने लगता है, और कहता है जब तुम्हें कुछ काम चाहिए होगा, तो मुझे बोल देना। 

very short stories in hindi language
very short stories in hindi language

small story in hindi

रवि अपने सभी दोस्तों के सामने अमित का बहुत ज्यादा मजाक बनाता है, लेकिन अमित सुनते रहता है। अमित अपनी पढ़ाई और अपना काम दोनों करते रहता है, लेकिन रवि रोज रोज पार्टी करता है और ड्रिंक करता है, रवि की मां 1 दिन उसे अपने पास बिठाया और उसे बात करने लगी। और कामता बाई वही काम कर रही होती है तभी रवि की मां ने रवि को कहती है, रवि तुम क्यों नहीं अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे रहे हो कब तक ऐसा चलेगा बेटा, तभी रवि कहता है। अपनी मां से बस करो मां फिर से तुम शुरू हो गई मैं अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे रहा हूं, तभी रवि की मां रवि को कहती है। तुम्हारे अंदर सारे बुरे गुण आ गए हैं। तुम अपनी पढ़ाई पूरी कभी नहीं कर पाओगे। तभी रवि अपनी मां को भला बुरा कहने लगता है, रवि तभी रवि की मां रवि को कहती है,एक कांताबाई का बेटा है।जो काम भी करता है और पढ़ाई भी करता है, एक तुम हो ना ही कुछ काम करते हो और ना ही ठीक से पढ़ाई करते हो। तभी रवि अपनी मां को कहता है मॉं आपको इतना पता रहना चाहिए कि मैं किसी कामवाली का बेटा नहीं हूं।

रवि अपनी मां से लड़ झगड़ कर पैसे लेने लगता है। वही अमित बहुत कड़ी मेहनत करके पढ़ाई अपना करता है, इसी बीच अमित ने एक एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर बनाए। जो कि बाद में देखते देखते एक डिजिटल कंपनी में बदल जाता है, अमित ने अपना अच्छा सा एक घर बना लिया। और मां के लिए घर में नौकर चाकर रख, वहीं दूसरी तरफ रवि ने कोई बिजनेस ही नहीं खोला था। तभी रवि की मां ने रवि से पूछा रवि तेरी कंपनी कहां है तूने अभी तक मुझे दिखाया क्यों नहीं, तभी रवि की मां ने रवि को डांटते हुए कहा मैं तुम्हें 5000000 दे चुकी हूं, तभी रवि अपनी मां को कहता है मां तुम बैंक से लोन ले लो क्योंकि वह भी पैसा नहीं तो चला जाएगा, तभी रवि की मां उसकी बातों में आ जाती है और वह बैंक से लोन लेकर रवि को दे देती हैं।

stories in hindi for kids

रवि अपने मां से पैसे लेकर सट्टा खेलता है जो कि वह सारे पैसा अपने सट्टे में सारा पैसा बर्बाद कर दिया, रवि की मां पुरानी बात सोच कर बहुत अफसोस में रहती है, अमित की मां और अमित अपने मेम साहब के घर आते हैं और मिठाई खिलाती है कहती है मैम साहब मैं बहुत खुश हूं ।क्योंकि मेरे बेटे ने मेरा दिन बदल दिए। मिठाई खिलाने के बाद कांताबाई और अमित दोनों कार में घर चले जाते हैं, लेकिन रवि और उसकी मां दोनों शर्म से नजरें झुका लेते हैं।

शिक्षा :- मेहनत का फल मिठा होता होता और मेहनत करने वालों की हार नही होती।   

लालची सौतेले बाप

hindi bible stories

एक कस्बे में रविस अपने बेटे सोनू और अपने बेटी सोनिया के साथ रहता है, उसकी पत्नी का देहांत 1 महीने पहले हो गया है। रवीश शराबी किस्म का आदमी है। रवीश कुछ काम नहीं करता है इसी की वजह से रवीश की पत्नी मर गई, क्योंकि रवीश उसे रोज मारता था, और रवीश अपने पत्नी से शराब के लिए पैसे भी मांगता था, रवीश की दोनों बच्चे सो रहे होते हैं तभी रवीश वहां आता है और कहता है अरे नालायक को उठ जाओ, और पैसे कमा कर लाओ तभी सोनू रवि से कहता है, पापा हम कहां से पैसे लाए तभी रवीश गुस्से में सोनू को डांटने लगता है, तभी रवीश कहता है मैं तुम्हारा असली बाप नहीं हूं मैं तुम्हारा सौतेला बाप हूं, रविस सोनू को कहता है कि तेरी मां से इसलिए मुझे शादी करनी पड़ी थी क्योंकि तुम्हारी मां मुझे पैसा कमा कर दे।तुम दोनों के मां-बाप मर गए और तुम दोनों को मेरे ऊपर छोड़ कर चले गए।

