Short Bedtime best Stories

Top no 1 Short Bedtime best Stories for kids in Hindi

Top no 1 Short Bedtime best Stories for kids in Hindi

इस पोस्ट में हम आप लोग को Short Bedtime best Stories for kids के किये बतायेगे जो की कुछ सिखने और सीखने लाइक होगा। यह कहानी पढने बहुत ही मजेदार और रोचक है। और इस कहानी से हमे बहुत कुछ सिखने के लिए मिलेगा ।

गरीब अनाथ बच्चे की कहानी

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समंदर के किनारे एक गांव था, जहां पर कृष्णा और अमृता नाम के पति पत्नी रहते थे, उनके दो बच्चे भी थे। कीर्ति और बालू उन दोनों को अपने बच्चों से बहुत प्यार था। वह दोनों भी खेती का काम करते थे, और अपना घर चलाया करते थे। सब कुछ ठीक चल रहा था 1 दिन गांव में अचानक कुछ ऐसा हुआ, जिसका अंदाजा किसी को ना था, वही सुनामी उस गांव में सुनामी के कारण सभी लोग चीटियों की भांति बहते जा रहे थे। अचानक आइ इस सुनामी के कारण कई लोगों की जान हानी हुई, पर भगवान की कृपा से कीर्ति और बालू किसी तरह बच गए।

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पर अपने मां-बाप के साथ ना होने के कारण वह दोनों बहुत दुखी थे, और वे दोनों अकेले हो गए थे। उन दोनों पर ध्यान देने वाला कोई नहीं था, उनका कोई सहारा नहीं बचा था। रो-रो कर उन दोनों का बहुत बुरा हाल था, वह दोनों एक दूसरे का हाथ पकड़ कर एक दूसरे को दिलासा दिया। वे दोनों कहीं भी नहीं जा पा रहे थे हर तरफ पानी ही पानी था। वे दोनों बहते बहते कृष्णापुर नामक गांव पहुंचे। लेकिन वहां भी सिर्फ पानी ही पानी था, उन दोनों के पास बचने का कोई आसरा नहीं दिख रहा था, वे दोनों घबरा कर रोए जा रहे थे। तभी कीर्ति ने बालू से कहा बालू हम दोनों ऐसे भूखे रहे तो मर ही जाएंगे, और अगर बाढ़ का पानी कम नहीं हुआ ऐसे ही बढ़ते गया तो इसमें डूब कर ऐसे ही मर जाएंगे। और वैसे भी अपने माता-पिता अब नहीं रहे, तो फिर हम दोनों जी कर क्या करेंगे। तभी बालू कहता है दीदी तुम ऐसे बात मत करो दीदी मुझे डर लगता है।

Short Bedtime best Stories
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 बालू ने अपने दीदी का हाथ थामा, उसी समय एक लकड़ी के चकले पर बैठी हुई औरत वहां पहुंची। उस औरत ने उस चकले पर चूल्हा जला कर रखा था, और कुछ जरूरत का सामान भी रखा था। उस औरत ने बच्चों को देख कर कहा बच्चों, यहां आओ आओ तो, ऐसे कह कर उस औरत ने दोनों बच्चे को चकली पर बैठाया। तभी वह औरत कीर्ति और बालू से कहती है, तुम दोनों को देखकर लगता है कि तुम दोनों बहुत दुखी हो, और लंबे समय से भूखे हो। क्या इस बाढ़ में तुम्हारे मां-बाप बह गए हैं, तभी कीर्ति उस औरत से कहती है हम नहीं जानते हमारे मां-बाप कहां गए हैं, बहुत समय से उनका कोई पता नहीं very short stories for kids in hindi उस औरत ने उन दोनों बच्चे को दिलासा दिया और उसे खाना खिलाया। दोनों ने खाना खाकर तो थोड़ी देर विश्राम किया। उस चकले को तैरते हुए औरत उसे बढ़ाती रही, उस चकले को ऐसे बढ़ाते बढ़ाते 2 दिन बीत गया उन दोनों को पता भी ना चला कि 2 दिन कैसे बीत गया वह दोनों खाते पीते दिन बिताते चले जा रहे थे।

