radha krishna painting

Radha Krishna Episode 1- Watch Serial Love Story

Radha Krishna Serial – Watch Episode 1 Love Story

राधाकृष्णा 1.

radha krishna episode 1 दोस्त आज हम बताएंगे एक अजीब से अद्भुत घटना के बारे में जोकि radha krishna hindi serial के बारे में है । आज हम बात करेंगे radha krishna serial episode 1 के बारेंमे जानेंगे । दोस्त इस पोस्ट से आगें radha krishna all episode  बारें में बताएंगे। और radha krishna serial images, radha krishna cute images भी देखने के लिए मिलेगा। चलते हैं दोस्त आप के radha krishna episode 1 की ओर

Radha Krishna Episode 1- Watch Serial Love Story यह एक राधा कृष्ण episode पर अधारीत कहानी हैं जो की पढ़ ने में बहुत ही दिलचस्प लगता हैं और इसे अलग – अलग मिडया के माध्यम से देखा जा सकता हैं, जैसे – trp of indian serials , adha krishna on hotstar, radha krishna serial hotstar , YouTub इत्यादि चैनल के माध्यम से इस कहानी को देखा जा सकता हैं।

radha krishna episode 1
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राधा कृष्ण की इस अदभूत कहानी में जब सूख हो या दुख हो अपनों का साथ परम आवश्यक होता है। सुख हो तो बढ़ जाता है। दुख हो तो घट जाता हैं। अपनो के साथ समय का पता ही नहीं चलता हैं। लेकिन जारा विचार किजए आपको ऐसे स्थान पर छोड़ जाए जहा आपका कोई साथी ना हों और संबंधि ना हो तो क्या होगा। ऐसा लगेगा की समय रूकसा गया हो ऐसा आपको प्रतित होगा ऐसा जब तक आपको लगेगा जब किसी को अपना ना बनालेते या किसी से मित्रता नहीं करलेते लेकिन अब प्रश्न यह उठता है की वास्तव में अपना कोण है। क्या वह संबंधि जिनके साथ आप रक्त से जुड़े है। या फिर जिनके साथ आपका बचपन बिता हो या आपके साथ काम करने वाले लोग जो आपके साथ दिन भड़ रहता है। नही इन में से आपका कोई अपना नहीं हैं। जो आपके विपत्ति में काम ना आये।

अपना वह है जो विपत्ति में काम आये अपनो की पहचान समय आने पर हो जाती हैं। याद रखियेगा की अपनो के साथ समय का पता ही नहीं चलता है। किंतु समय के साथ अपनो का जरूर पता चल जाता हैं। इसी प्रकार radha krishna serial की कहानी है।

radha krishna serial  हमारी संस्कृती में हर देव और हर देवी को अलग – अलग भाव के लीए पुजा जाता है। राम को मर्यादा के लिए तो सीता को सहनशीलता के लिए विष्णु को संचालन के लिए तो लक्ष्मी को वेभव दान के लिए और पार्वती सक्ती का रूप हैं। तो शिव वैराग्य का पर जब बात प्रेम के भाव की आये तो एक ही जोड़ा ऐसा हैं

radha krishna serial images hd
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जिसे साथ – साथ नमन् किया जाता है वो हैं radha krishna love पर इस धरती पर घटी radha Krishna की आलौकिक प्रेम कथा जानने से पहले हमें जानना होगा की वो इस धरा पर क्यो आये क्यों प्रेम की सही परीभाषा समझाने के लिए उन्हे अबतार लेना परा और यह सब जानने के लिए हमे जाना होगा गोलोक जहां युग युगांतर से krishna radha बसते हैं। और यह कथा प्रारंभ तब हुई जब कृष्ण का परम भक्त भेंट करने गोलोक पहुचा तो उसे दुर – दुर तक उसे कुछ नहीं दिखा तभी देव ऋषि जी ने कहा की यह गोलोक हैं radha krishna love story  प्रेम और भक्ती का लोक यदि आपको गोलोक देखना हैं तो प्रभु का नाम तो लेना हीं होगा तो परम भक्त जय श्री कृष्ण बोल-बोल कर पुकारने लगे फिर भी उसे दूर-दूर तक कुछ नहीं दिखा तो फिर से देव ऋषि बोलते हैं नाम अधूरा लोगे तो काम पुरा कैसे होगा श्रीधामा यहां प्रवेश करने के लिए श्री कृष्ण से पहले राधा का नाम लेना होगा तभी श्रीधामा आश्चर्यचकित हो जाता है।