hindi kahani for kids

तभी सोनिया कहती है पापा आप क्या कह रहे हो हमें कुछ भी समझ में नहीं आ रहा, तभी सोनू रोते हुए, रवीश को कहता है।पापा मुझे स्कूल जाना है तभी रवीश कहता है, चुपचाप दोनों अब भाई-बहन जाओ और पैसे कमा कर लेकर आओ। रवीश दोनों बच्चों को डांटते हुए कहता है शाम को घर पैसे लेकर ही आना नहीं तो घर से बाहर कर दूंगा। तभी सोनिया मायूस होते हुए रवि से कहती है पापा हम दोनों पैसे कमा लेंगे प्लीज हमें घर से बाहर मत करना, तभी रवीश सोनिया से कहता है।ना ना सोनिया मैं तो तुम्हें घर से कभी नहीं बाहर करूंगा क्योंकि तुम तो मेरे लिए धन की चाबी हो तुम तो मुझे बहुत सारा पैसा देकर जाओगी लेकिन शाम में मुझे पैसे चाहिए मतलब चाहिए, रवीश दोनो बच्चों को धमकी देकर वापस शराब पीकर सो जाता है। सोनू और सोनिया एक दुकान में काम मांगने के लिए चले जाते हैं लेकिन उन दोनों को कोई काम नहीं देता है, सोनू और सोनिया दोनों परेशान होकर यह कहते हैं, लगता है आज हम दोनों को कोई काम नहीं मिलेगा।

moral stories for teenagers
moral stories for teenagers

short moral stories for kids in hindi

तभी सोनिया और सोनू मायूस होकर कहते हैं भैया घर चलो क्योंकि बहुत जोरों की भूख लगी है तभी सोनू कहता है सोनिया घर पर मां नहीं है जो हमारे लिए घर पर खाना बनाकर रखेगी, तभी सोनिया सोनू से कहती है मां नहीं तो क्या हुआ पापा तो है तभी सोनू कहता है सोनिया से तुझे सुनाई नहीं दी थी सुबह पापा ने क्या कहा था, पैसा नहीं कमा कर लाए तो घर से बाहर कर देंगे बहुत मार पड़ेगी सोनिया अभी घर नहीं जाना चाहिए। तभी सोनिया सोनू से कहती है इतना सीरियस मत लो पापा की बातें पापा शराब की नशे में मजाक कर रहे होंगे,चलो घर चलते हैं पापा कुछ खाना बना के रखे होंगे, सोनिया जिद मचाने लगती है घर जाने के लिए लेकिन सोनू सोनिया को समझाते हुए कहता है तू तो जानती है सोनिया की मां ने अब तक के लिए राशन घर में रखा हुआ था इसलिए पापा ने अभी तक हम दोनों को कुछ नहीं कहा था, तभी सोनिया कहती है सोनू से भैया आप ज्यादा मत सोचो चलो घर खाना खाने के लिए गरम गरम खाना खाएंगे, सोनू कहता है कि सोनिया घर पर गरम गरम खाना नहीं गरम गरम मार खाने को मिलेंगे। सोनिया बहुत ज्यादा जिद मचाने लगती है तभी दोनों भाई बहन घर के लिए निकल, रवीश अपने दोनों को बच्चे को देखकर बहुत ज्यादा खुश हो जाता है और कहता है तुम दोनों मेरे लिए बेकार नहीं हो तुम दोनों जरूर मेरे लिए पैसे लाए होगे। रवीश तभी सोनू से कहता है ला मुझे अपनी पहली कमाई का दर्शन दे दे और तू भी ला सोनिया तू भी अपनी पहली कमाई मुझे दे दे, तभी रवीश कहता है क्या हुआ तुम लोग कुछ कहते क्यों नहीं तभी सोनिया कहती है पापा हम लोगों से कुछ कमाई नहीं हुई तुम हम लोग पैसा कहां से दे, रवीश अपने बच्चों को मारने की धमकी देने लगता है, कहता है तुम्हें भी बेल्ट और डंटों से मारना पड़ेगा।