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ऐसे ही 1 सप्ताह बीत गया था। उस औरत के पास खाना बनाने की सारी सामग्री खत्म हो गई थी वह तीनों भूख से ताल मिला रहे थे, कीर्ति और बालू अपने भूख को मारकर उस औरत से कुछ ना कहकर उस औरत की ओर यूं ही देखे जा रहे थे, क्योंकि बच्चे भी वहां के स्थिति को समझते थे। वह दोनों भोजन के अभाव में बेहोश होकर गिर जाते हैं, और वह चकला बहते हुए पहाड़ी इलाके के छोटे से नदी के किनारे पहुंच जाता है, उन दोनों को धीरे से होश आया उन्होंने आंख खोल कर देखा तो तो आसपास पहाड़ी और जंगल का इलाका था|short hindi story for kids ऐसे कमजोर हालत में ही वह तीनों धीरे से अंदर पहुंचते हैं। वहां उन्हें कुछ फल दिखाई देते हैं, औरत ने बच्चों से कहा बच्चों अब हम बहुत दूर आ चुके हैं। यहां से लौटकर नहीं जा सकते। यहां पर खाने के लिए बहुत फल मिल जाएंगे, रहने का बंदोबस्त कर हम तीनों अब से यही रहेंगे। उस औरत की बातें सुनकर बच्चों ने हां कह दिया। और वहां रहने के लिए राजी हो गए, उन्होंने देखा कि कुछ लोग यहां पर लकड़ियां तोड़कर और फल लेकर जा रहे थे, तभी वह औरत कहती है लगता है यहां आस-पास कोई गांव है। इसीलिए यह लोग यहां दिखाई दे रहे हैं। जैसा औरत ने सोचा था सचमुच वहां एक गांव था, जब वह तीनों गांव पहुंचे तब उन्हें पता चला कि गांव के सारे लोग पहाड़ी इलाके जाकर लकड़ी और फल तोड़ कर लाते हैं।

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 गांव में उन्हें बेचा करते थे। यह शब्द एक औरत ने बच्चों से कहा, तुम दोनों अपने माता पिता को याद करके रो रहे हो ना। अब यह सब भूल जाओ, अब से मैं ही तुम्हारी मां और तुम्हारी पिता हूं। हम यहीं पर रहेंगे, यहां जंगल में मिलने वाले लकड़ियों को बेच कर जी लेंगे, अब से हम साथ रहेंगे। क्या कहते हो बच्चों मेरा भी कोई सहारा नहीं है, और तुम दोनों का भी नहीं हम तीनों एक दूसरे का सहारा बन कर रहा करेंगे, यह सब सुन बच्चों ने कहा हमारे माता-पिता तो नहीं रहे, हम जब बेसहारा हो गए थे तब आप ही ने हमें सहारा दिया। हमारा ध्यान रखा, हमारे लिए आप ही सब कुछ हो, हम भगवान से प्रार्थना करते हैं हमारे माता-पिता का कभी ना कभी पता चले। ऐसा कहेकर बच्चे उस औरत से लिपट कर रोने लगे|

