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Best No 1 Moral story in hindi कहानियाँ हिंदी में

Best No 1 Moral story In Hindi कहानियाँ हिंदी में

इस पोस्‍ट में गरीब बेटी की शादी की story के बारे में पढेंगे यह story पढने में काफी इंटरेस्टिंग इस moral story in hindi से हमें कुुछ सीख भी मिलती है जो कि इस  story के अन्‍दर छिपा हुआ है तो आपका ज्‍यादा समय न लेते हुए चलिए चलतें हैं अपने  आज के story के तरफ । 

रीब बेटी की शादी story in hindi

story in hindi रूपा अपनी पति नामदेव और बेटी संध्या के साथ अजमेर में रहती थी। पति की नौकरी भी ठीक थी दो कमरों का अपना मकान था। रूपा ने संध्या को अपने अच्छे स्कूल में डाल रखा था, नाम देवी संध्या और रूपा की खुशी का ख्याल रखता था। सब कुछ ठीक चल रहा था, पर अचानक मान और रूपा की खुशियों पर किसी की नजर लग गई है। नामदेव को दोस्तों के साथ खाने पीने की आदत पड़ गई, वह अक्सर पार्टी करने के बहाने दोस्तों में शराब और पैसे लगाने लगा। नामदेव रोजाना आधी रात को नशे में घर लौटता था। 1 दिन रूपा ने नामदेव से कहा आपने लौटने में बड़ी देर कर दी, आप रोजाना शराब पियोगे तो आपकी सेहत को नुकसान होगा। तभी नामदेव गुस्से में कहता है मुझे उद्देश्‍य मत दे, और मेरी डॉक्टर बनने की जरूरत नहीं है ठीक है ना, मैं अपने दोस्तों के साथ जाता हूं तो तुझे क्यों तकलीफ होती है। मैं रोज पियूंगा तुझे यहां नहीं रहना है तो चले जा यहां से, नामदेव की यह गंदी आदत बढ़ते ही जा रहे थी। हर समय नशे में रहने की वजह से वह दिन में सोता रहता था, इसलिए उसे नौकरी से भी निकाल दिया गया। धीरे-धीरे नामदेव ने अपना सब कुछ बेच दिया।

story for kids in hindi
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story for kids in hindi यहां तक कि घर भी, अब वह रूपा और संध्या को लेकर एक किराए घर में रहने लगा था। रूपा परेशान रहने लगी, 1 दिन संध्या के स्कूल से फीस का नोटिस आया तभी रूपा ने उसे पढ़कर कहा अरे यह संध्या के स्कूल से फीस का नोटिस अब मैं क्या करूं कहां से फिश कैसे लाऊं, तभी संध्या रूपा से कहती है मां भूख लगी है। कुछ खाने के लिए है तो दे दो। तभी रूपा संध्या से कहती है रुक मैं अभी सब्जी वाले के दुकान से आलू लाकर तुझे मैं रोटी बना कर देती हूं। तभी संध्या रूपा से कहती है हॉं तुम्हारे हाथ का आलू का पराठा बहुत ही सुंदर होता है, संध्या आलू लेने बाजार चली जाती है। रास्ते में वह सोचते जा रहे थे कि ऐसा क्या करें जो संध्या की स्कूल की फीस भर दी जाए। तभी उसकी सहेली का फोन आ जाता है, रूपा की सहेली दूसरे शहर में रहती है सहेली की एक बार बार पूछने पर रूपा अपनी पूरी परेशानी बताती है। तभी संध्या फोन पर आपने सहेली को कहती है अलका बस यही सोच रही हूं कि संध्या का फीस कैसे भरूं और घर का खर्चा कैसे सब करूं, तभी उसकी सहेली अलका कहती है रूपा से अरे तू घबरा मत सब ठीक हो जाएगा अभी तू कहां है, तभी रूपा अलका को कहती है संध्या को मेरी हाथ की आलू के पराठे बहुत पसंद है उसी के लिए आलू लाने जा रही हूं। तभी अलका रूपा से कहती है आलू के पराठे से याद आया तू राजमा चावल कितने अच्छे बनाती थी सब उंगली चाटते रह जाते थे। तू राजमा चावल बना कर क्यों नहीं वेचती इससे तेरी कमाई भी हो जाएगी जिससे तू थोड़ा बहुत परिवार का खर्च उठा पाएगी। सहेली की बात रूपा के दिल में खटक गई, उसे एक उम्मीद दिखाई दे।