श्री धामा आश्चर्य से देव ऋषि  से कहता है की वो तो प्रभु की प्रेमीका हैं। नहीं ले सकता प्रभु के नाम से पहले देव ऋषि जी कहते हैं की क्या होगा ब्रह्मा जी का भेजा गया संदेश श्रीधामा जी ने कहां ब्रह्मा जी का कोप सह सकता हुं मगर प्रभु जी से पहले उनका नाम लु ये मेरी भक्ति का अपमान होगा। देव ऋषि कहते हैं तो ठिक हैं हम तुम्हारे ओर से इस द्वार का ताला खोल देता हुं जैसे ही देव ऋषि राधा कृष्ण का नाम लेते ही उसे गोलोक में हलचल मचने की सोभाग्य दिखई दी देखते ही कहते हैं श्रीधामा सारे गोकुल बांसी कहां जा रहे हैं। देव ऋषि कहते हैं प्रभु के सिंघार के लिए जो राधा रानी के हाथो से होता हैं।

तभी राधा रानी जी नाचते गाते श्री कृष्ण जी का सिंघार किये सिंघार करते ही एक दुसरे के प्रेम में लीन हो गए । नाचते गाते ही श्रीधमा जी को कृष्ण जी का दर्शन होते हैं उसके बाद राध रानी जी पर नजर परते है। तो श्रीधामा क्रोधित हो जाते हैं। उस समय देव ऋषि जी कहते हैं राधा कृष्ण के बारे में भलेही शरीर अलग – अलग हैं इन दोनो का आत्मा एक हैं। श्रीधामा क्रोध हो कर कहते हैं ये सब माया हैं राधा रानी के बारे में श्रीधामा जी को श्री कृष्ण मिलने बुलाते हैं श्री धामा दौड़ते जाते हैं मिलने वहां जाते ही देखते हैं श्री कृष्ण जी का पांव का चिन्ह मिट्टी में तुरंत श्रीधामा जी मिट्टी को अपने हृदय से लगा लेते हैं। तभी श्री कृष्ण जी कि आवाज सुनाई देती हैं

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श्री कृष्ण जी कहते श्रीधामा से की तुम मेरा दर्शन पाने के लिए राह देखी अब हम तुम्हारे सामने हूं तब भी तुम राह ही देख रहे हो। श्रीधामा देखते ही प्रभु के चरणो में गिड़ जाते हैं। कहते हैं प्रभु आपके दर्शन पा कर धन हो गये हैं। मन की इक्छा पुर्ण हो गये प्रभु तभी श्री कृष्ण कहते हैं। मन का भाड़ भी हलका करो श्री धामा जी ये कहते हैं  तुम हम से कुछ कहने आये थें । श्री धामा कहते हैं की ब्रह्मा जी का संदेश हैं। श्री कृष्ण कहते हैं ब्रह्मा देव के संदेश की नहीं तुम्हारी मन की संदेह के बारे मे बात कर रहा हूं बोलो क्या पिरा हैं ।

श्री धामा कहते हैं प्रभु पिरा तो मन से लेकर आत्मा तक हैं की आप से पहले आपकी प्रेमिका का नाम लिया जाय और प्रेम तो माया हैं उसे भक्ती से कोई संबंध नहीं हैं। तभी श्री धामा जी को कहते हैं इस झरना को देख रहे हो कुछ विचित्र लगा श्री धामा देखते ही आश्चर्य से कहा प्रभु यह झरना नीचे से उपड़ की ओर जारी हैं। तभी कृष्ण जी कहते हैं जो धरती के आकर्षण से नीचे की ओर जाये वो धारा और जो धरती से आकर्षण तोड़कर ऊपर की ओर जाए वो राध हैं, जो सागर से मिलकर अस्तित्व खो दें वह धारा हैं और जो अस्तित्व को तोड़कर उद्गम तक जाए वो राधा हैं और जिवन का सार कृष्ण हैं तो जिवन का आधार हैं राधा । radha krishna today episode

श्री धामा जी कहते हैं ये सब माया हैं प्रभु कृष्ण जी कहते हैं हो सकता हैं जब एक भक्त कष्ठ में हो तो प्रभु से सहायता मागते हैं जब प्रभु एक खुद माया में हो तो हम  किससे सहायता मांगु। श्रीधामा जी कहते हैं प्रभु हम आपकी सहायता कर सकते हैं। श्री कृष्ण जी कहते हैं भोग का समय हो गया हैं शायद तुम्हें वही अब-सर मिल जाय यह कहते ही कृष्ण जी भो के लिए चले जाते हैं।

radha krishna serial images
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भोग करते समय पहुंचता हैं श्रीधामा तो देखता हैं की राधा अपने जुठन कृष्ण को खिला रहीं हैं। श्री धामा क्रोध के कहते हैं बस करो ये सब क्या कर रहीं हैं राधा जी कहती हैं भोग खीला रही हूं मेने माखन चखा ताकी वह खट्टा ना हो अपने प्रिय को सुध भोजन खिलाना विलास नहीं प्रेम की उल्लास हैं। श्रीधामा क्रोध से कहते है हमारे प्रभू को आपने माया में फसाया हैं। और प्रभु के नाम से पहले अपना नाम लेने की परंपरा शरू कि आपने राधा रानी समझाते हुऐ कहती हैं मुझे तुम्हार भक्ती मार्ग से कोई समश्या नहीं तो तुम क्यों प्रेम की मार्ग को निकृष्ट करना चाहते हो श्री धामा जी कहते हैं क्यों की भक्ती प्रेम से श्रेष्ठ हैं।