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औरत भी उन दोनों बच्चे को सीने से लगाकर रोने लगी, कुछ दिनों बाद उन्होंने अपना वहां पर एक घर बनाया और वहीं पर रहने लगे। इस तरह वह तीनों लकड़ियां और फल बेचकर खुशी-खुशी रहने लगे, कीर्ति और बालू दोनों भीखसाडन करने के बाद थक कर एक शॉप सामने बैठ जाते हैं। तभी बालू कीर्ति से कहता है दीदी अब और मैं नहीं चल पाऊंगा। यहां थोड़ी देर आराम करते हैं, बालू के ऐसा कहने पर कीर्ति ने बालू की बात मान ली। और उन दोनों ने वहीं पर आराम किया, वह रात बीत जाती है। उसके अगले दिन शॉप की मालकिन वहां आकर कहने लगी कौन हो तुम लोग और यहां क्यों आए अरे रे कितनी बदबू आ रही है तुम्हारे शरीर से, उस शॉप मालकिन की डांट सुनकर कीर्ति उठ गई लेकिन बालू सोया ही था। क्योंकि उसे ठंड से बुखार चढ़ गया था, वह होश में नहीं आ पा रहा था, तभी मालकिन कीर्ति से कहती है यह लड़का कौन है उसे भी उठाना। और कीर्ति को डांटने लगी तब कीर्ति ने बालू को आवाज लगाई, इसी तरह बालू को छूकर उठाने लगी तब उसे पता चला कि बालू का बदन तो तप रहा है।

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 कीर्ति शॉप मालकिन से कहती है मासी जी मेरा भाई का बदन तप रहा है, कृपया कर कुछ पैसे दीजिए। मैं इसे अस्पताल ले जाऊंगी, मुझ पर दया कीजिए कीर्ति शॉप मालकिन के सामने गिर गिराने लगती है। तभी शॉप मालकिन कहती है सुबह-सुबह यह क्या लगा रखी है, ऐसा कहकर वह बालू का हाथ पकड़कर घसीट ने लगी। तभी कीर्ति शॉप मालकिन के सामने हाथ जोड़ कर कहती है मासी मासी ऐसा मत करो मेरे भाई को ऐसे मत घसीटो मैं उसे ले जाती हूं, तभी शॉप मालकिन ने बालू को वहीं छोड़ा और वहां से चली गई, तभी कीर्ति जोर जोर से रोने लगी। तभी कीर्ति मन ही मन रोते-रोते कहती है हे भगवान कोई हमारी सहायता कर देता तो अच्छा होता, और बालू को पुकारने लगती है। तभी शॉप मालकिन के पति ने दोनों को देखा तो उनसे पूछने उनके पास गए। और कहते हैं बच्चों कौन हो तुम और क्या हुआ है, तभी कीर्ति ने रोते-रोते जवाब दिया चाचा जी हमारे मां-बाप नहीं है हम अनाथ हैं हमारी मदद कर दीजिए मेरे भाई को बहुत बुखार है मेरे पास पैसे भी नहीं है हम पर दया करिए। ऐसे रो-रो कर गिर गिराने लगी।

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उस आदमी को बच्चों पर बहुत दया आई, वह तुरंत उन दोनों के लिए अस्पताल चला गया। वह डॉक्टर ने बालू की जांच की, तभी डॉक्टर ने कहा इसको तो टाइफड वाला फीवर है, बहुत तेज बुखार है यह दोनों बच्चा कौन है शंकर इन दोनों में पोषण की बहुत कमी है। तभी शंकर कहता है पावली यह तो मैं भी नहीं जानता कि यह बच्चे कौन हैं, सड़क पर बेचारे परेशान हो रहे थे। इसीलिए यहां ले आया हूं चाहे जितना भी खर्चे लगे इस बच्चे को इलाज कर दो। तभी पावली कहती है अरे शंकर ऐसे बच्चों को तो मैं मुफ्त में इलाज कर दूंगी। तुम चिंता मत करो, पहले इस लड़की को कुछ खिला लाओ और हां उस बच्चे के लिए भी दूध और ब्रेड भी लाना। डॉक्टर के ऐसा कहने पर शंकर ने उसकी बात मानी और कीर्ति को अपने साथ खाना खिलाने ले गया। कीर्ति ने पेट भर खाना खाया, वह रात बीत जाती है शंकर ने उन दोनों बच्चे का बहुत ध्यान रखा है। कुछ दिनों बाद बालू का बुखार पूरी तरह से ठीक हो गया शंकर उन दोनों बच्चों को साथ लिया अपने घर चला जाता है।