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motivational story in hindi पर शुरुआत कैसे करें? उसे यही सोचना था, अगले दिन रूपा ने राजमा चावल बनाएं। और पतीले में लेकर घर के पास सड़क के किनारे बैठ गई। पूरा दिन व धूप में बैठी रही पर किसी ने भी उसके राजमा चावल नहीं खरीदें, शाम को वह घर आ गई उसके राजमा चावल बिल्कुल ही नहीं बिके, वह घर आकर रोने लगी। और रोते-रोते कहने लगी मैं क्या करूं भगवान मैं कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हुई। मुझे हिम्मत दो भगवान तभी संध्या रूपा से कहती है मां जब मैं कभी परीक्षा में अच्छा नहीं करती थी तो तुम ही तो कहती थी दोबारा मेहनत करो, आप भी कल दोबारा कोशिश करना मां, तभी रूपा संध्या को गले लगा कर कहती है मेरी बेटी कितनी समझदार हो गई है। तू ठीक कह रही है संध्या मैं कल फिर कोशिश करूंगी। रूपा अगले दिन फिर दोबारा राजमा चावल बनाती है, पूरा दिन कोई खरीदने नहीं आता रूपा निराश हो जाती है। और मन ही मन कहने लगती है आज भी कोई खरीदने नहीं आया लगता है मुझे यह काम बंद करना पड़ेगा। तभी वहां पर एक आदमी आकर कहता है यहां कुछ खाने को मिलेगा मुझे बहुत जोरों से भूख लगी है यहां की सारी दुकानें बंद हो गई है। आपको देखा तो ऐसा लगा कि यहां कुछ खाने को होगा तभी रूपा मुस्कुराते हुए कहती है जी हां यहां मैं राजमा चावल का प्लेट देती हूं।

short story for kids
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moral story in hindi रूपा उस आदमी को एक प्लेट राजमा चावल देकर कहती है जी ₹20 रुपए, तभी वह आदमी खाते हुए कहता है क्या बात है राजमा चावल तो बड़ा ही स्वादिष्ट बने हैं। आपको पहले तो कभी नहीं देखा यहां क्योंकि मैं पहले कई बार आया हूं इधर, तभी रूपा कहती है जी अभी अभी शुरू किया है। तभी वह आदमी रूपा को ₹20 देकर चला जाता है। पूरा दिन बीत जाने के बाद एक प्लेट ही राजमा चावल बिकी थी रूपा की, पर इस एक प्लेट की पैसों ने उसे हिम्मत दी थी। रूपा अगले दिन राजमा चावल लिए बैठी थी कि पिछली रात वाला ग्राहक दोबारा आया, तभी वह आदमी रूपा से कहता है आपने पहचाना मुझे कल मैंने यहां पर राजमा चावल खाए थे, मैं अपने दोस्तों को लेकर आया हूं आप दो प्लेट बना दीजिए। तभी रूपा उस आदमी से कहती है अभी बना देती हूं साहब, धीरे-धीरे एक से दो व्यक्ति देखते-देखते रूपा के यहां ग्राहक आने और भी ज्यादा हो गए। रूपा कमाए हुए पैसों से संध्या की फीस भरना चाहती थी पर, एक दिन नामदेव संध्या से कहता है यह ट्रंक में क्या छुपा रही है, दिखा, तभी रूपा नामदेव को मायूस होकर कहती है यह रुपए मैंने संध्या के स्कूल फीस के लिए जोड़ के रखे हैं। यह मत ले जाओ, तभी नामदेव कहता है देख मेरे दोस्त मेरा इंतजार कर रहे हैं। यह रुपए दे मुझे दे दे मुझे नामदेव रुपए छीन कर ले जाता है। रूपा बहुत रोने लगती है वही सोचने लगती है, ऐसे में तो यह सारी कमाई शराब में उड़ा देंगे मुझे कुछ रुपए संध्या के भविष्य के लिए भी जोड़ने होंगे। धीरे-धीरे रूपा का काम बहुत जोरो से चलने लगता है वह एक थैला किराए पर लेती है और अब वह ठेले पर राजमा चावल बनाकर बेचने लगी,

kids story in hindi समय बीतता गया रूपा की जिंदगी 15 साल आगे चली गई, संध्या ने भी पैसों की कमी के कारण दसवीं तक ही पढ़ पाए। वह भी अम्मा के काम में हाथ बटाती थी, रूपा मेहनत करते करते करते थक गई थी पर उसकी एक जिम्मेदारी अभी बाकी थी वह थी संध्या की शादी। 1 दिन रूपा की वहीं सहेली जिसने फोन पर बात कर रूपा से मिलने आती है, तभी रूपा की सहेली रूपा को देखकर रोने लगती है मेरी प्यारी सहेली रूपा यह तूने अपना कैसा हाल बना रखा है। तभी रूपा हंसते हुए कहती है तू बैठ अलका यह देख मेरी बेटी संध्या है तो इससे मिल तभी रूपा संध्या से कहती है संध्या यह मेरी मेरठ वाली सहेली है। तभी संध्या अलका से कहती है मौसी मां आपको बहुत याद करती है, तभी सब लोग बैठ जाते हैं तभी अलका रूपा से कहती है रूपा मैं तुम्हारे पास इसलिए आई थी क्योंकि एक अच्छे घर से रिश्ता आया है संध्या भी वहां खुश रहेगी। अभी रूपा अलका से कहती है अलका मेरी यह जिम्मेदारी पूरी हो जाएगी तो मेरे लिए बहुत खुशी की बात है। तभी अलका रूपा से कहती है ठीक है मैं बात कर लेती हूं लड़कों वालों से, रूपा को तसल्ली हो जाती है कि संध्या की शादी हो जाएगी। एक गरीब बेटी की शादी करना गरीब बालों की सबसे बड़ी चिंता होती है, रूपा की सहेली अलका संध्या की रिश्ता पक्की कर देती है रूपा को यह चिंता था कि संध्या की शादी के लिए पैसे कहां से आएंगे। तभी रूपा रोज सुबह सुबह सवेरे उठकर खाना बनाने लगी और रात तक ठेले पर खड़े रहते रहते एक दिन रूपा को चक्कर आता है और वह गिर जाती है।