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हम यह सिद्ध कर के दिख दुंगा। श्री धामा सिद्ध करने में लग जाते हैं। सिद्ध करते समय दोनो का अलग लगल राध कृष्ण का नाम लिये  जाते हैं  जिस में श्री धामा की जित हो ती हैं और प्रभु से कहते हैं प्रभु आपकी केवल जित हुई हैं केवल आप का नाम लिया जाएगा । प्रभु कहते हैं किसी भी फैसला लेने से पहले एक बार सोच लेना चाहीए यह कहते ही कृष्णा जी चले जाते हैं विश्राम के लिए। कृष्ण के पिछे श्रीधामा भी जाते हैं कृष्ण जी कहते हैं की श्री धामा तुम्हारी भक्ती सत्य हैं या राधा का प्रेम माया यह निर्णय लेने के लिए मुझे बहुत सोचना विचाना पड़ेगा । तभी श्री कृष्ण श्रीधामा से कहते हैं तुम मेंरे द्वारपाल बोनोगे श्रीधामा कहते हैं एक भक्त के लिए इससे बढ़कर क्या सम्मान हो सकता हैं। प्रभु श्री कृष्ण कहते हैं तो ठिक है किसी को अंदर नहीं आने दोगें ।

श्रीधामा कहते हैं किसी को भी अंदर नहीं आने दुंगा । श्री कृष्ण विश्राम के लिए चले जाते हैं । कुछ समय बाद राधा रानी मिलने आति हैं तो श्री धामा रूकावट बन कर खड़े हो जाते हैं। राधा रानी कहती हैं मार्ग छोड़िए मुझे कृष्ण पुकार रहें हैं। श्रीधामा कहते हैं मैने तो उनकी पुकार नहीं सुनी राधा रानी कहती हैं।

प्रेम की पुकार बहुत तीव्र होती हैं एक लोक से दुसरे लोक तक सुनाई देती हैं। श्री धामा कहते हैं की कृष्ण ने कहा हैं किसी को भी भितर जाने नहीं देना हैं। राध कृष्ण जी की पुकार सुनते ही अंदर की ओर जाने लगती हैं श्रीधामा बहुत प्रयास करते हैं रोने के लिए फिर भी आगे की और चलते जाती हैं अंत में श्रीधाम राधा रानी को शराफ देते हैं की तुम सौ साल गोलोक से मृत्यु लोक में रहोगी श्री कृष्ण से दुर।  तो उसके बाद एक छोटी बालिका आई बोलती हैं की राधे-राधे बोलो ना श्रीधामा कहते हैं यदि राधे राधे बोलुंगा तो जानती हैं क्या होगा छोटी बालिका बोलती हैं हाँ जानती हूं।

radha krishna png
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श्रीधामा बोलते हैं क्या जानती हैं छोटी बालिका बोलती हैं पहले हम किटयोनी थीं राधे राधे नाम लेने से हमें पंख की प्राप्ति  मिली फिर से आप सब दो बार राधे राधे बोले हमें मानब की प्राप्ति मिली श्रीधामा यह बात सुनकर फुट-फुट कर रोने लगा की हमसे बहुत बरा पाप हो गाया हैं राधा रानी कहती हैं कभी कभी जिसे हम पाप समझते हैं वही पुण्य का आधार होता हैं श्रीधामा तुम ब्रह्म देव का संदेश ले कर आये थें ना संदेश क्या था। श्रीधामा नके कहां वह संदेश ब्रह्म देव ने कहा हैं। कि श्री कृष्ण को धरती पर से अबतरीत होने का समय आ गया हैं श्रीधामा यह बात बोलते ही उसके दिमाग में समझा आ गया की यह तो एक लीला थीं जिसके कारण हम बहुत बड़ा गलती कर बैठे हैं

krishna radha
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श्री कृष्ण ने कहा श्रीधामा से जो संसार सुनता हैं उसे भुला देता हैं जो देखता हैं वह याद रखता हैं तब जा कर श्रीधामा राधा रानी का नाम जाप करने लगते हैं तो इस कहानी में प्रेम की भलिभति के बारे में जाने तो दोस्त अगले पोस्ट में हम यह जानेंगे की किस तरह से राधा और कृष्ण का धरती पर भी जन्म होता हैं । धन्यवाद

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