कहानियों बच्चों के लिए

उन दोनों बच्चों को देखकर शंकर की पत्नी ने कहा इन भीकारी बच्चों को घर क्यों लाए हो। तभी शंकर अपनी पत्नी से कहता है सांता थोड़ा शांत हो जाओ, इन बच्चों का इस दुनिया में कोई नहीं है। हमारे भी तो बच्चे नहीं हैं हम अगर इन्हें पालेंगे तो इसमें गलत क्या है। तभी शंकर की पत्नी शांता कहती है ऐसे सड़क से उठाए हुए बच्चे को पालना मुझे पसंद नहीं। अब जो भी हो तुम लेकर आए हो तो मैं कुछ भी नहीं कहूंगी। उसके बाद शंकर ने उस दोनों बच्चों को खूब नहलाया। उन्हें साफ कपड़े भी पहना है, वह बच्चे वही रहने लगे। शांता को बच्चे का वहां रहना बिल्कुल पसंद नहीं था। वह हर समय उनकी पिटाई करती और उन्हें डांटा करती। उन दोनों बच्चे का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा करती, ऐसे ही कुछ दिन गुजरते हैं। 1 दिन सांता की सेहत बिगड़ जाती है। तभी कीर्ति ने उसे देखा और कहा मासी क्या हुआ। अरे आपका बदन तो बहुत तड़प रहा है, कीर्ति ने तुरंत उसके माथे पर पट्टी रखिए। और बालू ने उसके पैर पर तेल की मालिश की, ऐसे समय पर शंकर को घर पर ना होना बच्चों के लिए थोड़ा मुश्किल हो रहा था। तभी कीर्ति ने एक काढ़ा बनाया। जो वह जानती थी। उसने उस कार्य से बुखार कम करने की कोशिश की, 2 दिनों के बाद सांता का बुखार कम हुआ, पर उसमें अभी कमजोरी थी।

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2 दिन के बाद शंकर घर वापस लौटा। बच्चों ने उसे सारी बात बताई, शंकर तुरंत उसे अस्पताल लेकर गया। पर उसे बुखार बिल्कुल भी नहीं था, तब डॉक्टर ने कहा बधाई हो शंकर तुम बाप बनने वाले हो। इनको बुखार तो बिल्कुल भी नहीं है कौन सी दवाई दी तुमने इसे लगता है कोई जड़ी बूटी दी होगी, इनका गर्भाशय खुल गया है। यह सच है या नहीं मुझे समझ नहीं रहा, डॉक्टर के ऐसा कहने पर शंंकर ने से सारी बात बताई। यह सुनकर डॉक्टर आश्चर्यचकित हो गए, और बच्चों से उसने पूछा बच्चों यह जड़ी बूटी वाली दवा तुमको कैसे पता। तभी कीर्ति कहती है हमारे दादा दादी ने हमें यह सिखाएं। उन्होंने कहा था इस काढ़े से कई बीमारियां ठीक हो जाती है, उनके जाने के बाद हम सड़क पर आ गए। कीर्ति ने रोते हुए डॉक्टर को सारी बात बताई। तभी डॉक्टर ने कहा रो मत बच्चों तुम्हारी वजह से भला ही हुआ है। और शांता आपने बेड पर से उठ कर बच्चों को अपने पास लिया और कहा बच्चों मुझे माफ कर दो मैंने तुम्हें बहुत सताया। आज मैं तुम्हारी वजह से मां बन रही हूं, मैं मां बन भी जाऊं तब भी तुम्हें ऐसे ही प्यार करूंगी। ऐसा कहकर शांता ने उन दोनों बच्चों को गले से लगाए