hindi short stories for kids

रवीश डंडों से सोनू और सोनिया को बहुत मारता है दोनों बच्चे रात में सोते सोते बहुत रोते हैं, सोनिया और सोनू को अपनी मां की बहुत ज्यादा याद आने लगती है, दूसरे दिन सोनिया और सोनू एक चाय की दुकान पर काम करने चले जाते हैं। और पैसे लाकर अपने सौतेले बाप रवीश को दे देता है, ऐसे करते करते काफी समय बीत जाता है, और सर्दी आ गई। 1 दिन सोनिया का बाहर का कुछ खाने का मन था तो सोनू ने उसे मोमोज खिला दिए, और दोनों घर आ गए। तभी रवीश दोनों बच्चे से पैसे मांगने लगते हैं, तभी सोनू कहता है पापा आज पैसे नहीं है हमारे पास रवीश कहता है, मुझे ना सुनने का आदत नहीं है मुझे पैसे दो सोनू रवि से कहता है पापा मुझे बाहर का कुछ खाने का मन था तो हम दोनों ने बाहर में मोमोज खा लिया रवीश को यह बात अच्छी नहीं लगती है। और वह अपने दोनों सौतेली बच्चे को बहुत पीटते हैं, और वह इतनी सर्दी में भी अपने दोनों बच्चे को घर से बाहर निकाल देता है और अंदर से दरवाजा बंद कर लेता है, ऐसे ही दिन कट जाते हैं, बहुत दिनों बाद सोनिया को बेचने का प्लान बनाता है रवीश दूसरे दिन ही रवीश एक बड़े सेठ को अपने घर बुलाता है, उससे सोनिया का सौदा एक लाख में कर देता है, तभी उसका सेठ रवीश को कहता है। तुम अपनी बेटी सोनिया को क्यों बेचना चाहते हो।

 Short Stories with Moral for Kids

small stories for kids in hindi

तभी रवीश अपने सेट को कहता है,मुझे शराब के लिए पैसे चाहिए इसलिए मैं सोनिया को बेचना चाहता हूं। तभी सेठ कहता है अच्छा यह बात है मुझे सब समझ में आ गया है, तभी सेट कहता है अच्छा यह बताओ रवीश यह दोनों महीने में कितने कमाते हैं रविश कहता है यह दोनों महीने में 15 100 कमा लेते हैं। तभी कहता है, मैं तुम्हें 500000 देता हूं तुम दोनों को मुझे दे दो, तभी रवीश कहता अरे वाह मेरे तो भाग्य खुल गए। सेठ रवीश को ₹500000 दे देता है। और सोनू और सोनिया को ले जाता है, दोनों आंखों में आंसू लेकर सेठ के साथ चले जाते हैं, तब सेठ कहता है बच्चों डरो मत मैं बहुत बड़ा बिजनेसमैन हूं, मेरे पास खूब धन है।मेरी बड़ी कंपनी है लेकिन मेरे पास कोई बच्चे नहीं है। अब से तुम दोनों मेरे ही बच्चे हो, सोनू और सोनिया बहुत ज्यादा खुश हो जाते। सेठ अपने घर ले जाता है और एक बड़े अच्छे से स्कूल में दोनों को पढ़ाता है, सोनू और सोनिया अरबों के मालिक हो जाते हैं से उन दोनों को बहुत ज्यादा प्यार करते हैं।

Conclusion
आज के इस पोस्ट में बहुत ही रोचक कहानी ऊपर लिखी गई थी जिसमें आप लोगों को story for kids Hindi, Hindi bedtime stories, short bedtime stories in Hindi, adventure story in Hindi, short Hindi story जैसे कहानी के बारे में अच्छी तरीके से आप लोगों को बताया गया है आप लोगों को यह कहानी कैसी लगी और क्या सीख मिली यह सभी को कमेंट बॉक्स में कमेंट करके जरूर बताएं

Related Posts

Click Here To Translate
error: Content is protected !!