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short story in hindi रूपा को सर में चोट लग जाती है। तभी संध्या दौड़ते हुए आती है कहती है मां मां, कहकर चिल्लाने लगती है और कहती है मां आंखें खोलो मां मैं अभी डॉक्टर को बुला कर लाती हूं। तभी संध्या रूपा को डॉक्टर के पास ले जाती है डॉक्टर को चेक करने के बाद डॉक्टर संध्या को कहते हैं आई एम सॉरी सी इज नो मोर बॉडी से ज्यादा काम लिया है इन्होंने कमजोर शरीर यह झेल नहीं पाया। इसलिए बीपी बढ़ गई और हार्ट अटैक आ गया, संध्या की तो मानो उसकी जिंदगी लुट गई वह रो-रोकर बुरा हाल हो गया। तभी वहां नामदेव आ जाता है वह भी मरी हुई रूपा के आगे रोने लगता है, संध्या नामदेव से कहती है बापू आप मेरी मां कि शरीर को हाथ मत लगाना। आज आपकी वजह से मेरी मां इस दुनिया से चली गई, तभी नामदेव बहुत जोरों से रोने लगता है और कहता है मुझे माफ कर दे मेरी बच्ची मैंने यह क्या कर दिया। प्रभु रूपा मुझे माफी मांगने का मौका भी नहीं दिया, तूने मेरे पापों के कारण तू चली गई। संध्या मां की याद में दिन भर उदास बैठी रहती थी। नामदेव भी अब संध्या की चिंता में परेशान रहता था। वह कोई काम ढूंढने भी क्या जाता सब उसकी बुरी आदतों को जानते थे, इसलिए काम नहीं देते थे।

story in hindi for kids एक दिन अलका रूपा से मिलने आती है लेकिन उसे पता चलता है रूपा की खबर का तो वह बहुत दुखी होती है। अलका नामदेव को संध्या की रिश्ते की बात बताती है, और कहती है देखिए नामदेव जी अब मेरी सहेली रूपा तो नहीं रही पर संध्या की शादी किस जिम्मेदारी आपके ऊपर हैं। लड़के वाले जल्द ही शादी करना चाहते हैं, आप सोच कर जवाब दे देना। अलका वहां से चली जाती है अलका के जाने के बाद नामदेव सोच में पड़ जाता है कि उसके पास तो एक भी पैसे नहीं, जो व संध्या की शादी कर सके। नामदेव रूपा को याद करके बहुत रोने लगता है। तभी एक आदमी आता है, और कहता है मेरा नाम मोहन है रूपा जी के बारे में पता चला सुनकर बहुत दुख हुआ। तभी नामदेव मोहन से कहता है आपको कुछ काम था रूपा से, तभी मोहन नामदेव से कहता है जी मैं 1 दिन रूपा जी के ठेले पर राजमा चावल खाने आया था। तभी उनसे बात हुई थी मैं जरूरतमंद लोगों के लिए एक बैंक योजना चलाता हूं। रूपा जी भी मेरे पास रुपए जमा करवा दी थी, वह जब भी रुपए जमा कराने आती थी तो यही कहती थी मेरे बेटी संध्या के शादी के काम आएंगे। आज वही रुपए में देने आया हूं, पिछले दिनों उन्होंने मुझे फोन किया था की बेटी की शादी के लिए जरूरत है तो मैं उन्हें दे दूं। ब्याज मिलाकर सारे ₹3,00000 उनके बैंक में जुड़े हुए हैं। आज उन्हें देने आया था,तभी नामदेव जोरों से रोने लगता है और कहता है रूपा तुम अपनी जिम्मेदारी कभी निभाना नहीं भूली जाते-जाते भी अपनी बेटी की शादी जिम्मेदारी निभा गई।
short story नामदेव रुपए को लेकर संध्या के पास जाकर कहता है संध्या बेटी देखो तुम्हारी मां की तरफ से तुम्हारी शादी का तोहफा, यह अंकल जी लाए हैं। संध्या भी यह सब देखकर रोने लगती है, उन रुपयों को नामदेव संध्या की शादी में लगाकर संध्या की शादी कर देता है। और संध्या को ढेर सारा आशीर्वाद भी देता है।

Conclusion

तो दोस्तों आज के इस story में हमने आप लोगों को kahani cast, Hindi short writing, storis, khani,short story for kids,desi kahani, kahani,hindi kahani के बारे में बताया आप लोगों को यह story कैसी लगी एक बार जरूर बताएं और ऐसे ही इंटरेस्टिंग कहानी को पढ़ने के लिए हमारे ब्लॉक वेबसाइट को विजिट करें और नए तरीके की कहानी जानकारी पाने के लिए कमेंट बॉक्स में कमेंट जरूर करें।

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