गरीब मां बाप

कहानीयो बच्चों की

एक छोटे से कस्बे में 2 मित्र राजू और श्याम रहते हैं, राजू के घर में उसकी पत्नी गीता अपने दो बच्चों के साथ रहती है। वही राजू के घर के ठीक सामने श्याम अपनी पत्नी लीला और तीन बच्चों के साथ रहता है। राजू और श्याम के पास अपना छोटा सा खेत है। जिस पर खेती करके वह अपना गुजारा करता है, राजू और श्याम दोनों सुबह-सुबह अपने खेत पर जाते हैं। वहीं पर सभी बच्चे खेल रहे होते हैं, तभी राजू कहता है इस बार फिर से फसल अच्छे नहीं हुए मैंने सोचा था अगर फसल अच्छे होंगे तो बाजार में दोगुने दामों में बेचूंगा। तभी श्याम कहता है लगता है इस बार फिर से नमक रोटी से ही काम चलाना पड़ेगा, तभी सभी बच्चे राजू और श्याम के पास पैसे मांगने आते हैं। तभी राजू कहता है अरे अरे सब शांत हो जाओ सब को पैसे दूंगा। और श्याम कहता है लेकिन पैसे नहीं सबको रात की बासी रोटियां।

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short story in hindi with moral value सभी बच्चे उदास हो जाते हैं सभी बच्चों में से श्याम का बेटा अमन कहता है  बाबा हम कब तक ऐसे गरीबी में जिएंगे। राजू और श्याम और सभी बच्चे घर आ गए। तभी उनके घर के सामने एक बड़ी सी गाड़ी आकर रुकी, गाड़ी में हमेशा राजाराम और राजश्री मैडम जाने-माने शहर के रहीस आदमी है। जो कस्बे में आकर सभी बच्चों से मिलते हैं। वह हमेशा बच्चों के लिए नए नए कपड़े और चॉकलेट लाते हैं। आज भी वह कपड़े और चॉकलेट लेकर आए, तभी राजू की बेटी राजू से कहती है बाबा आज हम लोगों ने चॉकलेट खाई तभी राजू अपनी बेटी से कहता है चलो अच्छा हुआ कम से कम तुम लोगों ने चॉकलेट तो खाई हमारे नसीब में ऐसा कहा। तभी श्याम कहता है हां भाई हम लोगों ने तो हमेशा बासी रोटी और नमक ही जाना है। तभी राजू की पत्नी राजू से कहती है यह राजश्री हमारी बच्चों से क्यों मिलने आती है मुझे ठीक नहीं लगता। तभी राजू कहता है हां तुम सही कह रही हो। कल से बच्चों को मना कर देना उस राजश्री से ना मिले। अगले दिन फिर सुबह राजश्री और राजाराम बच्चे से मिलने आते हैं, तभी राजाराम राजश्री से कहता है राजश्री हमारी शादी को 10 साल हो गए हैं अभी तक हमारा कोई औलाद नहीं। तुम तो मुझे मेरे खानदान का बारिश नहीं दे पाओगी। तो जाओ अमन के घर वालों से बात करो, stories for kids मैं उसे अपने खानदान का बारिश बनाऊंगा। तभी राज श्री राजाराम से कहती है ठीक है मुझे भी अमन पसंद है, तभी अमन राजश्री और राजाराम को श्याम और लीलाला से मिलवा ता है, तभी राजश्री श्याम और लीला को नमस्ते कहकर कहती है अमन बहुत प्यारा बच्चा है मुझे अमन को लेकर आपसे कुछ बात करनी है। तभी लीला ऊंची आवाज में राजश्री से कहती है हां बोलो क्या बात करनी है, तभी राजश्री बड़े प्यार से लीला से कहती है हमारी कोई औलाद नहीं है इसलिए हम अमन को गोद लेना चाहते हैं। तभी लीला बहुत गुस्से में कहती है मतलब क्या है तुम्हारा मैं अपना बेटा तुम्हें दे दूं, तभी राजाराम कहता है नहीं ऐसा कुछ भी नहीं है मैं आपको समझाता हूं। मैं अमन को अपने साथ ले जाऊंगा अपने खानदान का बारिश बनाऊंगा। उसे अच्छे स्कूल में पढ़ा ऊंगा। तभी राजश्री कहती है जी हां जब चाहे आप उससे मिल भी सकते हैं। तभी लीला कहती है इसीलिए तुम रोज हमारे बच्चे से मिलने आती हो और उनके लिए अलग-अलग चीजें लेकर आती हूं, ताकि वह तुम्हारे लालच में आ सके।

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यहां से मैं भूखी मर जाऊंगी लेकिन अपने बेटे का सौदा कभी नहीं करूंगी। श्याम और लीला बच्चों को लेकर अंदर चले जाते हैं, राजश्री और राजाराम दोनों निराश होकर अपने कार के तरफ जाते हैं। वहीं दूसरी और राजू और गीता यह सब देख रहे होते हैं, तभी गीता अपने बेटे दीपू को राजश्री के पास भेजती है। दीपू पीछे से आकर राजश्री का सारी पकड़ लेता है। राजश्री राजाराम से कहती है देखो ना यह बच्चा भी कितना प्यारा लग रहा है, तभी राजाराम कहता है कोई फायदा नहीं यहां अपना बच्चा कोई भी गोद नहीं देगा। चलो यहां से, तभी राज श्री राजाराम से कहती है एक बार बात करके तो देखो शायद वह मान जाए। तब राजाराम कहते हैं ठीक है। राजश्री और राजाराम गीता के पास जाते हैं। तभी राजश्री गीता से कहती है क्या नाम है इस बच्चे का, तभी गीता कहती है दीपू नाम है इसका, और यह मेरा ही बेटा है।

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तभी राजश्री कहती है अच्छा क्या हम दीपू को गोद ले सकते हैं। तभी राजाराम कहता है जी हां आप बदले में जितने रुपए चाहे उतने ले सकते हैं। कहानियां बच्चों की तभी राजू कहता है ठीक है मैं अपना बच्चा आपको सौंप दूंगा लेकिन बदले में हर महीने आप हमें ₹5000 दोगे। तभी राजाराम कहता है मुझे मंजूर है। राजाराम अपने जेब से ₹5000 निकाल कर राजू को दे देता है, और कहता है हर महीने तुम्हें तुम्हारे पैसे मिल जाएंगे। जैसे ही राजाराम और राजश्री दीपू को लेकर जाते हैं। वैसे ही लीला और श्याम घर से बाहर आते हैं और राजू और लीला से कहते हैं, तभी श्याम राजू से कहता है यह क्या किया तूने। अपने बेटे को ही भेज दिया, तभी लीला कहती है तुमने अपने फायदे के लिए अपने बेटे को ही भेज दिया, कैसी मां है तू गीता मुझे तो तुझ से नफरत होने लगी है। तभी लीला श्याम से कहती है सुनो जी आज से आप इन लोगों से कोई रिश्ता नहीं रखोगे, तभी श्याम राजू से कहता है हम गरीब जरूर है लेकिन अपनी खुशी के लिए अपने बच्चों को अपने आप से दूर नहीं करेंगे, good stories for kids जैसा कि राजाराम और राजू के बीच तय हुआ था वैसा ही हुआ राजू और गीता की गरीबी दूर हो गई। अब हम अनचाहा खाते मनचाहा पहनते थे। धीरे-धीरे 7 साल गुजर गए, गीता को एक भयंकर बीमारी ने घेर लिया और एक दिन वह यह दुनिया छोड़ कर चली गई। राजू के पास इतना पैसा होने के बाद भी वह उसको बचा नहीं पाए, अपनी मां को देखने और उनको चिता देने उसका बेटा दीपू नहीं आया। अमन भी अब बड़ा हो गया तो सारा काम अब वही संभालता है। अमन खेत से आता है और कहता है मां पानी पिला दे, तभी लीला कहती है लाइ बेटा तभी अमन राजू से कहता है पापा आज दीपू आ रहा है दीपू के पूरे 10 साल बाद आने की खुशी में राजू चाचा ने शानदार भोज बनवाया है। तभी लीला पानी लेकर आते हुए कहती है हां तो हमें क्या करना है। अमन अपनी मां से कहता है मां आप बड़ों की दुश्मनी में हम बच्चों को अलग ना करो हम और दीपू बचपन के दोस्त हैं। वह मुझसे मिलने जरूर आएगा, बहुत बड़ा आदमी बन गया है मेरा दीपू, तभी बाहर से कार की आवाज आती है। अमन अपनी मां से कहता है शायद दीपू आ गया मां, मैं अभी आता हूं। तभी अमन दीपू से कहता है दीपू आ गया तू कितना बड़ा आदमी बन गया है तू दीपू अमल से कहता है कौन हो तुम और दूर हो मुझसे गवार कहीं का, दीपू की ऐसी बातें सुनकर अमन को बहुत बुरा लगा।

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दीपू इतना कहकर अपने बाबा से मिलने चला जाता है। दीपू अपने बाबा से कहता है मुझे माफ कर दो बाबा मैं मां के अंतिम संस्कार पर नहीं आ पाया। और वह बहुत पछताता है। तभी लीला अमन से कहती है मिल लिया दीपू से चल अब तो खाना खा ले। देख आज कितने सालों बाद मैंने तेरे लिए टमाटर की चटनी बनाई है, अमन गुस्से में खाना फेंक देता है। और कहता है रोज रोज ही खाना यह भी कोई खाना हुआ। आप दोनों ने मिलकर मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी, तभी राजू अमन से कहता है यह क्या कह रहा है तू बेटा अमन कहता है हां आप दोनों ने अपने फायदे के लिए मुझे राजश्री मैडम के साथ नहीं भेजा मैडम पहले मुझे ही अपने साथ ले जाने के लिए आई थी, काश उस वक्त मैं चला जाता तो मैं भी बहुत बड़ा आदमी होता सब आपकी गलती है, तभी लीला कहती है ऐसा नहीं है बेटा हम तुझको खुद से दूर नहीं करना चाहते थे। तभी अमन कहता है आपको भी यही सजा मिलेगी मैं अभी घर छोड़कर जा रहा हूं। नहीं रहना मुझे आप जैसे मतलबी मां बाप के साथ, जिसने अपनी खुशियों के लिए मेरी खुशियों में आग लगा दी।

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इतना कहकर अमन घर के बाहर आ जाता है। अमन के सामने दीपू की गाड़ी खड़ी होती है, वह गुस्से में दीपू की पूरी गाड़ी जला देता है। आग को देखकर सभी लोग घर के बाहर आ जाते हैं, वहां के लोग अमन के हाथ में माचिस पाकर सभी लोग समझ जाते हैं कि गाड़ी में आग अमन ने ही लगाई है। तभी राजाराम अमन से कहता है यह क्या किया तुमने मैं अभी तुम्हें पुलिस के हवाले करता हूं। लीला और श्याम दोनों राजाराम के पैर पकड़ कर माफी मांगने लगते हैं, तभी श्याम राजाराम से कहता है साहब मेरे बेटे को माफ कर दो। उसे पुलिस के हवाले मत करो लीला कहती है हां साहब उसकी पूरी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। आप चाहे तो हम दोनों को जेल भेज दो पर मेरे बेटे को छोड़ दीजिए, मां-बाप का ऐसा प्यार और त्याग देखकर अमन की आंखों में आंसू आ जाते हैं और उसे अपनी गलती का पछतावा होता है।

निष्‍कर्ष :- 

आज के इस पोस्‍ट में हम Short Bedtime best Stories for kids गरीब अनाथ बच्चे की कहानी, गरीब मॉं बाप की कहानी पढा जो कि बहुत ही ज्‍यादा इंटरेस्टिंग और रोचक के साथ साथ बहुत ही सीखने को मिला कि हमें कभी भी हार नही मानना चाहिये। यह पोस्‍ट आपको कैसा लगा कमेंट बॉक्‍स में कमेंट कर अवश्‍य बताएं।  

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